UPPSC: PCS (J) टॉपर्स की कहानी उन्हीं की जुबानी, पढ़ें यहां...
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उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा सिविल जज (जूडि)-2017 के परीक्षा परिणाम में लखनऊ की स्वरांगी शुक्ला ने प्रथम रैंक हासिल कर प्रदेश में राजधानी का नाम रोशन किया। स्वरांगी भविष्य में सिविल सर्विसेज में अपना कॅरिअर बनाना चाहती हैं। उन्होंने अभ्यर्थियों को लगन के साथ सतत परिश्रम करने की सीख दी।
‘मैंने पहले ही प्रयास में परीक्षा में टॉप किया है। शुरू से ही मेरी इच्छा न्यायिक सेवा में जाने की थी। सीएमएस, गोमती नगर से स्कूलिंग खत्म करने के बाद मैंने गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से लॉ ऑनर्स किया। हाईस्कूल में मेरे 95 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 94.2 प्रतिशत अंक रहे थे। लॉ की पढ़ाई खत्म करने के बाद मैं जी जान से पीसीएस जे की तैयारी में जुट गई। इस दौरान मैंने जीके और लॉ विषय पर सर्वाधिक ध्यान केंद्रित किया, क्योंकि प्रदेश में समान्य ज्ञान के प्रश्न ज्यादा कठिन पूछे जाते हैं।
लॉ के सभी धाराओं को पढ़ा और लेटेस्ट प्रोविजन का भी गहन अध्ययन किया। साक्षात्कार के लिए कई तरह के अलग-अलग केसेस की तैयारी की थी। तैयारी के दौरान सभी टॉपिक से संबंधित कॉन्सेप्ट को क्लियर किया। मेरे पिता विशंभर दयाल शुक्ला लखनऊ में एसआईटी के एसपी हैं और माता रश्मि शुक्ला गृहिणी। एक बड़ा भाई सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा है। मेरी सफलता का श्रेय माता-पिता को जाता है। दूसरे अभ्यर्थियों को मेरी सलाह है कि वे लॉ के सभी कॉन्सेप्ट को क्लियर करें और सामान्य ज्ञान में जमकर मेहनत करें। कठिन परिश्रम से ही सफलता हाथ लगती है।
नियमित क्लास अटेंड करने का मिला फायदा - प्रणव त्रिपाठी- 9वीं रैंक
‘मैंने लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी ऑनर्स और नेशनल लॉ स्कूल बंगलूरू से एलएलएम किया है। 22 साल की उम्र में पहले ही प्रयास में मुझे सफलता मिल गई। मैं समाज को पक्षपात रहित न्याय दिलाने का लक्ष्य लेकर इस क्षेत्र में आया हूं। हमारे देश का कानून बहुत बेहतर है, लोगों को सही समय पर न्याय मिले इसके लिए और प्रयास करने की जरूरत है।
एनबी में सीनियर मैनेजर पिता नरेंद्र त्रिपाठी व मां विभा त्रिपाठी की मेहनत से ही मैं सफल हो सका हूं। मुझे एलएलबी और एलएएलम दोनों में गोल्ड मेडल मिले हैं। नियमित क्लास अटेंड की और अपना डाउट क्लीयर करता रहा। यही वजह रही कि तैयारी के लिए कोचिंग भी नहीं करनी पड़ी।’
जीके के लिए अखबारों का लें सहारा - तरुणिमा पांडेय, रैंक 57
केसेस से प्रैक्टिस कर लें। जीके के लिए अखबारों से सहायता लें। रेगुलर पढ़ाई करना बेहद जरूरी है। मेरे पिता आरपी पांडेय डिस्ट्रिक्ट एवं सेशन जज हैं और फिलहाल रेल दावा प्राधिकरण में बैठते हैं। माता रागिनी पांडेय गृहिणी हैं।’
हौसले से ही मिलती है कामयाबी - अंकुर चित्रांशी- 27वीं रैंक
‘लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी ऑनर्स और सेंट जॉन्स से मेरी स्कूलिंग हुई है। मेरा लक्ष्य जरूरतमंद को सही समय पर न्याय दिलाना है। न्याय के लिए लोगों को काफी भटकना पड़ता है और समय भी लगता है। इसमें कुछ बेहतर करने का प्रयास करूंगा। मुझे यह सफलता तीसरे प्रयास में मिली।
रीक्षार्थियों को हौसले के साथ तैयारी करनी चाहिए और निराश नहीं होना चाहिए। मेरे पिता नेडा के जनसंपर्क अधिकारी अरुण कुमार श्रीवास्तव व मां विभा श्रीवास्तव खाद्य निगम में जॉब करती हैं। मैंने परिजनों और गुरुजनों के मार्गदर्शन से ही सफलता प्राप्त की।’
ज्यादा से ज्यादा अभ्यास करें- भव्या श्रीवास्तव, रैंक 98
