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८७ साल के बुजुर्ग सिविल इंजीनियरिंग में करना चाहते हैं पीएचडी
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87 की उम्र में पीएचडी की ललक
- एकेटीयू की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए जीके भट्ट
- बोले- अपनी जानकारी बढ़ाने के लिए पढ़ता रहता हूं
अक्षय कुमार
लखनऊ। छड़ी और बेटे के सहारे जब 87 साल के बुजुर्ग पीएचडी प्रवेश परीक्षा देने केंद्र पर पहुंचे तो वहां मौजूद शिक्षक और छात्र उन्हें देखते रह गए। सभी को वह सूत्र वाक्य फिर से याद आ गया कि ‘पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती।’ पीडब्ल्यूडी के सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर ज्ञान कृष्ण भट्ट डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग में पीएचडी करना चाहते हैं। उन्होंने पूरी तैयारी के साथ रविवार को लखनऊ स्थित परीक्षा केंद्र बंसल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में प्रवेश परीक्षा दी। जिस कक्ष में वह थे, वहां लगभग 30 साल के शिक्षक ड्यूटी में तैनात थे।
नौकरी में भी पढ़ता रहा, नौकरी के बाद भी पढ़ रहा हूं
जीके भट्ट ने स्नातक के बाद नौकरी प्राप्त कर ली, लेकिन ज्ञान की ललक कम नहीं हुई। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि आजकल युवा जॉब के लिए पढ़ाई करते हैं। मैं अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए नौकरी के दौरान भी पढ़ाई करता रहा और नौकरी के बाद भी पढ़ाई कर रहा हूं।
एचबीटीयू में भी किया आवेदन
जीके भट्ट ने बताया कि उन्होंने पिछले साल भी एकेटीयू की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में किस्मत आजमाई थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। क्योंकि गेट क्वालीफाई अभ्यर्थियों को प्रवेश में वरीयता मिल जाती है। इस साल एचबीटीयू में भी पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन किया है। मौका लगा तो वहां से ही पीएचडी करूंगा।
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बेटी व बेटी भी पढ़ाई में अव्वल
जीके भट्ट ने 1959 में नौकरी जॉइन की और 1990 में सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने बताया कि बेटी प्रीती मेहता अमेरिका में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर के रूप में कार्यरत है। वह वहीं बस गई है। मैंने उसे भी पीएचडी के लिए प्रेरित किया है। बेटा अनूप भट्ट बीकॉम, एमकॉम, एलएलबी की पढ़ाई कर चुका है और वैदिक मेथेडिक की क्लास लेता है। पत्नी शकुंतला भट्ट मेरी पढ़ाई और दिनचर्या को बेहतर करने में सहयोग करती हैं।
नौकरी में भी साबित हुए मील का पत्थर
जीके भट्ट ने बताया कि मैं स्ट्रक्चर डिजाइन का काम करता रहा हूं। भेल जगदीशपुर की स्टैंपिंग यूनिट के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी क्रम में रायबरेली व बाराबंकी में स्प्रिंग मिल के निर्माण का काम कराया। टिहरी में तैनाती के दौरान राम झूले का निर्माण मात्र सात महीने में पूरा कराने का काम किया है।
इससे पहले प्राप्त की डिग्री
बीएससी इंजीनियरिंग- बीएचयू - वर्ष 1958
डिप्लोमा इन पब्लिक एड- लविवि- वर्ष 1978
डिप्लोमा इन कंप्यूटर मैनेजमेंट- अहमदाबाद यूनिवर्सिटी- वर्ष 1979
डिप्लोमा इन बिजनेस एड- बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन
लॉ ग्रेजुएट- लविवि- वर्ष 1981
पीजी डिप्लोमा इन कंप्यूटर डिजाइन- अन्नामलाई यूनिवर्सिटी, तमिलनाड़ु- वर्ष 2012
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87 की उम्र में पीएचडी की ललक
- एकेटीयू की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए जीके भट्ट
- बोले- अपनी जानकारी बढ़ाने के लिए पढ़ता रहता हूं
अक्षय कुमार
लखनऊ। छड़ी और बेटे के सहारे जब 87 साल के बुजुर्ग पीएचडी प्रवेश परीक्षा देने केंद्र पर पहुंचे तो वहां मौजूद शिक्षक और छात्र उन्हें देखते रह गए। सभी को वह सूत्र वाक्य फिर से याद आ गया कि ‘पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती।’ पीडब्ल्यूडी के सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर ज्ञान कृष्ण भट्ट डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग में पीएचडी करना चाहते हैं। उन्होंने पूरी तैयारी के साथ रविवार को लखनऊ स्थित परीक्षा केंद्र बंसल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में प्रवेश परीक्षा दी। जिस कक्ष में वह थे, वहां लगभग 30 साल के शिक्षक ड्यूटी में तैनात थे।
नौकरी में भी पढ़ता रहा, नौकरी के बाद भी पढ़ रहा हूं
जीके भट्ट ने स्नातक के बाद नौकरी प्राप्त कर ली, लेकिन ज्ञान की ललक कम नहीं हुई। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि आजकल युवा जॉब के लिए पढ़ाई करते हैं। मैं अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए नौकरी के दौरान भी पढ़ाई करता रहा और नौकरी के बाद भी पढ़ाई कर रहा हूं।
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एचबीटीयू में भी किया आवेदन
जीके भट्ट ने बताया कि उन्होंने पिछले साल भी एकेटीयू की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में किस्मत आजमाई थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। क्योंकि गेट क्वालीफाई अभ्यर्थियों को प्रवेश में वरीयता मिल जाती है। इस साल एचबीटीयू में भी पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन किया है। मौका लगा तो वहां से ही पीएचडी करूंगा।
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बेटी व बेटी भी पढ़ाई में अव्वल
जीके भट्ट ने 1959 में नौकरी जॉइन की और 1990 में सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने बताया कि बेटी प्रीती मेहता अमेरिका में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर के रूप में कार्यरत है। वह वहीं बस गई है। मैंने उसे भी पीएचडी के लिए प्रेरित किया है। बेटा अनूप भट्ट बीकॉम, एमकॉम, एलएलबी की पढ़ाई कर चुका है और वैदिक मेथेडिक की क्लास लेता है। पत्नी शकुंतला भट्ट मेरी पढ़ाई और दिनचर्या को बेहतर करने में सहयोग करती हैं।
नौकरी में भी साबित हुए मील का पत्थर
जीके भट्ट ने बताया कि मैं स्ट्रक्चर डिजाइन का काम करता रहा हूं। भेल जगदीशपुर की स्टैंपिंग यूनिट के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी क्रम में रायबरेली व बाराबंकी में स्प्रिंग मिल के निर्माण का काम कराया। टिहरी में तैनाती के दौरान राम झूले का निर्माण मात्र सात महीने में पूरा कराने का काम किया है।
इससे पहले प्राप्त की डिग्री
बीएससी इंजीनियरिंग- बीएचयू - वर्ष 1958
डिप्लोमा इन पब्लिक एड- लविवि- वर्ष 1978
डिप्लोमा इन कंप्यूटर मैनेजमेंट- अहमदाबाद यूनिवर्सिटी- वर्ष 1979
डिप्लोमा इन बिजनेस एड- बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन
लॉ ग्रेजुएट- लविवि- वर्ष 1981
पीजी डिप्लोमा इन कंप्यूटर डिजाइन- अन्नामलाई यूनिवर्सिटी, तमिलनाड़ु- वर्ष 2012
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