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हाथ उखड़ने का भी है प्लास्टिक सर्जरी में इलाज
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 03 May 2014 03:01 AM IST
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यदि शिशु हाथ न चलाए तो उसे गले में स्थित नर्व क्षतिग्रस्त होने की संभावना (ब्रेकियल फ्लेक्सिस) हो सकती है।
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ये इंजरी प्रसव के समय गलत तरीके से हाथ खींचने से होती है। इसलिए तुरंत प्लास्टिक सर्जन से संपर्क करना चाहिए।
सर्जरी कर क्षतिग्रस्त नर्व को ठीक किया जा सकता है। इससे शिशु का हाथ फिर से काम करने लगेगा।
केजीएमयू में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के 38वें स्थापना दिवस के मौके पर ये जानकारी डॉ. के.एस. शेखर ने दी।
एसोसिएशन ऑफ प्लास्टिक सर्जन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शेखर ने बताया कि दिक्कतों (ऑब्सट्रक्टिव लेबर) के कारण बच्चा को प्रसव के समय बाहर खींचना पड़ता है।
ऐसे में ठीक से हाथ न पकड़ने पर शिशु को ब्रेकियल फ्लेक्सिस हो जाता है।
इसमें नर्व टूट जाती है या फिर उसमें फ्ल्यूड जमा हो जाता है। इससे शिशु का हाथ काम नहीं करता। इस दिक्कत को प्लास्टिक सर्जन दूर कर सकते हैं।
युवाओं या बच्चों में ये दिक्कत एक्सीडेंट से हो जाती है, लेकिन सर्जरी से इस दिक्कत को दूर किया जा सकता है।
डॉ. शेखर ने आंख की पलक की सर्जरी (ऑक्युलोप्लास्टी) को भी प्लास्टिक सर्जरी की एक शाखा बताया।
उन्होंने कहा कि आंख की पूरी पलक बंद न होती हो, चेहरे के लकवे से पूरी तरह से कार्य न करती हो, तेजाब के कारण पलक जल गई हो या फिर जन्मजात विकृति हो, किसी भी तरह की दिक्कत को प्लास्टिक सर्जरी से ठीक किया जा सकता है।
केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हेड प्रो.ए.के.सिंह ने बताया कि ऊपरी पलक बहुत ही पतली त्वचा से बनी होती है। उसके खुलने-बंद होने की प्रक्रिया में भी तंतु ही सक्रिय होते हैं। चोट से ये तंतु टूट जाते हैं।
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इससे पलक बंद होना और खुलना बंद हो जाता है। सर्जरी से इसे ठीक किया जा सकता है।
इस मौके पर केजीएमयू कुलपति प्रो.रविकांत ने कहा कि 34 वर्ष पूर्व इस विभाग में पहली बार सर्जरी रेजीडेंट के रूप में आए थे।
केजीएमयू में बर्न यूनिट बनाने की एक कवायद फिर शुरू हो गई है। प्रो.ए.के.सिंह ने बताया कि केंद्र व प्रदेश सरकार से बर्न यूनिट बनाने केलिए 3 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।
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यदि प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है तो पहले चरण में 12 बेड की बर्न यूनिट बनाने की योजना है।
विभाग के पास इसके लिए जगह भी है। न्यूरो सर्जरी विभाग के खाली वार्ड को बर्न यूनिट के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
विभाग की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में ओपीडी में 13101 मरीज आए थे, जिनमें 2037 मरीजों की सर्जरी की गई थी, 2013 में 15219 मरीज आए, जिनमें 2582 सर्जरी हुई।
प्लास्टिक सर्जरी विभाग पिछले आठ वर्षों से 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं भी चला रहा है।
इसके लिए मोबाइल नंबर 9415200444 पर संपर्क किया जा सकता है।
इस नंबर पर कटे अंगों को सुरक्षित तरीके से अस्पताल तक लाने, आग से झुलसने की स्थिति में सलाह भी ला जा सकती है।