मैनें लविवि से एलएलबी ऑनर्स करने के बाद ही पीसीएस जे की तैयारी शुरू कर दी। परीक्षा देने के बाद मैंने इसी वर्ष लविवि के एलएलएम में प्रवेश लिया। पहले ही प्रयास में सफलता मिल गई। मैंने समय का प्रबंधन का ध्यान रखते हुए पूरे कोर्स को कम से कम तीन बार रिवाइज किया।
लेबस काफी बड़ा होता है, इसलिए सभी पेपरों पर बराबर फोकस करते हुए तैयारी जरूरी है, तभी अच्छी रैंक मिलेगी। मेरे पिता केवी श्रीवास्तव बैंक अधिकारी और माता संगीता श्रीवास्तव गृहिणी हैं। जितना हो सके उतना प्रैक्टिस करें और परीक्षा से काफी समय पहले ही अपने सिलेबस को पूरा कर लें।
नोट्स से ज्यादा तैयारी करें - पुरुषोत्तम अवस्थी, रैंक 61
मैनें दूसरे प्रयास में पीसीएस जे क्लीयर किया। लविवि से बीए और एलएलबी की पढ़ाई करने के बाद पीसीएस की तैयारी की। जीजा गंगेश्वर उपाध्याय और बहन मीरा उपाध्याय पीसीएस ऑफिसर हैं, इन दोनों ने मेरी तैयारी में काफी मदद की। मेरी सफलता का श्रेय इन्हीं को जाता है। सिर्फ मेहनत करें और ज्यादा से ज्यादा नोट्स से तैयारी करें। मेरे पिता रमेश चंद्र अवस्थी अधिवक्ता और माता कुसुम गृहिणी हैं।
टाइम मैनेजमेंट सफलता के लिए जरूरी - अंबिका मेहरोत्रा- 39वीं रैंक
लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलएम और सीएमएस से स्कूलिंग हुई है। मैंने शिया पीजी कॉलेज से एलएलबी किया है। एलएलबी में मुझे छह गोल्ड मेडल मिले हैं। मेरे पिता अशोक मेहरोत्रा अधिवक्ता हैं और उन्हीं से प्रभावित होकर मैं इस क्षेत्र में जाने का निर्णय ले पाया।
पिता के साथ म्यूजिक टीचर मां अल्पना मेहरोत्रा ने भी मेरा हर कदम पर सहयोग किया। बिना भ्रष्टाचार के सबको न्याय दिलाना पहला लक्ष्य है। दूसरे प्रयास में मुझे यह सफलता हासिल हुई। मैं किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए टाइम मैनेजमेंट को जरूरी मानता हूं। मैंने पढ़ाई पर पूरा फोकस किया और भगवान पर भरोसा रखा।’
लोकल लॉ और जनरल स्टडीज पर दिया ध्यान- अनुकृति संत-187वीं रैंक
‘लॉ के स्टूडेंट होने की वजह से पीसीएस जे में लॉ का पेपर तो आमतौर पर अच्छा ही जाता है। समस्या जनरल स्टडीज के पेपर में होती है। यही वजह है कि जनरल स्टडीज में मेरिट भी कम जाती है, इसलिए जरूरी है कि इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। मैंने डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विवि से लॉ की पढ़ाई की है।
लोकल लॉ का पेपर हमारे सिलेबस में शामिल नहीं होता है। इसलिए इस पर भी हमें विशेष ध्यान देना चाहिए। मेरे पिता केके संत सरकारी सेवा में हैं तथा मां अलका संत गृहिणी हैं। स्टूडेंट्स जनरल स्टडीज पर विशेष ध्यान दें।’
‘न्यायिक सेवा में सफलता हासिल करने के लिए धैर्य बेहद जरूरी है। धैर्य के साथ कड़ी मेहनत करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी। मेरा मानना है कि सफलता हासिल करने के लिए नियमित रूप से पूर्व के वर्षों में आए सवालों के साथ ही मॉडल प्रश्नपत्र का अभ्यास करना परीक्षा में सफलता हासिल करने में लाभदायक रहा। मेरे पिता शिवराम सिंह सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि मां सुधा सिंह गृहिणी हैं। मेरी विद्यार्थियों को सलाह है कि वे धैर्य का साथ कभी न छोड़ें और तैयारी नोट्स बनाकर ही करें।’
प्री के साथ ही शुरू करें मेन्स की तैयारी- अनामिका-99वीं रैंक
‘प्री के साथ ही मेन्स की तैयारी करना सही रहता है। लोग सोचते हैं एक बार प्री निकाल लूं, उसके बाद मेन्स की तैयारी शुरू करुंगा, इससे मुख्य परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी नहीं हो पाती। मैं मूल रूप से सोनभद्र जिले की रहने वाली हूं। मेरे पिता राधाकृष्ण चौहान टेलरिंग की दुकान चलाते हैं तथा मां गंगादेवी गृहिणी हैं। मैंने दूसरे प्रयास में ही सफलता हासिल की है। मैं वर्ष 2015 में साक्षात्कार में असफल हो गई थी। मेरी विद्यार्थियों को यही सलाह है कि वे शुरुआत से ही मेन्स को लेकर फोकस करें।’