आसान नहीं फिटनेस प्रमाणपत्र पाना, सेंटर के बाहर गुजर रही रातें, खाना-पीना और सोना भी वाहन में
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परिवहन विभाग ने व्यावसायिक वाहन ऑटो, टेम्पो, स्कूल बस, कार, ट्रक को ऑटोमैटिक मशीन से फिटनेस कराने का सब्जबाग दिखाया। सरकारी खजाने के लगभग 15 करोड़ रुपये सेंटर पर खर्च हो गए। लेकिन ये फिटनेस सेंटर मुसीबतों का पिटारा साबित हुए।
सेंटर पर मालिक व चालक घर से खाना, पानी, बिस्तर लेकर दिन में 12 बजे से टोकन के लिए लाइन लगाने पहुंच जाते हैं। इन्हें पुलिसकर्मियों की गालियां तक खानी पड़ रही हैं। ‘अमर उजाला ’ ने 22 नवंबर की रात फिटनेस सेंटर का जायजा लिया तो वाहन मालिकों व चालकों की पीड़ा सामने आई। पेश है, नरेश शर्मा की लाइव रिपोर्ट।
केस-1: तीन दिन में भी न हो सकी कार की फिटनेस
समय-रात 9:30 बजे। परिवहन विभाग के फिटनेस सेंटर के मुख्य गेट से 50 मीटर की दूरी पर तेलीबाग निवासी गुड्डू अपनी कार की फिटनेस कराने के लिए कतार में खड़े हैं। गुड्डू 19 नवंबर दोपहर से 22 नवंबर तक कार की फिटनेस नहीं करा पाए। वे सेंटर पर चार रातें काट चुके हैं, पर फिटनेस पास नहीं हो सका। उनकी कार में स्पीड गवर्नर लगा है जिसके चलते ही उसकी फिटनेस फेल हो रही है।
केस-दो: चार दिन से सेंटर पर धक्के खा रहा दिव्यांग
समय- रात 10:30 बजे। वाहनों की कतार के बीचोंबीच चालक के साथ बैठे फैजाबाद निवासी कार मालिक मो. ईसा सुबह होने का इंतजार कर रहे हैं। मो. ईसा दिव्यांग हैं। उनकी बोलेरो लखनऊ आरटीओ में उनके नाम से पंजीकृत है। वे चालक अनवर के साथ चार दिन से फिटनेस सेंटर पर 19 नवंबर से मौजूद हैं। उनकी बोलेरो का दो बार फिटनेस फेल हो चुका है। वे प्रदूषण पास होने का प्रमाण पत्र अन्य जगह से ला चुके हैं, पर फिटनेस बार-बार फेल हो रही है।
केस-तीन: बिल्कुल फिट छोटा हाथी, जांच में फेल
समय-रात 11:00 बजे। फिटनेस सेंटर पर व्याप्त अव्यवस्था से गोसाईगंज निवासी आशीष बहुत आक्रोशित थे। 24 घंटे तक कतार में खड़े होने के बाद 22 नवंबर को उसके छोटा हाथी की फिटनेस जांची गई तो फेल साबित हुई। आशीष 21 नवंबर को टोकन लेकर दोपहर एक बजे फिटनेस सेंटर की कतार में लगा था। उसका कहना कि फिटनेस कराने लाने से पहले वाहन को दुरुस्त कराया था। पूरी तरह फिट था पर जांच में फेल कर दिया।
कानपुर रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर स्थित ऑटोमैटिक व्यावसायिक वाहन फिटनेस सेंटर पर वाहन मालिकों व चालकों को रोज परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह है कि सेंटर पर मालिकों व चालकों को वाहन की फिटनेस कराने के लिए लगातार चार-चार रातें तक काटनी पड़ रही हैं। फिटनेस सेंटर पर हर रात ऐसे 350 से 400 लोग रात काटते हैं।
जो इस आस में अपने ही वाहन में खा-पीकर सो जाते हैं कि सुबह उठते ही सबसे पहले उनको फिटनेस कराने का टोकन मिलेगा। यह अलग बात है कि उनको पूरी रात वाहन की फिटनेस फेल होने का भय सताता रहता है। सेंटर पर रात काटने वालों में ऐसे भी चालक थे, जिनके परिवारीजन उनके वापस आने का इंतजार इसलिए करते हैं, कि वे शाम तक कुछ कमाकर लाएंगे तो खाना बनेगा।
ऐसे बंटते हैं फिटनेस के टोकन
फिटनेस सेंटर का सुबह ठीक 10 बजे मुख्य गेट खुलता है। गेट से एक तरफ कतार में खड़े 100 छोटे वाहनों को और दूसरी तरफ बड़े 50 वाहनों को फिटनेस टोकन बांटे जाते हैं। 150 टोकन बंटने के बाद बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद कतार में खड़े छोटे व बड़े वाहनों को दूसरे दिन फिटनेस के टोकन दिए जाते हैं।
इसलिए कतार हो रही लंबी
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक रोजाना 30 फीसदी फिटनेस फेल होती हैं। यानी 150 में से 45 वाहन की जांच फेल होने पर उसी दिन कतार में लग जाते हैं, जहां पर 200 वाहन पहले से खड़े होते हैं। इस क्रम के चलते कतार लंबी होती जा रही है।
प्रदूषण केंद्रों पर उठाए सवाल
आरटीओ आरपी द्विवेदी ने परिवहन विभाग के प्रदूषण केंद्र पर व्यावसायिक वाहनों की जांच और उसके प्रमाण पत्र पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना कि फिटनेस सेंटर की ऑटोमैटिक मशीन की जांच में वाहन का प्रदूषण फेल हो रहा है तो प्रदूषण केंद्र जांच के घेरे में आ गए हैं। ऐसे मामलों को संज्ञान में लेकर जांच कराएंगे।
फिटनेस सेंटर की व्यवस्था में हुआ सुधार
ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर की व्यवस्था में अब पहले से काफी सुधार हुआ है। अब हेड लाइट्स के चलते भी फिटनेस कम ही फेल हो रही हैं। जिनकी फिटनेस फेल हो रही हैं, उनको दो बार फ्री फिटनेस सेंटर की सुविधा दी गई है। - आरपी द्विवेदी, आरटीओ (प्रशासन) लखनऊ संभाग परिवहन विभाग