PM Awas Yojana: जमीन की कमी से नहीं बन पा रहे पीएम आवास, विकास प्राधिकरणों ने 62938 प्रस्ताव लौटाए, कानपुर इस सूची में अव्वल
प्राधिकरणों के पास लैंड बैंक की भारी कमी है। जबकि सरकार ने लैंड बैंक बढ़ाने के लिए पिछले साल ही लैंड पुलिंग की नई नीति लागू की है। इसके तहत किसानों की सहमति से भूमि अर्जन करने की व्यवस्था से लैंड बैंक बढ़ाने को कहा गया था। इसके बावजूद प्राधिकरणों ने इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की। ऐसे में विकास प्राधिकरण 62 हजार से अधिक पीएम आवास बनाने से पीछे हट रहे हैं।
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सरकार के बार-बार कहने के बावजूद प्रदेश के अधिकांश विकास प्राधिकरणों ने लैंड बैंक को लेकर कोई रुचि नहीं दिखाई है। इसका नतीजा यह कि करीब एक दर्जन से अधिक बड़े विकास प्राधिकरणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत मकान बनाने से हाथ खड़े कर दिए हैं और दिए गए लक्ष्य में से 62,938 आवास के प्रस्ताव वापस लौटा दिए हैं।
प्राधिकरणों ने इस लक्ष्य को निरस्त करने का प्रस्ताव नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) को भेज दिया है। दरअसल, प्रदेश के सभी प्राधिकरणों के पास लैंड बैंक की भारी कमी है। जबकि सरकार ने लैंड बैंक बढ़ाने के लिए पिछले साल ही लैंड पुलिंग की नई नीति लागू की है। इसके तहत किसानों की सहमति से भूमि अर्जन करने की व्यवस्था से लैंड बैंक बढ़ाने को कहा गया था। इसके बावजूद प्राधिकरणों ने इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की।
इसका असर सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) पर भी पड़ रहा है। इस योजना में आवास विकास परिषद व विकास प्राधिकरणों को 1,32,493 मकान बनाने का लक्ष्य दिया गया था। इन मकानों की कीमत छह लाख रुपये है, जिसमें डेढ़ लाख केंद्र और एक लाख रुपये राज्य सरकार अनुदान के रूप में देती है। इसके बाद भी ये मकान नहीं बन पा रहे हैं। पिछले दिनों प्रमुख सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण ने इस योजना की प्रगति रिपोर्ट मांगी थी। इसमें पता चला कि जमीन की कमी की वजह से लक्ष्य के अनुरूप मकान नहीं बन पा रहे हैं। ताजी रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ वाराणसी विकास प्राधिकरण अपने तय लक्ष्य 858 मकान को पूरा कर रहा है।
इन प्राधिकरणों ने लौटाए प्रस्ताव
आगरा 856, अलीगढ़ 8064, अयोध्या 256, बरेली 1026, बांदा 752, गाजियाबाद 8,628, गोरखपुर 1536, हापुड़-पिलखुआ 1500, झांसी 1248, कानपुर 17000, लखनऊ 4456, मेरठ 2320, मुरादाबाद 3104 और रायबरेली विकास प्राधिकरण ने 457 मकानों के प्रस्ताव वापस लौटाए हैं।