विसर्जन के साथ पितर विदा

ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 25 Sep 2014 12:37 PM IST
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सुबह से ही घरों और घाटों पर तर्पण-विसर्जन के साथ ही बुधवार को पितर विदा हुए। घरों में जजमानों ने पितरों का श्राद्ध किया और नदियों के किनारे पितरों का विसर्जन किया।
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सुबह से दोपहर तक शनि मंदिर घाट, झूलेलाल घाट, कुड़ियाघाट, महाराज अग्रसेन घाट समेत डालीगंज में नदियों के किनारे लोगों ने पितरों का विसर्जन किया।
इसी के साथ पिछले 15 दिनों से चल रहा पितृपक्ष समाप्त हुआ। पितरों के विदा होते ही शाम से शारदीय नवरात्र की तैयारियां शुरू की।
सुबह घरों में लोगों ने तर्पण और विसर्जन के बाद पितरों को पिंड दान-पूजन कर, उनसे क्षमायाचना की। इसके बाद प्रवाह योग्य वस्तुएं जल में प्रवाहित की जबकि बचे हुए भोज्य पदार्थ को खुले स्थान पर पशु-पक्षियों के लिए रखे।

चौक के कुड़ियाघाट, झूलेलाल घाट और शनि मंदिर घाट पर पितृ विसर्जन के लिए पहुंचे लोग घाटों पर गंदगी से परेशान रहे। गायत्री परिवार की ओर से इंदिरानगर में तड़के सामूहिक तर्पण और विसर्जन में लगभग 40 की संख्या में जजमानों से अपने पितरों का श्राद्ध किया।

परिवार के उमानंद शर्मा की मौजूदगी में यहां सभी ने हवन कर उनसे क्षमायाचना की। डालीगंज निवासी पंडित कृष्णकांत ने बताया कि अमावस्या के दिन से पितर स्वत: ही घरों से विदा हो जाते हैं और पुन: द्वार खुलने तक (दीपावली तक) नदियों के किनारे और तीर्थों के आसपास ही विचरते रहते हैं।

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