यूपी में इस तरह खुलेआम चल रहा है कच्ची शराब का कारोबार
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जहरीली शराब पीने से उन्नाव में छह लोगों की मौत होने से सूबे की सरकार को कड़े कदम उठाने पड़े, मगर जिले के दो सौ गांवों में कच्ची शराब का कारोबार अब भी फल-फूल रहा है।
इससे जनपद की एक तिहाई आबादी तबाह हो रही है। कच्ची शराब मीठे जहर की तरह लोगों के जीवन को बर्बाद कर रही है। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद कच्ची शराब के कारोबार को रोकने के लिए अभियान चलाया जा रहा है, मगर उसके बावजूद भी यहां कच्ची शराब धड़ल्ले से बनाई जा रही है।
जनपद के दो सौ से अधिक गांवों में कच्ची शराब की भट्ठियां धधक रही हैं। यहां गांव के रहने वाले बाशिंदे ही नहीं, बल्कि दूरदराज के गांवों के लोग भी शराब का सेवन करते आते हैं। हालांकि आबकारी और पुलिस महकमा इन शराब कारोबारियों की धरपकड़ के लिए अभियान चला रहा है, इसके बावजूद कच्ची शराब की बिक्री पर लगाम नहीं लग पा रही है।
ऐसे बनती कच्ची शराब
मिट्टी की भट्ठी पर मर्तबान लगाकर नीचे आग जलाते हैं। मर्तबान में महुआ, गुड़, नौसादर, यूरिया, यीस्त का एक माह का सड़ा हुआ लहन पकाते हैं। मर्तबान में एक ट्यूब लगा होता है। उसका बाकी हिस्सा मिट्टी आदि से बंद कर दिया जाता है।
लहन पकने के बाद ट्यूब के सहारे शराब तैयार होकर भांप की शक्ल में नीचे रिसती है, जहां एक बर्तन लगा होता है। इसमें शराब को एकत्र किया जाता है। इसके बाद इसकी ब्रिकी की जाती है। एक लीटर कच्ची शराब में पांच लीटर पानी मिलाकर उसको पांच लीटर तैयार किया जाता है।
धानेपुर थाना क्षेत्र के पंडित मफिया गांव में वर्ष 2004-05 के बीच कच्ची शराब बनाने व पीने से एक साल के भीतर 21 लोगों की मौत हो गई थी। इस पर भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से एक टीम ने जांच की थी।
पाया था कि जहां कच्ची शराब का निर्माण होता है, वहां लहन व अन्य सामग्री के पड़े रहने से मच्छरों का प्रकोप हो गया था। इससे 21 में आठ लोगों की मौत कालाजार से हुई थी। लेकिन अधिकांश लोगों की मौत कच्ची शराब के सेवन से हुई थी।
जिले के 50 से अधिक गांवों में शराब का कारोबार करने वाले आबकारी व पुलिसकर्मियों से सेटिंग करते हैं। हर माह दोनों महकमों को बाकायदा रुपये देते हैं। इनकी सेटिंग से ही शराब का कारोबार फलता-फूलता है।
करनैलगंज के एक गांव में दो साल पहले पकड़े गए एक कारोबारी ने शराब बनाने के एवज में पुलिस को एक लाख दस हजार रुपये हर महीने देने का खुलासा किया था। इसके बाद कई गांवों में अभियान चलाया गया।
कच्ची शराब के खिलाफ चल रहा है अभियान
कच्ची शराब बनाने वालों के खिलाफ पूरे जनपद में अभियान चल रहा है। कच्ची शराब बनाने वालों के खिलाफ कार्यवाही की गई है। अभियान के दौरान कारोबारियों की धरपकड़ की जा रही है। कच्ची शराब का कारोबार रोकने के लिए छापेमारी की जा रही है।
राजेन्द्र प्रसाद सिंह यादव पुलिस अधीक्षक गोंडा
नौसादर अमोनियम क्लोराइड का नाम है। ठोस नौसादर का प्रयोग करने पर यह गैस में परिवर्तित हो जाता है जो तंत्रिका तंत्र (न्यूरो) को प्रभावित करता है। इसका असर ब्रेन पर पड़ता है और नशे की तीव्रता को बढ़ाता है। अधिक मात्रा में प्रयोग करने पर व्यक्ति की मौत भी हो जाती है।
डॉ. आलोक अग्रवाल
कच्ची शराब बनाने वाले कारोबारियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। शहर के आसपास के गांवों समेत जनपद के सभी क्षेत्रों में तीन टीमें बनाकर छापेमारी कराई जा रही है। कच्ची शराब को बनाने से रोकने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
रामसरन, जिला आबकारी अधिकारी