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पीएफ व्यवस्था होगी पारदर्शी : उदय बक्शी
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आईआईए भवन में छूटप्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए हुई कार्यशाला।
लखनऊ। कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा केवल पीएफ खाते तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षित निवेश, पारदर्शी व्यवस्था और जवाबदेह प्रबंधन से भी जुड़ी है। इसी दिशा में सोशल सिक्योरिटी कोड-2020 और कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026 के प्रस्तावित प्रावधानों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय उद्योग संघ (आईआईए) भवन में ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से छूटप्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए शुक्रवार को आयोजित कार्यशाला में इन प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा हुई।
अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त उदय बक्शी ने कहा कि सोशल सिक्योरिटी कोड-2020 और कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026 के प्रस्तावित प्रावधान अनुपालन व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाएंगे। उन्होंने अधिकारियों के साथ छूटप्राप्त प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों से संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
कार्यशाला में क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1 (उत्तर प्रदेश) पवन कुमार सिंह ने कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026 के प्रस्तावित छूट प्रावधानों की जानकारी दी। नई व्यवस्था में डिजिटल रिकॉर्ड संधारण, ऑनलाइन रिपोर्टिंग, वैधानिक ऑडिट और अधिसूचित निवेश पैटर्न का पालन अनिवार्य होगा। छूट प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के लिए प्रभावी रहेगी, जिसके बाद निर्धारित शर्तों के आधार पर नवीनीकरण किया जाएगा। अमनेस्टी योजना-2026 के तहत पात्र पीएफ ट्रस्टों को नियमितीकरण का एकमुश्त अवसर मिलने की भी जानकारी दी गई।
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केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) के सदस्य विनीत नाहटा ने कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित और संतुलित निवेश पर जोर दिया। कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए पीएफ फंड के निवेश में संतुलन और सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
अंत में क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-2 आशीष कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला में ईपीएफओ के शोभित सिंघल (वाराणसी), अभिषेक कुमार मिश्रा (गोरखपुर), केआर जोशी (कानपुर), भारतीय उद्योग संघ के वैभव अग्रवाल और राजीव जैन सहित एनटीपीसी, बजाज हिंदुस्तान, एचएएल, यूपीडेस्को, यूपी स्टेट शुगर कॉरपोरेशन, यूपी सिडको, डीएवी पब्लिक स्कूल, स्प्रिंगडेल स्कूल तथा अन्य छूटप्राप्त प्रतिष्ठानों और भविष्य निधि ट्रस्टों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त उदय बक्शी ने कहा कि सोशल सिक्योरिटी कोड-2020 और कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026 के प्रस्तावित प्रावधान अनुपालन व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाएंगे। उन्होंने अधिकारियों के साथ छूटप्राप्त प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों से संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
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कार्यशाला में क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1 (उत्तर प्रदेश) पवन कुमार सिंह ने कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026 के प्रस्तावित छूट प्रावधानों की जानकारी दी। नई व्यवस्था में डिजिटल रिकॉर्ड संधारण, ऑनलाइन रिपोर्टिंग, वैधानिक ऑडिट और अधिसूचित निवेश पैटर्न का पालन अनिवार्य होगा। छूट प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के लिए प्रभावी रहेगी, जिसके बाद निर्धारित शर्तों के आधार पर नवीनीकरण किया जाएगा। अमनेस्टी योजना-2026 के तहत पात्र पीएफ ट्रस्टों को नियमितीकरण का एकमुश्त अवसर मिलने की भी जानकारी दी गई।
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केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) के सदस्य विनीत नाहटा ने कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित और संतुलित निवेश पर जोर दिया। कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए पीएफ फंड के निवेश में संतुलन और सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
अंत में क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-2 आशीष कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला में ईपीएफओ के शोभित सिंघल (वाराणसी), अभिषेक कुमार मिश्रा (गोरखपुर), केआर जोशी (कानपुर), भारतीय उद्योग संघ के वैभव अग्रवाल और राजीव जैन सहित एनटीपीसी, बजाज हिंदुस्तान, एचएएल, यूपीडेस्को, यूपी स्टेट शुगर कॉरपोरेशन, यूपी सिडको, डीएवी पब्लिक स्कूल, स्प्रिंगडेल स्कूल तथा अन्य छूटप्राप्त प्रतिष्ठानों और भविष्य निधि ट्रस्टों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

आईआईए भवन में छूटप्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए हुई कार्यशाला।

आईआईए भवन में छूटप्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए हुई कार्यशाला।

आईआईए भवन में छूटप्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए हुई कार्यशाला।

आईआईए भवन में छूटप्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए हुई कार्यशाला।

आईआईए भवन में छूटप्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए हुई कार्यशाला।