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यूपी विधानसभा चुनाव : विरोधियों पर प्रहार को पीएम ने दी धार, लाल टोपी के सहारे सपा पर वार
Sun, 12 Dec 2021 08:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अखिलेश वाजपेयी, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 12 Dec 2021 08:41 AM IST
सार
विरोधियों और पड़ोसियों को पीएम का सख्त संदेश। चुनावी बिसात पर सुरक्षा व बदलाव की सजाई गोटें। इस बार ‘फर्क साफ है’ से सपा पर साधा निशाना।
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पीएम मोदी (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
गोरखपुर में ‘लाल टोपी को यूपी के लिए रेड अलर्ट’ बताकर सपा से मुख्य चुनावी बाजी सजाने का संदेश देने के चार दिन बाद प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को बलरामपुर में इस बाजी पर देश की सुरक्षा और भाजपा व गैर भाजपा सरकारों के कामकाज में फर्क यानी काम करने की संस्कृति में बदलाव की गोटें भी जमाने की कोशिश की।
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करीने से जातीय गणित दुरुस्त करते हुए दूसरी सरकारों को फीता काटने वाली और भाजपा सरकारों को काम पूरा करने वाली बताकर चुनावी बिसात पर अपनी चाल ज्यादा धारदार बनाने की कोशिश की। गोरखपुर में लाल टोपी के सहारे सपा पर हमला बोलने वाले प्रधानमंत्री ने बलरामपुर में ‘फर्क साफ है’ से सपा पर प्रहार किया।
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चार दशक से लटकी सरयू नहर परियोजना का निर्माण पूर्ण कराने के बाद उसका लोकार्पण करने आए प्रधानमंत्री ने 8 दिसंबर को हेलीकॉप्टर हादसे जान गंवाने वाले सीडीएस जनरल विपिन समेत सभी शहीदों को याद करते हुए अपने दृढ़ संकल्प को दोहराया। पीएम मोदी ने कहा, योद्धाओं के आकस्मिक निधन के बाद भारत शोक में है।
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लेकिन, हम न तो अपनी गति को रोकेंगे और न ही प्रगति । भले ही हम दर्द से पीड़ित हों। पर, भारत नहीं रुकेगा । जनरल रावत जहां भी होंगे, भारत को नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ते हुए देखेंगे। सरकार देश की सीमाओं की सुरक्षा बढ़ाने और सीमा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के काम को आगे बढ़ाती रहेगी।
पड़ोसी देशों पर भी साधा निशाना
मोदी ने इन बातों के लिए बलरामपुर को ही क्यों चुना तो वरिष्ठ पत्रकार राजनीतिक विश्लेषक वीरेन्द्र भट्ट कहते हैं कि बलरामपुर की सीमा नेपाल से लगती है। नेपाल में चीन का बढ़ता दखल अब कोई ढकी-छिपी बात नहीं है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि प्रधानमंत्री ने बलरामपुर की धरती को क्रांतिकारियों तथा राष्ट्रभक्तों एवं राष्ट्र रक्षकों की बताते हुए जनरल बिपिन रावत और उनके साथ के लोगों को श्रद्धांजलि दी।
जाहिर है कि प्रधानमंत्री ने बलरामपुर से स्व. जनरल बिपिन रावत के सशक्त राष्ट्र, सुरक्षित और सुरक्षित सीमाओं के संकल्प की गति धीमी न होने देने की भांति यूं ही नहीं कही है। यह किसी न किसी को संदेश है। भले ही चुनाव कुछ राज्यों का हो लेकिन इस बार इसमें देश और उसकी सीमाओं की सुरक्षा तथा आतंकवाद पर कठोर प्रहार केंद्र सरकार का प्रमुख हथियार होगा ।
विपक्ष को कठघरे में खड़ा करने की रणनीति
स्थानीय खूबियों को राष्ट्रीय, सांस्कृतिक या आस्था के सरोकारों से जोड़ने में माहिर प्रधानमंत्री ने मां पाटेश्वरी बोलचाल में देवीपाटन शक्तिपीठ से लेकर राममंदिर तक से इस धरती के जुड़ाव का उल्लेख कर इलाके के लोगों की भाजपा के साथ भावनात्मक लामबंदी करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। अटल बिहारी वाजपेयी एवं नाना जी देशमुख के बलरामपुर का हवाला देते हुए उन्होंने नई पीढ़ी को उनके घर से भाजपा के पुराने जुड़ाव का संदेश देते हुए भी चुनावी गणित दुरुस्त करने का काम किया ।
सपा पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा, सुबह से सोच रहा था कि कोई शायद अभी आकर यह कहेगा कि उसने तो इस सरयू नहर को काफी पहले बनवा दिया था। मैं सिर्फ फीता काटने आ रहा हूं । प्रधानमंत्री ने इस मौके का भी पूरा इस्तेमाल अपनी और गैर भाजपा सरकारों तथा केंद्र व प्रदेश में अलग-अलग दलों की सरकार होने से विकास के कामों में आने वाली अड़चनों को बताने में किया। शायद उनकी मंशा यह रही होगी कि इससे लोगों को शायद यह समझ में आ जाए कि 2022 में फिर योगी सरकार बनवाने के लिए वोट देना जरूरी क्यों है ।
फर्क साफ है से किया आगाह
उन्होंने जहां यह कहा कि दूसरी सरकारों ने जिस नहर को 50 साल लटकाए रखा वह प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने पर 5 साल के भीतर बन गई । शायद इसीलिए उन्होंने यह संकेत देना भी जरूरी समझा कि योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के पहले वाली सरकार चाहती तो यह काम कुछ और पहले हो जाता । एक तरह से उन्होंने गैर भाजपा सरकारों को इस इलाके के किसानों की सिंचाई की समस्या के मुद्दे पर कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की।
उन्होंने यह भी बताने पर जोर दिया कि गैर भाजपा दलों को यदि किसानों की दुश्वारी का एहसास होता तो यह काम न सिर्फ 50 वर्ष पहले हो जाता बल्कि काम भी महज 100 करोड़ रुपये के अंदर हो जाता। जिस पर अब 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने पड़े। मोदी ने एक तरह से लोगों को यह एहसास कराने की भी कोशिश की कि परियोजनाओं को लटकाने वाली सरकारें दरअसल आम लोगों का ही आर्थिक नुकसान करती है।