मेहनत और लगन हो तो कुछ भी संभव है। लखनऊ के मतदाता तो फर्स्ट डिवीजन आने से चूक गए। पर अपनी मेहनत और लगन के बूते शहर की मेधा ने दसवीं में 90 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल कर सबको चौंका दिया। आर्थिक संकट के साथ-साथ संघर्षों से भरे जीवन में बिना हारे वे आगे बढ़ते रहे। ऐसे बच्चों की कहानी उन्हीं की जुबानी...।
रंग लाया संघर्ष, इन मेधावियों ने चुनौतियों को मात देकर हासिल किए 90 फीसदी से ज्यादा अंक
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आर्थिक तंगी को देकर मात, बढ़ाया मान
आर्यन गुप्ता ने सीबीएसई 10वीं में 96.6 फीसदी अंक हासिल किए हैं। पिता की एलडीए कॉलोनी में एक छोटी सी दुकान है, इतनी कमाई नहीं होती कि तीन बच्चों की पढ़ाई व घर के अन्य खर्च चला सकें। किसी तरह से घर की गाड़ी खींच रही है। पिता ने सारी तकलीफें सहीं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई में कोर-कसर नहीं छोड़ी। नतीजा सामने है आर्यन के रिजल्ट के रूप में। खास बात है कि इसके बड़े भाई-बहन भी सीबीएसई की मेरिट में आ चुके हैं। अवध कॉलेजिएट का छात्र आर्यन प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहता है।
रंग लाया पिता का संघर्ष, बेटी ने हासिल किए 97.8 फीसदी अंक
नौशाद अहमद की एक छोटी सी दुकान है। किसी तरह से बस गुजरबसर हो जाती है। बेटी अलिश्बा को उन्होंने कभी इसका अहसास होने नहीं दिया। अवध कॉलेजिएट में पढ़ने वाली अलिश्बा ने दसवीं में 97.8 अंक हासिल किए हैं। नौशाद कहते हैं कि हमने सिर्फ पढ़ाई पर खर्च किया। बेटी ने भी कभी कोई फरमाइश नहीं की उसने आज मेरे संघर्ष को सार्थक कर दिया।
वैशाली की सफलता से सच हुए मां के सपने
बिटिया ने एक बार फिर से अपनी मां की मेहनत और लगन को सार्थक साबित कर दिया। एसकेडी एकेडमी में कक्षा 10 में पढ़ने वाली वैशाली द्विवेदी ने न सिर्फ परीक्षा में 78 फीसदी अंक हासिल किए बल्कि अपनी मां की आंखों में बेहतर भविष्य के सपने भी भर दिये हैं। वैशाली का सपना आगे चलकर कुछ ऐसा करना है जिससे कि उसकी मां को उसके ऊपर गर्व हो सके। वैशाली के अनुसार उनकी मां की मेहनत उनके लिए काफी अहम है। इसीलिए उन्हें इससे प्रेरणा मिलती है।
वहीं सेंट एंथोनी पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले जुड़वा भाईयों पीयूष और आयुष अग्रवाल ने एक जैसे ही नंबर हासिल किये हैं। पीयूष अग्रवाल को 97.2 और आयुष ने 97 फीसदी नंबर हासिल किये हैं। दोनों आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहते हैं।