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नहीं बाज आ रही पुलिस, अब सीपीएमटी के पेपर में किया बड़ा खेल
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Wed, 25 Jan 2017 02:58 PM IST
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राजधानी पुलिस खेल करने की अपनी आदत से बाज नहीं आ रही। बेटे की हत्या में बुजुर्ग को फंसाने की साजिश रचने के बाद खाकी का एक और कारनामा सामने आया है।
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ताजा मामला सीपीएमटी 2015 पेपरलीक कांड का है। इसमें पुलिस ने बड़ा खेल विवेचक ने पेपरलीक कांड के मुख्य आरोपी व सीतापुर रोड स्थित रामेश्वर इंस्टीट्यूट के संचालक सुरेंद्र शुक्ला सहित तीन लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न होने की बात कहते हुए उनके नाम चार्जशीट से हटा दिए।
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एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक की आपत्ति के बाद एसएसपी लखनऊ मंजिल सैनी को पत्र लिखा तब इस खेल का खुलासा हुआ। एसएसपी ने शुक्रवार को पत्र लिखकर विवेचना दोबारा कराने के आदेश दिए।
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उन्होंने कैसरबाग इंस्पेक्टर को विवेचना सौंपते हुए सीओ कैसरबाग को निगरानी की जिम्मेदारी दी है। एसटीएफ ने 25 मई 2015 को जियामऊ स्थित वीरेंद्र बहादुर पाल के मकान पर छापा मारकर सीपीएमटी परीक्षा 2015 के पेपरलीक कांड का खुलासा करते हुए चार सॉल्वर सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किया था। एसटीएफ के दरोगा संजय कुमार सिंह ने गौतमपल्ली थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी।
इसमें मुख्य आरोपी रामेश्वरम इंस्टीट्यूट के संचालक सुरेंद्र शुक्ला को बनाया गया था। पुलिस को सुरेंद्र शुक्ला के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले थे। विवेचना में खुलासा हुआ कि सुरेंद्र की बेटी टेक्नो ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के फैजाबाद रोड स्थित कॉलेज श्री नारायण इंस्टीट्यूट में सीपीएमटी की परीक्षा दे रही थी।
चार्जशीट में जोड़े श्रीनारायन के प्रिंसिपल व प्रोफेसर के नाम
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- फोटो : अमर उजाला
बेटी को पास कराने के लिए सुरेंद्र ने ही पेपरलीक कांड की साजिश रची। उसने श्री नारायण इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल व परीक्षा केंद्र के अधीक्षक डॉ. निमेष सिंह और प्रो. अरुण कुमार शुक्ला से संपर्क कर बेटी की तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए उसे अलग कमरे में बैठाकर परीक्षा दिलाने के लिए कहा।
मना करने पर उसने बेटी के परीक्षा कक्ष में अपने विजिलेटर रखने को कहा जिस पर डॉ. निमेष व प्रो. अरुण कुमार शुक्ला सहमत हो गए। सुरेंद्र ने अपने इंस्टीट्यूट से ही अशोक त्रिपाठी व अंकुर श्रीवास्तव को विजिलेटर बनाकर भेज दिया।
परीक्षा में ‘सी’ सिरीज का पेपर लीक हुआ था, जो रामेश्वरम इंस्टीट्यूट से निकलने की बात सामने आई थी। विवेचना में सुरेंद्र के नाम के साथ ही रामेश्वरम इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल डॉ. आरके सिंह व पीआरओ अभय पांडेय का नाम भी प्रकाश में लाया गया था लेकिन इन तीनों के नाम हटाकर विवेचक ने चार्जशीट से हटा दिए।
विवेचक ने सुरेंद्र का नाम हटाकर कॉम्प्लीमेंटरी चार्जशीट दाखिल की जिसमें श्रीनारायन इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल महानगर सेक्टर सी निवासी डॉ. निमेष सिंह और प्रतापगढ़ पट्टी के रहने वाले इसी संस्थान के प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार शुक्ला का नाम जोड़ा गया। कॉम्प्लीमेंटरी चार्जशीट में रामेश्वरम इंस्टीट्यूट के पीआरओ अभय पांडेय और डॉ. आरके सिंह का नाम भी शामिल नहीं किया गया।
मना करने पर उसने बेटी के परीक्षा कक्ष में अपने विजिलेटर रखने को कहा जिस पर डॉ. निमेष व प्रो. अरुण कुमार शुक्ला सहमत हो गए। सुरेंद्र ने अपने इंस्टीट्यूट से ही अशोक त्रिपाठी व अंकुर श्रीवास्तव को विजिलेटर बनाकर भेज दिया।
