लखनऊ के केजीएमयू में प्लाज्मा बैंक की शुरुआत, बचेगी कोरोना के गंभीर मरीजों की जान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केजीएमयू में स्थापित प्लाज्मा बैंक से प्रदेशभर के कोरोना के गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकेगी। यहां इकट्ठा होने वाले प्लाज्मा को जरूरत के हिसाब से विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में भर्ती गंभीर मरीजों को उपलब्ध कराया जा सकेगा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्लाज्मा बैंक की शुरुआत की।
राज्यपाल ने कहा कि अभी तक कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं है। ऐसे में प्लाज्मा बैंक पूरे प्रदेश के मरीजों के लिए कारगर साबित होगा। प्लाज्मा थेरेपी से रिकवरी दर बढ़ेगी और मृत्युदर में गिरावट आएगी।
कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. बिपिन पुरी ने कहा कि प्रदेश के पहले प्लाज्मा बैंक की शुरुआत केजीएमयू में होने से टीम उत्साहित है। यहां से सरकारी एवं गैर सरकारी अस्पतालों को प्लाज्मा उपलब्ध कराया जाएगा। प्लाज्मा डोनेट करने वाले की पहले एचआईबी, हेमोग्लोबिन, मलेरिया, हेपेटाइटिस बी, सी, सेफलिस एवं कम्पलिट ब्लड काउंट की जांच की जाती है।
ऐसे में संबंधित व्यक्ति में इनमें से कोई भी बीमारी मिलती है तो उसका तत्काल इलाज शुरू हो जाता है। इस दौरान प्रति कुलपति जीपी सिंह, सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार, रिसर्च डीन प्रो. आरके गर्ग सहित सभी विभागों के विभागाध्यक्ष व अन्य संकाय सदस्य मौजूद रहे।
सुरक्षित है प्लाज्मा डोनेशन
केजीएमयू ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि प्लाज्मा डोनेशन पूरी तरह सुरक्षित है। डोनेशन करने वाले को किसी तरह का खतरा नहीं होता है। जो लोग कोरोना से ठीक हो गए हैं वे प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं।
दानदाता का ब्लड प्लाज्मा फेरेसिस मरीज में जाता है। इसमें सिर्फ वही ब्लड लिया जाता है जिसमें कोरोना संक्रमण से लड़ने की एंटीबाडी होती है। हर व्यक्ति के शरीर में पांच से छह लीटर खून होता है, जबकि प्लाज्मा सिर्फ 400 से 500 मिलीलीटर लिया जाता है। ऐसे में डोनेट करने वाले व्यक्ति का खून शुद्ध करके फेरेसिस मरीज के जरिए फिर से उसके शरीर में चला जाता है।
प्लाज्मा थेरेपी का पहला प्रयोग केजीएमयू में
प्रदेश में प्लाज्मा थेरेपी का पहला प्रयोग केजीएमयू में किया गया। इसके बाद 12 मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी का ट्रायल भी हुआ। अब तक 20 से अधिक अन्य मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी दी जा चुकी है, जबकि 45 लोग डोनेशन कर चुके हैं।