हिरासत में युवक की मौत पर जला थाना, पीटे गए पुलिस वाले
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यूपी के बाराबंकी जिले में ग्रामीणों ने पुलिस थाने पहुंचकर पुलिस कर्मियों को जमकर पीटा। बाद में उन्होंने थाने को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान वहां जो भी वाहन खड़े थे उन्हें तोड़ डाला गया या फिर जला दिया गया।
यह पूरी घटना बाराबंकी जिले के देवा थाने में हुई। इसी थाने के लॉकअप में रविवार की शाम एक युवकी की मौत हो गई थी। उस युवक पर बाइक चोरी का आरोप था।
पुलिस का कहना था कि उसने आत्महत्या की है जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि युवक को पुलिस ने इतना मारा है कि उसकी मौत हो गई। इसी घटना के विरोध में ग्रामीणों ने थाने पर हमला बोल दिया।
लखनऊ थाना क्षेत्र के मड़ियांव के खैरपुर निवासी सुभाष राजवंशी (24) पु्त्र छोटेलाल को बाराबंकी के माती चौकी इंचार्ज जेपी यादव ने शनिवार शाम साढ़े चार बजे माती चौकी के पास से दबोचा था। उसके खिलाफ देवा के अलीपुर निवासी रियाज अहमद ने अपराध संख्या 196/15 के तहत चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
आक्रोशित भीड़ ने माती पुलिस चौकी को पूरी तरह से तहस-नहस कर डाला। भीड़ ने चौकी पर मौजूद चार सिपाहियों को दौड़ा-दौड़ा कर पिटाई की जिसमें कई सिपाही घायल हो गए है। हमलावरों में एक चौथाई से ज्यादा महिलाएं थी। जानकारी पर पहुंचे फायर बिग्रेड कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाई। उधर, मौके पर डीएम व एसपी भारी संख्या में पुलिस बल के साथ मुस्तैद रहे। पुलिस ने आरोपियों की तलाश में छापेमारी भी शुरू कर दिया है।
देवा कोतवाली में पुलिस पिटाई से हिरासत में रविवार शाम सुभाष राजवंशी पुत्र छोटेलाल निवासी सैरपुर थाना मडिय़ाव जनपद लखनऊ की मौत हो गई थी जिसके बाद पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था और कहा कि सुभाष ने कोतवाली के लाकप में शौचालय में लगी पानी के पाइप से फांसी लगा जान दे दी । सोमवार सुबह सात बजे पुलिस ने उसका पोस्टमार्टम कराया।
मृतक सुभाष का ननिहाल माती पुलिस चौके से कुछ दूर सरसौंधी गांव में है। उसका जन्म और पालन पोषण यहीं पर हुआ था। पीएम के बाद ननिहाल के परिवारीजन शव को घर ले जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने घर वालों को शव नहीं सौंपा और दो लोगों को साथ ले जाकर लखनऊ के भैंसाकुंड में जबरन अंतिम संस्कार करा दिया।
इसकी जानकारी होने पर सुभाष के ननिहाल सरसौंदी और बगल के माती, नरेंद्रपुर, जरवा व रेंदुआ गांव में आक्रोश फैल गया। दोपहर करीब 12 बजे सैकड़ों ग्रामीणों जिसमें लगभग 40 महिलाएं भी थीं, माती पुलिस चौकी पर हमला बोल दिया।
ग्रामीणों ने चार सिपाही राजेंद्र बिष्ट, पारसनाथ मिश्र, प्रदीप सिंह व एक अन्य को दौड़ा-दौड़ाकर जमकर पीटा। यही नहीं चौकी को पूरी तरह से आग के हवाले कर दिया गया।
चौकी के पीछे बने सिपाहियों के आवास में भीड़ भीड़ ने आग लगा दी। चार बाइक फूंक दी, चौकी पर लगा वायरलेस सेट, बाहर बनी गुबंद, चौकी पर रखे सभी कागजात में आग लगाने के साथ ही पंखा, कूलर, बैट्री, इनवर्टर समेत एक एक सामान को तोड़ डाला। यहां पर हमलावरों ने करीब आधे घंटे तक तांडव किया और उसके बाद भाग निकले।
डीएम की सलाह भी नहीं मानी
माती में जिस समय आक्रोशित लोग पुलिस कर्मियों की पिटाई कर चौकी में आग लगा रहे थे उस समय इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को पहुंच गई थी। लेकिन इसके बावजूद अधिकारी तब पहुंचे जब यहां मामला शांत हो गया और आरोपी आसानी से भाग निकले।
मौके पर एसपी अब्दुल हमीद के साथ पहुंचे डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने पुलिस अधिकारियों को लताड़ लगाते हुए कहा कि मैने पहले ही कहा था कि माती चौकी में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दो, लेकिन आप लोगों ने ध्यान नहीं दिया। डीएम के इस रुख के बाद पुलिस ने अब आरोपियों की धरपकड़ शुरू किया।
माती पुलिस चौकी में जिस समय आगजनी हो रही थी उस समय सीओ सिटी अमिता सिंह मौके पर पहुंच गई थी। लेकिन सीओ महज यहां मूकदर्शक बनी ही खड़ी रही और उनके सामने ही हमलावर पुलिस चौकी में आगजनी व तोडफ़ोड़ करते रहे।
इसके बाद जब देवा कोतवाली प्रभारी मनोज पंत मौके पर पहुंचे तो उन्होंने चौकी फूंक कर भाग रहे लोगों पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया। लेकिन एसओ के साथ पुलिस बल न होने के चलते सभी हमलावर बड़ी आसानी से भाग निकले।
पुलिस चौकी में तोड़फोड़ व आगजनी करने वाले लोगों को चिह्नित किया जा रहा है। इस मामले में जो भी दोषी है उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे वह चाहे कोई भी हो।