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हम कब बनेंगे कलेक्टर? पूछ रहे पीसीएस
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Fri, 06 Sep 2013 07:15 AM IST
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जल्द ही पीसीएस से आईएएस बनने के लिए फिर डीपीसी होने जा रही है। इससे प्रदेश को और ज्यादा आईएएस अफसर मिलेंगे।
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आईएएस बनने के बाद जिले की चाह न हो, ऐसा मुमकिन नहीं। पिछली डीपीसी में आईएएस बने कई अफसरों का कमिश्नर और कलेक्टर बनने का सपना अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
हालांकि उम्मीद की जा रही है जल्द होने वाले प्रशासनिक बदलाव में इन अफसरों को मौका मिल सकता है।
प्रदेश के पीसीएस अफसरों की डीपीसी जल्द ही हो सकती है। इस डीपीसी में 1983 से 86 बैच के अफसर पीसीएस से आईएएस बन पाएंगे। पिछली डीपीसी में 126 अफसर प्रमोट हुए थे।
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इन अफसरों को 1995 से बाद के बैच आवंटित किए गए थे। 1996 बैच के अफसरों की नियुक्ति सचिव और मंडलायुक्त के पद पर हुई तो बाद के बैच के अफसरों को विशेष सचिव और जिलाधिकारी को बनाया गया। इसके अलावा कुछ को प्राधिकरणों और निगमों में तैनात कर दिया गया।
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आईएएस बनने के बाद ज्यादातर अफसरों की डीएम बनने की चाह होती है, लेकिन सभी अफसरों का यह सपना पूरा नहीं हुआ है। प्रदेश के 75 जिलों में 29 जिलों की कमान फिलहाल प्रमोटी अफसरों के पास है, जबकि कई अफसरों को डीएम बनने का मौका अभी तक नहीं मिल पाया है।
अफसर इसी उम्मीद में हैं कि जल्द से जल्द उन्हें भी डीएम बनने का मौका मिले। लिहाजा शासन स्तर पर पैरवी कराई जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार जल्द ही कई जिलों और मंडलों में इन अफसरों को तैनात करेगी।
हाल में कुछ प्रमोटी अफसरों को अहम जिलों की कमान दी गई। चार मंडलों का जिम्मा भी प्रमोटी अफसरों के पास है। झांसी, गोरखपुर, चित्रकूट और मुरादाबाद मंडल का जिम्मा ये अफसर संभाल रहे हैं। झांसी मंडल के सभी जिलों में डीएम के पद पर प्रमोटी अफसर तैनात हैं। यहां आयुक्त के पद भी प्रमोटी आईएएस बिजेंद्र बहादुर सिंह हैं।
कई अफसरों को नहीं रही जिले की चाह
पिछली डीपीसी में अफसरों के आईएएस बनने के बाद भी मंडल में आयुक्त और डीएम बनने की चाह नहीं रही। इस महीने रिटायर होने जा रहे कुछ अफसरों को मंडलायुक्त और डीएम का ऑफर दिया गया था, लेकिन जिलों में ज्यादा तामझाम होने के कारण उन्होंने लो-प्रोफाइल पोस्ट में ही रहना बेहतर समझा और प्रस्ताव ठुकरा दिया।