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लखनऊ में उमड़ा दिल्ली व मुंबई से आए प्रवासियों का रेला, ट्रेनें खचाखच, कम पड़ीं बसें

Wed, 21 Apr 2021 02:04 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 21 Apr 2021 02:04 AM IST
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passengers rush in lucknow
लखनऊ। कोरोना से मुंबई में बिगड़े हालात व दिल्ली में लॉकडाउन से वहां रह रहे प्रवासी तेजी से पलायन कर रहे हैं। दोनों महानगरों से ट्रेनें खचाखच भरकर आ रही हैं। सोमवार आधी रात से तो लखनऊ में प्रवासियों का रेला उमड़ पड़ा। ट्रेनों से उतर कर बस पकड़ने के लिए प्रवासियों का हुजूम आलमबाग, चारबाग, कैसरबाग बस अड्डे आदि बस अड्डों पर उमड़ पड़ा। इतनी भीड़ है कि इन्हें गंतव्य तक भेजने में आलमबाग और चारबाग बस अड्डे पर तो बसें कम पड़ गईं। यहां प्लेटफार्म पर बसें आते ही लोग धक्का-मुक्की कर व खिड़की से इनमें सवार होते नजर आए। परिवहन निगम लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक बीके बोस ने बताया कि सोमवार रात 12 बजे से मंगलवार शाम छह बजे तक 18 घंटे में 30,000 से अधिक कामगारों को 1500 बसों से उनके गृह जनपद रवाना किया। इनमें सर्वाधिक कामगार आजमगढ़, गोरखपुर, सुल्तानपुर, बहराइच, गोंडा ,बलरामपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर आदि के थे। प्रवासियों की भीड़ से रेलवे स्टेशनों व बस अड्डों पर यात्रियों की तादाद चार गुना तक बढ़ गई है। दिल्ली में पूर्वांचल और बिहार के लिए सीधे साधन न मिलने पर वहां के यात्री भी लखनऊ पहुंच रहे हैं।
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कहां से कितनी बसें रवाना
आलमबाग 800
कैसरबाग 400
चारबाग 300
निजी वाहन मालिकों उठाया मजबूरी का फायदा
रोडवेज बसों में जगह न मिलने पर लोग प्राइवेट बस, टेंपो, ट्रैवलर, कार, ट्रक से भी रवाना होते रहे। चारबाग, कैसरबाग, आलमबाग, कमता, शहीद पथ, ट्रांसपोर्ट नगर, 12 बिरवा, पॉलीटेक्निक, चिनहट चौराहे पर सैकड़ों यात्री निजी वाहनों का प्रयोग करते दिखे। इसका निजी वाहन मालिकों ने खूब फायदा उठाया। लखनऊ से गोरखपुर तक के लिए 300 रुपये की जगह 600 से 800 रुपये तक किराया वसूला। पॉलीटेक्निक चौकी इंचार्ज कमलेश राय को इसकी जानकारी मिली तो चालक को फटकार लगाकर उचित किराए पर यात्रियों को संत कबीरनगर भेजवाया।
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जिंदा रहे तो फिर काम मिल जाएगा
राजस्थान में एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वाले गोरखपुर के छोटे लाल को दिल्ली में लॉकडाउन की सूचना मिली तो सामान समेटकर घर की तरफ निकल लिए। साधन नहीं मिला तो कुछ दूर तक ट्रक से निकले। इसके बाद राजस्थान में ही हाईवे पर बस मिली जो लखनऊ के बाराबिरवा चौराहे पर उतार कर चली गई। इसके बाद वह आलमबाग बस अड्डा पहुंचे। यहां सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक उनको गोरखपुर के लिए कोई साधन नहीं मिला। उनके साथ आधा दर्जन अन्य लोग भी राजस्थान से आए हैं। सभी ने कहा कि संक्रमण से बचकर जिंदा रहे तो मेहनत मजदूरी कर परिवार चला लेंगे। इसी तरह संत कबीर नगर बृजेश दिल्ली में फर्नीचर पेंटिंग का काम करते थे। लॉकडाउन के बाद वह भी सामान समेट कर घर चल पड़े। वह भी आलमबाग बस अड्डे पर बस के इंतजार में बैठे रहे। उन्होंने बताया कि रोडवेज कर्मचारियों ने शाम छह बजे बस मिलने की बात की है। कुछ इसी तरह का नजारा कैसरबाग व कमता स्थित अवध बस अड्डे का रहा। यहां भी दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान से वाली बसों के यात्री साधन का इंतजार करते दिखे।
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