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पुलिस का एक रूप यह भीः सिपाही ने खून देकर बचाई बेड पर तड़पती बच्ची की जान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 08 Oct 2018 11:18 AM IST
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रक्तदान के बाद सिपाही अरविंद कुमार सिंह
- फोटो : amar ujala
लखनऊ के नाका थाने में तैनात आरक्षी अरविंद कुमार सिंह ने रविवार को मित्र पुलिस की मिसाल पेश की। बलरामपुर अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में बेड पर बच्ची को तड़पते देख डॉक्टर से माजरा पूछा। बच्ची को खून देकर उसकी जान बचाई।
बच्ची के चेहरे पर मुस्कान नजर आते ही परिवारीजनों के खुशी के आंसू छलक पड़े। आरक्षी ने बच्ची के साथ फोटो खिंचाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट की। पुलिस अफसरों के साथ समाज के अनेक लोगों ने उसकी सराहना की है।
अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि वह ड्यूटी के दौरान कार्य से बलरामपुर अस्पताल गया था। इस दौरान आपातकालीन वार्ड के बेड नंबर 115 पर अंजुम नामक बच्ची को तड़पते देखा। बेड के पास खड़ी उसकी मां और बहन की आंखें नम थीं।
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बच्ची भी रो रही थी। आरक्षी अरविंद ने डॉक्टर से माजरा पूछा। पता चला कि बच्ची के परिवार में मां, बहन और बहनोई है। तबीयत काफी खराब होने के चलते बच्ची को खून की जरूरत है। परिवारीजन उसका इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं।
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बच्ची के चेहरे पर मुस्कान नजर आते ही परिवारीजनों के खुशी के आंसू छलक पड़े। आरक्षी ने बच्ची के साथ फोटो खिंचाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट की। पुलिस अफसरों के साथ समाज के अनेक लोगों ने उसकी सराहना की है।
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अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि वह ड्यूटी के दौरान कार्य से बलरामपुर अस्पताल गया था। इस दौरान आपातकालीन वार्ड के बेड नंबर 115 पर अंजुम नामक बच्ची को तड़पते देखा। बेड के पास खड़ी उसकी मां और बहन की आंखें नम थीं।
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बच्ची भी रो रही थी। आरक्षी अरविंद ने डॉक्टर से माजरा पूछा। पता चला कि बच्ची के परिवार में मां, बहन और बहनोई है। तबीयत काफी खराब होने के चलते बच्ची को खून की जरूरत है। परिवारीजन उसका इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं।
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अफसरों ने की उसके कार्य की सराहना
सिपाही अरविंद कुमार सिंह
- फोटो : amar ujala
बेड पर पड़ी बच्ची डॉक्टर से वार्तालाप कर रहे अरविंद को देख रही थी। परिवारीजन भी टकटकी लगाए थे। बच्ची से नजरें मिलते ही अरविंद ने बच्ची को अपना खून देने की बात कही। वर्दी पहन कर ड्यूटी पर निकले अरविंद ने तुरंत जांच कराकर रक्त निकलवाया।
थोड़ी देर बाद बच्ची को खून चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई। उसके चेहरे पर मुस्कान देखकर अरविंद खुश हो उठा। बच्ची की मां और बहन की आंखों में खुशी के आंसू थे। अरविंद ने बच्ची के साथ फोटो खींची और सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली। नाका थाने के सिपाही का सराहनीय कार्य वायरल होते ही अफसरों व समाज के अन्य लोगों ने उसकी सराहना शुरू की।
थोड़ी देर बाद बच्ची को खून चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई। उसके चेहरे पर मुस्कान देखकर अरविंद खुश हो उठा। बच्ची की मां और बहन की आंखों में खुशी के आंसू थे। अरविंद ने बच्ची के साथ फोटो खींची और सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली। नाका थाने के सिपाही का सराहनीय कार्य वायरल होते ही अफसरों व समाज के अन्य लोगों ने उसकी सराहना शुरू की।