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इस बार भी नहीं खुला कांग्रेस का खाता, करेंगे हार के कारणों की समीक्षा
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 02 Dec 2017 04:51 PM IST
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यूपी में कांग्रेस पराजय की स्थिति से उबर ही नहीं पा रही है। नगर निकाय क्षेत्रों में उसका प्रदर्शन वर्ष 2012 से भी खराब रहा। नगर निगमों के महापौर पद पर कांग्रेस का खाता इस बार भी नहीं खुला। अलबत्ता, कानपुर, गाजियाबाद, मथुरा, मुरादाबाद और वाराणसी में वह जरूर दूसरे नंबर पर रही।
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पार्टी नेता भले ही इसे अपनी उपलब्धि मानें, पर राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस के लिए संतोषजनक स्थिति नहीं बताते हैं। उनका कहना है कि अगर कांग्रेसी नेता इतने भर से इतरा रहे हैं तो पार्टी के लिए यह ज्यादा नकारात्मक है। वर्ष 2012 के चुनाव में कांग्रेस के 15 नगर पालिका परिषद अध्यक्ष जीते थे, वहीं अब तक घोषित परिणामों में कांग्रेस को नगर पालिका परिषद अध्यक्ष की महज 9 सीटें ही मिलीं।
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उसके नगर पंचायत अध्यक्ष भी 21 से घटकर 17 रह गए। पार्टी के नगर निगम पार्षदों की संख्या भी 100 से घटकर 85 पर पहुंच गई है। अलबत्ता पार्टी के नगर निगम पार्षदों की संख्या जरूर 100 से बढ़कर 110 गई है। नगर पालिका परिषद सदस्यों की संख्या में भी पिछले चुनावों के मुकाबले काफी गिरावट आई है।
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देखें, वर्ष 2012 और 2017 में कांग्रेस की स्थिति
डेमो
वर्ष 2012 और 2017 के नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस की स्थिति
निकाय 2012 2017 (अभी तक मिले परिणामों पर आधारित)
महापौर 0 0
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष 15 9
नगर पंचायत अध्यक्ष 21 17
नगर निगम पार्षद 100 110
नगर पालिका परिषद सदस्य 179 152
नगर पंचायत सदस्य 138 125
हम जनादेश का सम्मान करते हैं। सत्तारूढ़ दल के इशारे पर चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया गया, इसके बावजूद कांग्रेस ने सभी नगर निकाय क्षेत्रों में दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। पार्टी नेतृत्व चुनाव परिणाम आशा के अनुरूप न रहने के कारणों की गहन समीक्षा करेगा। इनमें ईवीएम व मतदाता सूचियों में गड़बड़ियां और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग आदि भी शामिल होंगे। - कृष्णकांत पांडेय, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता
निकाय 2012 2017 (अभी तक मिले परिणामों पर आधारित)
महापौर 0 0
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष 15 9
नगर पंचायत अध्यक्ष 21 17
नगर निगम पार्षद 100 110
नगर पालिका परिषद सदस्य 179 152
नगर पंचायत सदस्य 138 125
हम जनादेश का सम्मान करते हैं। सत्तारूढ़ दल के इशारे पर चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया गया, इसके बावजूद कांग्रेस ने सभी नगर निकाय क्षेत्रों में दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। पार्टी नेतृत्व चुनाव परिणाम आशा के अनुरूप न रहने के कारणों की गहन समीक्षा करेगा। इनमें ईवीएम व मतदाता सूचियों में गड़बड़ियां और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग आदि भी शामिल होंगे। - कृष्णकांत पांडेय, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता