पायनियर अरबन को-ऑपरेटिव का बैंकिंग लाइसेंस निरस्त
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पायनियर अरबन को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने निरस्त कर दिया है। बैंक के बचे हुए ग्राहक अपना पैसा निकालने के लिए परेशान हो रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से बैंक के ठाकुरगंज स्थित कार्यालय पर ताला लगा हुआ है और कोई भी ग्राहकों को जवाब देने वाला नहीं है। ग्राहकों का कहना है कि बैंक ने उन्हें छह महीने में पैसा लौटाने को कहा था। पर ताला लगने से वे परेशान हैं।
बैंक पर पिछले साल मार्च से विभिन्न आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे, जिसके बाद से ग्राहकों ने यहां से अपने खाते बंद करवाने शुरू कर दिए थे। आरबीआई के सहायक सलाहकार अजित प्रसाद की ओर से जारी आदेश के अनुसार बैंक को अब किसी भी तरह की बैंकिंग गतिविधि चलाने का अधिकार नहीं होगा।
उनके अनुसार 15 जुलाई 2016 को लाइसेंस निरस्त करने का निर्णय लिया गया था। दूसरी ओर राजधानी में ठाकुरगंज स्थित बैंक के कार्यालय पर ताला लगा है। यहां आरबीआई का नोटिस लगा है जिसमें बताया गया है कि उसे बैंकिंग कारोबार के लिए दिया गया लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। यह नोटिस 25 जुलाई को जारी किया गया है।
बैंक के कोई अधिकारी यहां मौजूद नहीं थे। वहीं आसपास के दुकानदारों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से बैंक का कोई अधिकारी या कर्मचारी यहां नहीं आया है। एक हफ्ते पहले यहां ताला लगाया गया था। वहीं सूत्रों केअनुसार बैंक के ज्यादातर ग्राहक अपने खाते पिछले एक साल में बंद करवा चुके हैं।
अचानक जड़ा ताला, फोन भी बंद करवाया
फिलहाल करीब सवा सौ ग्राहकों के खाते यहां बचे हैं, जिन्हें अधिकारियों ने छह महीने में पैसा लौटाने का वादा किया है, लेकिन उन्हें यह बहुत विश्वसनीय नहीं लग रहा। इसकी वजह है कि बैंक का कार्यालय तहसीनगंज में हुआ करता था, वहां से इसे बदलकर ठाकुरगंज में शिफ्ट कर दिया गया। अब अचानक यहां ताला लगा दिया गया है। बैंक का फोन नंबर 0522-3214126 भी बंद करवा दिया गया है।
कब क्या हुआ...
26 मार्च 2015 : आरबीआई ने लगाए प्रतिबंध
आरबीआई की प्रमुख सीजीएम अल्पना किल्लावाला ने पायनियर बैंक की बेहद खराब आर्थिक हालत को देखते हुए उस पर कई प्रतिबंधों की घोषणा की। इन प्रतिबंधों को जनहित के लिए जरूरी बताया गया। छह महीने के लिए यह प्रतिबंध लगाए गए थे, जिसके अनुसार आरबीआई से अनुमति लिए बगैर बैंक कोई लोन नहीं दे सकता, लोन रिन्यू नहीं कर सकता, किसी को एडवांस नहीं देगा, कहीं निवेश नहीं करेगा, किसी से फंड उधार नहीं लेगा, न पैसा जमा करेगा न किसी की देनदारी चुकाएगा। बैंक को अपनी चल-अचल संपत्ति बेचने का अधिकार भी नहीं होगा।
23 सितंबर 2015 : पाबंदी छह महीने बढ़ाई
आरबीआई ने इन प्रतिबंधों को छह महीने के लिए और बढ़ा दिया। साथ ही साफ किया गया कि इसे बैंक का लाइसेंस कैंसिल करना नहीं समझा जाए।
तीन महीने के लिए फिर बढ़ाया प्रतिबंध
21 मार्च 2016 : तीन महीने के लिए फिर बढ़ाया प्रतिबंध
आबीआई के सहायक सलाहकार अजित प्रसाद ने आदेश जारी कर इस दफा प्रतिबंध तीन महीने के लिए और बढ़ा जो 23 जून तक के लिए थे। वहीं 21 जून को आरबीआई ने पाबंदी फिर से तीन महीने के लिए बढ़ा दिया।
16 जुलाई 2016 : लाइसेंस निरस्त
पिछले प्रतिबंध के तीन महीने पूरे होने से पहले ही आरबीआई ने इसका बैंकिंग लाइसेंस निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए।
दूसरा को-ऑपरेटिव बैंक जो होगा बंद, तीसरा जिस पर पाबंदियां लगीं
लखनऊ में इस साल के शुरू होने तक 14 को-ऑपरेटिव बैंक थे। इनमें से तीन पर आरबीआई ने कमजोर आर्थिक हालात और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए।
हिंदुस्तान को-ऑपरेटिव बैंक पर भी आरबीआई ने लगाए थे प्रतिबंध
एचसीबीएल : इससे पहले हिंदुस्तान को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर भी आरबीआई ने कालेधन को सफेद करने के मामले में प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद बैंक ने अपना लाइसेंस खत्म करने के लिए आरबीआई को लिखा था।
आरबीआई ने फिलहाल लाइसेंस को बनाए रखा है और प्रतिबंधों को आगे बढ़ाया जा रहा है। 17 अप्रैल 2015 को पहले प्रतिबंध लगाए गए थे, जिसे छह-छह महीने में बढ़ाया जाता रहा और पिछले आदेश 15 अक्टूबर 2016 तक के लिए हैं।
इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक : 13 जून 2014 को आरबीआई ने इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक पर प्रतिबंध लगाए। इसे भी समय-समय पर बढ़ाया जा रहा है। पिछली दफा प्रतिबंध 11 मार्च 2016 को बढ़ाया गया था और ये 11 सितंबर 2016 तक जारी रहेंगे।