परीक्षा में ‘सी’ सिरीज का पेपर लीक हुआ था, जो रामेश्वरम इंस्टीट्यूट से निकलने की बात सामने आई थी। विवेचना में सुरेंद्र के नाम के साथ ही रामेश्वरम इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल डॉ. आरके सिंह व पीआरओ अभय पांडेय का नाम भी प्रकाश में लाया गया था लेकिन इन तीनों के नाम हटाकर विवेचक ने चार्जशीट से हटा दिए।
विवेचक ने सुरेंद्र का नाम हटाकर कॉम्प्लीमेंटरी चार्जशीट दाखिल की जिसमें श्रीनारायन इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल महानगर सेक्टर सी निवासी डॉ. निमेष सिंह और प्रतापगढ़ पट्टी के रहने वाले इसी संस्थान के प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार शुक्ला का नाम जोड़ा गया। कॉम्प्लीमेंटरी चार्जशीट में रामेश्वरम इंस्टीट्यूट के पीआरओ अभय पांडेय और डॉ. आरके सिंह का नाम भी शामिल नहीं किया गया।
सुरेंद्र के खिलाफ जारी हुआ था एनबीडब्ल्यू
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सुरेंद्र के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया था। एसटीएफ ने उसकी तलाश में त्रिवेणीनगर के मदेयगंज स्थित घर और सीतापुर रोड स्थित इंस्टीट्यूट सहित कई ठिकानों पर दबिश दी।
मोबाइल सर्विलांस से उसके नेपाल भागने की जानकारी भी सामने आई थी। बाद में पता चला कि वह लखनऊ और आसपास के इलाकों में ही छिपकर रह रहा था। कोर्ट से एनबीडब्ल्यू लेकन गौतमपल्ली पुलिस ने उसकी संपत्ति की कुर्की की घुड़की भी दी लेकिन वह हाजिर नहीं हुआ।
तत्कालीन एएसपी पूर्वी रोहित मिश्रा, एएसपी राजीव मल्होत्रा और सीओ हजरतगंज रहे अशोक कुमार वर्मा की भूमिका कठघरे में हैं। पुलिस महकमे में चर्चा है कि नाम हटवाने के लिए विवेचना का पर्यवेक्षण कर रहे एक अधिकारी को 50 लाख रुपये दिए गए।
विवेचक और अन्य अधिकारियों को भी मोटी रकम के अलावा कीमती तोहफे बांटे गए। रामेश्वरम इंस्टीट्यूट के संचालक मदेयगंज त्रिवेणीनगर निवासी सुरेंद्र शुक्ला, बस्ती के डॉ. राजेश रंजन, हुसैनगंज के उदयगंज डायमंड डेरी निवासी प्रफुल्ल चंद्र व उनका बेटा शिवम चंद्र, गोरखपुर कैंट के उग्रसेन, गोमतीनगर निवासी मऊ के वीरेंद्र बहादुर पाल, बस्ती के अंशुमान मिश्रा, कुशीनगर के अभिमन्यु सिंह, बांदा के निशांत कुमार उर्फ मनीष, आजमगढ़ के ईशदत्त पांडेय उर्फ अनुज यादव, कुशीनगर के अच्युतानंद पांडेय, गोरखपुर के रमनध्वज सिंह और बलरामपुर निवासी यहां पुराना महानगर में रहने वाले मो. बशीर उर्फ वसीम।
सीतापुर रोड स्थित रामेश्वरण इंस्टीट्यूट का संचालक सुरेंद्र मुख्य आरोपी था। विवेचना में खुलासा हुआ कि सुरेंद्र की बेटी टेक्नो ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के फैजाबाद रोड स्थित कॉलेज श्री नारायण इंस्टीट्यूट में सीपीएमटी की परीक्षा दे रही थी। बेटी को पास कराने के लिए पेपरलीक कांड की साजिश रची।
मोबाइल सर्विलांस से उसके नेपाल भागने की जानकारी भी सामने आई थी। बाद में पता चला कि वह लखनऊ और आसपास के इलाकों में ही छिपकर रह रहा था। कोर्ट से एनबीडब्ल्यू लेकन गौतमपल्ली पुलिस ने उसकी संपत्ति की कुर्की की घुड़की भी दी लेकिन वह हाजिर नहीं हुआ।
तत्कालीन एएसपी पूर्वी रोहित मिश्रा, एएसपी राजीव मल्होत्रा और सीओ हजरतगंज रहे अशोक कुमार वर्मा की भूमिका कठघरे में हैं। पुलिस महकमे में चर्चा है कि नाम हटवाने के लिए विवेचना का पर्यवेक्षण कर रहे एक अधिकारी को 50 लाख रुपये दिए गए।
विवेचक और अन्य अधिकारियों को भी मोटी रकम के अलावा कीमती तोहफे बांटे गए। रामेश्वरम इंस्टीट्यूट के संचालक मदेयगंज त्रिवेणीनगर निवासी सुरेंद्र शुक्ला, बस्ती के डॉ. राजेश रंजन, हुसैनगंज के उदयगंज डायमंड डेरी निवासी प्रफुल्ल चंद्र व उनका बेटा शिवम चंद्र, गोरखपुर कैंट के उग्रसेन, गोमतीनगर निवासी मऊ के वीरेंद्र बहादुर पाल, बस्ती के अंशुमान मिश्रा, कुशीनगर के अभिमन्यु सिंह, बांदा के निशांत कुमार उर्फ मनीष, आजमगढ़ के ईशदत्त पांडेय उर्फ अनुज यादव, कुशीनगर के अच्युतानंद पांडेय, गोरखपुर के रमनध्वज सिंह और बलरामपुर निवासी यहां पुराना महानगर में रहने वाले मो. बशीर उर्फ वसीम।
सीतापुर रोड स्थित रामेश्वरण इंस्टीट्यूट का संचालक सुरेंद्र मुख्य आरोपी था। विवेचना में खुलासा हुआ कि सुरेंद्र की बेटी टेक्नो ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के फैजाबाद रोड स्थित कॉलेज श्री नारायण इंस्टीट्यूट में सीपीएमटी की परीक्षा दे रही थी। बेटी को पास कराने के लिए पेपरलीक कांड की साजिश रची।