दिल्ली की तरह यूपी के इस शहर की हवा भी है बेहद जहरीली
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इलाके लालबाग और इंदिरानगर में हवा इतनी जहरीली हो चुकी है घर से मास्क पहनकर ही निकलें। चौंकिए नहीं, यह अपील रविवार को ग्रीनपीस इंडिया ने जारी की है। संस्था ने यह भी कहा है कि प्रदूषण का लेवल पता करके ही घर से बाहर निकलें।
संस्था की क्लीन एयर नेशन प्रोजेक्ट की जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि इंदिरानगर के सेंट्रल एकेडमी इलाके में तो जहरीले सूक्ष्मकणों की मात्रा प्रति घन मीटर 449 माइक्रोग्राम तक पहुंच गई है। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार 50 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर ही सूक्ष्मकण होने चाहिए। यानी इस इलाके की हवा मानकों से करीब 9 गुना तक ज्यादा जहरीली हो चुकी है।
यही हाल लालबाग का है। यहां पूरे इलाके की हवा में प्रति घन मीटर 435 माइक्रोग्राम सूक्ष्म कण मौजूद हैं। जबकि तालकटोरा इंडस्ट्रियल एरिया में सूक्ष्म कणों की मौजूदगी 373 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। संस्था लालबाग, सेंट्रल एकेडमी इंदिरानगर और तालकटोरा में ग्रीनपीस इंडिया प्रदूषण की निगरानी कर रही है।
नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स की निगरानी में लालबाग को रेड जोन में रखा गया था। ग्रीन पीस इंडिया ने भी अपनी रिपोर्ट में इस पर मुहर लगा दी है। इंदिरानगर का सेंट्रल एकेडमी और तालकटोरा इंडस्ट्रियल एरिया को भी रेड जोन में रखा गया है।
बुजुर्गों को घर पर ही रहने की सलाह
संस्था की एडवायजरी में साफ कहा गया है कि स्वस्थ लोग भी प्रदूषण का लेवल चेक कर ही घर से बाहर निकलें। बुजुर्गों को खासतौर पर आराम करने और घर में रहने को कहा गया है। संस्था का कहना है कि अगर घर से बाहर किसी काम से जाना ही है तो मास्क जरूर पहन कर जाएं।
आईआईटीआर की रिपोर्ट : आलमबाग में तो हैवी मेटल्स भी
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च ने शहर नौ अलग-अलग इलाकों में निगरानी की थी। इसमें प्रदूषण के मामले में रिहायशी इलाकों में इंदिरानगर और कॉमर्शियल में आलमबाग में हालत खराब बताई गई। आईआईटीआर की रिपोर्ट बताती है कि आलमबाग में मेट्रो के काम और ट्रैफिक जाम से हवा में सूक्ष्म कणों और हैवी मेटल्स घुल रहे हैं। आलमबाग में सूक्ष्म कण पीएम-10 का लेवल 349.8 माइक्रोग्राम प्रति घनमी. पाया गया।
हवा में मौजूद अतिसूक्ष्म कण--व्यावसायिक--रिहाइशी
पीएम--0.56--21--20.91
पीएम--0.32--19.1--15.34
पीएम--0.18--16.01--8.98
पीएम--0.1--10.69--10.77
पीएम--0.056--10.78--7.01
(सभी आंकड़े अधिकतम, माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर।)
ये है ग्रीन पीस इंडिया
1971 में अमेरिका के न्यूक्लियर हथियारों के प्रयोगों के विरोध में कुछ स्वैच्छिक संगठनों ने एक ग्रुप बनाया जो म्यूजिक कंसर्ट कर विरोध के लिए फंड जुटाता। दुनिया के 55 देशों में ग्रीनपीस के कार्यालय हैं। ग्रीनपीस इंडिया की बात करें तो यह एक रजिस्टर्ड सोसायटी है जिसकी स्थापना 2001 में हुई। यह संस्था देश में स्वच्छ हवा और पानी के लिए अभियान चलाती है।
जानिए अपने इलाके की हवा का हाल
लोकेशन--सूक्ष्म कण
व्यावसायिक
आलमबाग--349.8
चौक--341.4
चारबाग--285.9
अमीनाबाद--274.4
रिहाइशी
अलीगंज--224.1
विकासनगर--272.6
इंदिरानगर--310.0
गोमतीनगर--235.2
इंडस्ट्रियल
अमौसी--341.4
आंकडे़ अधिकतम, माइक्रोग्राम प्रति घनमी. के रूप में दिए गए हैं।
हवा में हैवी मेटल्स भी घुलीं
लोकेशन--लेड--निकिल
अलीगंज--55.91--14.53
विकासनगर--93.80--24.53
इंदिरानगर--80.72--18.78
गोमतीनगर--65.20--12.11
चारबाग--410.98--25.49
आलमबाग--192.66--19.94
अमीनाबाद--87.84--15.10
चौक--78.07--21.19
आमौसी--156.5--18.25
सभी आंकड़े नैनोग्राम प्रति घनमी में दिए गए हैं जोकि आईआईटीआर ने पाए।
ग्रीनपीस इंडिया का सरकार को सुझाव
- अलार्मिंग लेवल पर पहुंच चुके प्रदूषण को नियंत्रित किया जाए
- टीवी, रेडियो और दूसरे माध्यमों से लोगों को इसकी जानकारी दें
- स्कूलों में बच्चों और संस्थानों में कर्मचारियों को एन95 मास्क फ्री दिए जाएं
- प्रदूषण कम करने को सख्त निर्णय लेने की आवश्यकता
- प्रदूषण फैला रही वजहों को कम करें
- शहरी इलाके में ग्रीनकवर का अनुपात बढ़ाया जाए
एक्यूआई से तय कीजिए दिनचर्या
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मुकेश शर्मा प्रभारी एक्यूआई का कहना है कि एक्यूआई को बनाने के पीछे हमारा उद्देश्य लोगों को एक माध्यम देना था, जिससे रोजाना व्यायाम, बाहर जाने, खेलने के समय लोग प्रदूषण का स्तर पता लगा सकें। इस टूल को सीपीसीबी को दे दिया गया।
इसके बाद से वही इसका संचालन कर रहे हैं। अगर लोगों को उनके एरिया का एक्यूआई पता चल सके तो वह संबंधित अधिकारियों से शिकायत भी कर सकते हैं कि उनके यहां प्रदूषण कम किया जाए।
वहीं लखनऊ के डीएम राजशेखर का कहना है कि 2001 में 12 लाख वाहन शहर में थे। आधिकारिक आंकड़ा यह है कि 2015 में 23 लाख हो चुकी है। गाड़ियों की इस बढ़ती संख्या से निपटने के लिए प्रभावी और बेहतर समन्वय के साथ काम करना होगा। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हमारी कोशिश है कि सबसे बेहतर निर्णय हो सके।
मोबाइल एप से जानिए प्रदूषण का स्तर
- सफर-एयर : मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरमेंट का एप
- क्लीनएयर नेशन: ग्रीनपीस इंडिया का एप