पांचवे चरण में यूपी की 14 सीटों पर मतदान हुआ। मतदाताओं में उत्साह रहा तो कुछ ऐसे भी रहे जो सात समंदर पार से वोट करने आए तो कुछ ने शादी में जाने से पहले मतदान का फर्ज निभाकर लोगों के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया।
वोटिंग को लेकर गजब का क्रेज: कोई सात समंदर पार से आया तो किसी ने मतदान कर बांधा सेहरा
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जहां चाह वहां राह...ये कहावत चरित्रार्थ हुई बाराबंकी के जैदपुर कस्बे में जब मतदान की खबर सुनते ही सऊदी अरब से दो लोग वोट डालने घर चले आए। हालांकि इन दोनों लोगों को जून के पहले सप्ताह में आना था लेकिन टीवी चैनल और सोशल मीडिया पर देश में हो रहे चुनाव के महत्व की सूचना मिलते ही दोनों एक महीना पहले ही आ गए। जैदपुर कस्बे के शाहकटरा निवासी मोहम्मद मकसूद तीन साल से सऊदी अरब में रहकर ड्राइविंग करते हैं। मकसूद को दो जून को घर आना था लेकिन सोशल मीडिया से पता चला कि 6 मई को बाराबंकी में भी मतदान होगा। पहली बार देश के सबसे बड़े चुनाव का एक हिस्सा बनने के लिए मकसूद ने अपने मालिक से मई का टिकट लिया और बाराबंकी की राह पकड़ी। वहीं मोहल्ला चौकी के अब्दुल अलीम भी हैं जो जून में ईद के मौके पर घर आने वाले थे। वे में जैदपुर नगर पंचायत के सभासद भी रह चुके हैं और राजनीति से खास लगाव है। वे 5 मई का टिकट लेकर सात समंदर पार से वतन आ पहुंचे और सोमवार को मतदान किया। अमर उजाला से खास बातचीत में दोनों ने बताया की वे एक महीना पहले खासकर वोट देने के लिए सऊदी अरब से आए। हालांकि एक महीने की सैलरी का नुकसान हुआ लेकिन बहुत खुशी हुई कि कि वोट डालने का मौका मिला। दोनों ने कहा कि अपना देश कितना अच्छा और अमन-शांति वाला है, यह बात विदेश में नौकरी करने के बाद पता चलती है। वहां पर सब हमको इंडियन ही बोलते है, हम चाहे जिस धर्म के मानने वाले हो।
अमेठी में संग्रामपुर के सरैया बडग़ांव निवासी रामबदन शुक्ल ने सोमवार को मिसाल पेश की। कवि रामबदन की मां सुखराजी का निधन रविवार रात हो गया था। सुबह गांव वालों ने उन्हें मां का अंतिम संस्कार करने को कहा। हालांकि रामबदन ने गांव वालों से कहा कि वोट डालकर आने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा। फिर क्या था रामबदन शुक्ल के साथ लोग बूथ पर पहुंचे और वोट डालने के बाद मां का अंतिम संस्कार करने के लिए श्रृंगवेरपुर के लिए रवाना हुए।
रायबरेली में लोकतंत्र के महापर्व में आहुति डालने को लेकर युवाओं में गजब का उत्साह दिखा। सर्वोदय नगर निवासी शशिकांत त्रिवेदी की छह मई को शादी थी। बारात जाने से पहले शशिकांत मतदान केंद्र आईटीआई केंद्रीय विद्यालय पहुंचा और वोट डाला। इसके बाद घर पहुंचकर सेहरा बांधा और दुल्हनियां लाने चल दिया। ऐसा ही जोश महाराजगंज नगर पंचायत के संजय कुमार ने दिखाया। शादी से पहले वोट डाला।।
सात समंदर पार से आकर निभाई जिम्मेदारी
सीतापुर जिले के कंदुनी निवासी शरद चौधरी के बेटे अरिंजय चौधरी ने सात समंदर पार से यहां पहुंचकर मतदान किया। पहली बार मतदान करने के बाद अरिंजय बेहद उत्साहित नजर आए।अरिंजय लंदन में रहकर पढ़ाई के साथ घुड़सवारी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इस साल 18 वर्ष की उम्र पूरी करने से इनका नाम मतदाता सूची में दर्ज हो गया। सोमवार को यहां मतदान करने के लिए अरिंजय लंदन से भारत के लिए रवाना हुए। दोपहर तीन बजे अपने गांव पहुंचकर उन्होंने सबसे पहले मतदान किया। पहली बार वोट डालने की खुशी उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी। अरिंजय उन मतदाताओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं जो घर में मौजूद रहने के बाद भी बूथ तक जाकर मतदान करने में रुचि नहीं दिखाते हैं।