उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के नए मुख्यमंत्री बनने वाले महंत आदित्यनाथ का असली नाम अजय सिंह है। उत्तराखंड में 5 जून 1972 को जन्मे अजय ने 22 वर्ष की उम्र में ही सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यास ग्रहण कर लिया था। गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में बीएससी करने वाले आदित्यनाथ 1998 में गोरखपुर से सांसद चुने गए थे। वे उस समय 26 वर्ष के थे और उन्होंने सबसे कम उम्र में सांसद बनने का गौरव हासिल किया था।
जानें, कैसे संन्यासी से सिंहासन तक पहुंचे महंत आदित्यनाथ
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गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ ने राजनीति से संन्यास लेने के बाद योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। उसके बाद से आदित्यनाथ संसद में लगातार गोरखपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे 2014 में लगातार पांचवीं बार गोरखपुर से सांसद चुने गए। हर बार उनकी जीत का अंतर बढ़ता गया। आदित्यनाथ शुरू से ही धर्म एवं अध्यात्म से प्रभावित रहे हैं।
शुरुआत में एबीवीपी से जुड़े थे
पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर ब्लॉक के उदयपुर वल्ला पट्टी के ग्राम पंचूर निवासी आनंद सिंह बिष्ट व सावित्री देवी के चार पुत्रों में अजय सिंह (महंत आदित्यनाथ) दूसरे नंबर के हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय ठांगर और इंटर तक की शिक्षा भरत मंदिर इंटर कॉलेज ऋषिकेश में हुई। इसके बाद गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीएससी करने के लिए वे कोटद्वार आ गए। इस दौरान वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और राजकीय महाविद्यालय कोटद्वार के छात्रसंघ चुनाव में महासचिव का चुनाव भी लड़ा। इसके बाद वे एमएससी करने के लिए फिर ऋषिकेश चले गए।
अपने ही मंत्री के खिलाफ खोला था मोर्चा
भाजपा सरकार में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री रहे शिवप्रताप शुक्ला की कार्यप्रणाली से आहत आदित्यनाथ ने 2002 के विधानसभा चुनाव में बगावत का बिगुल फूंक दिया था। डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल को मैदान में उतारकर उन्हें भारी मतों के अंतर से जीत दिलाई। इसके बाद से आदित्यनाथ का कद बढ़ता गया। गोरखपुर की सरहद लांघकर पूरे पूर्वांचल में उन्होंने पैठ बनाई।
2002 में बनाई हिंदू युवा वाहिनी
आदित्यनाथ ने वर्ष 2002 में रामनवमी के दिन हिंदू युवा वाहिनी का गठन कर पूरे पूर्वांचल में अपना संगठन खड़ा कर दिया। उन्होंने धर्म परिवर्तन के खिलाफ मुहिम छेड़ी थी। कट्टर हिंदुत्व की राह पर चलते हुए उन्होंने कई बार विवादित बयान भी दिए।