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Lucknow News: चैंबर ध्वस्तीकरण के खिलाफ याचिका, हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के लिए किया संबद्ध
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चैंबर ध्वस्तीकरण के खिलाफ याचिका, हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के लिए किया संबद्ध
लखनऊ। कैसरबाग स्थित सिविल कोर्ट परिसर के आसपास अतिक्रमण हटाने के दौरान अधिवक्ताओं के चैंबर ध्वस्त किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रविवार शाम करीब 4:45 बजे अर्जेंट सुनवाई की। न्यायालय ने याचिका को पहले से लंबित जनहित याचिका के साथ संबद्ध करते हुए सोमवार (26 अक्तूबर) को पेश करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता राजेश कुमार दीक्षित की याचिका पर यह आदेश दिया। याचिका में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को याची का चैंबर ध्वस्त नहीं करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
मामले की तात्कालिकता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर रविवार को विशेष खंडपीठ गठित की गई। सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के तहत ध्वस्तीकरण दस्ता मौके पर पहुंचा था और कुछ हिस्सा ध्वस्त भी किया गया। हालांकि, बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के जुटने और कार्रवाई का विरोध करने के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए ध्वस्तीकरण रोकना पड़ा।
नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि सिविल कोर्ट परिसर के आसपास से अतिक्रमण हटाने का मामला पहले से जनहित याचिका में विचाराधीन है। इस मामले में 10 सितंबर 2026 के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसी मुद्दे पर दाखिल एक अन्य याचिका भी 10 अक्तूबर को खारिज हो चुकी है। न्यायालय ने परस्पर विरोधी आदेशों से बचने के लिए नई याचिका को पहले से लंबित जनहित याचिका के साथ संबद्ध करने का निर्देश दिया।
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मामले की तात्कालिकता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर रविवार को विशेष खंडपीठ गठित की गई। सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के तहत ध्वस्तीकरण दस्ता मौके पर पहुंचा था और कुछ हिस्सा ध्वस्त भी किया गया। हालांकि, बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के जुटने और कार्रवाई का विरोध करने के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए ध्वस्तीकरण रोकना पड़ा।
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नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि सिविल कोर्ट परिसर के आसपास से अतिक्रमण हटाने का मामला पहले से जनहित याचिका में विचाराधीन है। इस मामले में 10 सितंबर 2026 के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसी मुद्दे पर दाखिल एक अन्य याचिका भी 10 अक्तूबर को खारिज हो चुकी है। न्यायालय ने परस्पर विरोधी आदेशों से बचने के लिए नई याचिका को पहले से लंबित जनहित याचिका के साथ संबद्ध करने का निर्देश दिया।
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