पार्टियों के साथ, क्षत्रपों की साख भी है दांव पर
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इस बार चुनाव में प्रत्याशियों के साथ राजनीतिक दलों के उन क्षत्रपों की साख भी दांव पर है जिन्हें वोटरों को अपने पाले में खींचने की मुहिम में लगाया गया था।
चुनाव के नतीजे इन क्षत्रपों का भविष्य भी तय करेंगे क्योंकि पार्टियों ने न केवल इनके ऊपर भरोसा जताया बल्कि उनकी जाति या बिरादरी के बीच उन्हें पार्टी के चेहरे के रूप में पेश किया। इन क्षत्रपों ने हवाई दौरे भी खूब किए।
चुनाव नतीजों की उल्टी गिनती शुरू होने के साथ ही इन क्षत्रपों की अपनी जाति-बिरादरी में पैठ को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। चुनाव नतीजे यह साबित करेंगे कि पार्टी की ओर से अग्रिम मोर्चे पर लगाए गए क्षत्रप कितने करिश्माई साबित हुए। एग्जिट पोल के नतीजों के हिसाब तो कांग्रेस, सपा और बसपा के क्षत्रप प्रदेश में मोदी लहर से पार पाने में नाकाम ही दिखाई दे रहे हैं।
पार्टियों में अब जमीनी स्तर से जो फीडबैक सामने आ रहा है उससे भी यह लग रहा है कि पार्टियों ने जिन चेहरों पर दांव लगाया उनकी अपनी जाति-बिरादरी के लोगों के बीच उतनी स्वीकार्यता नहीं रही जितनी पार्टी ने उम्मीद लगा रखी थी। खास तौर पर सपा और बसपा के क्षत्रपों के लिए यह चुनाव बड़ा इम्तिहान साबित होने जा रहा है।
भाजपा ने जताया शाह पर भरोसा
जहां तक भाजपा का सवाल है तो इस बार मोदी लहर ही प्रदेश में जाति-बिरादरी के बंधन को तोड़ती नजर आ रही है।
ऐसे में भाजपा को जाति-बिरादरी के आधार पर वोटरों को अपने पाले में खड़ा करने के लिए क्षत्रपों को मोर्चे पर लगाने की बहुत ज्यादा जरूरत नहीं पड़ी।
सूबे में इस बार भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और उनके भरोसेमंद सिपहसालार अमित शाह ने चुनाव अभियान की कमान संभाल रखी थी। मोदी के अलावा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने 57 और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह 29 जनसभाएं संबोधित कीं।
इनके अलावा योगी आदित्यनाथ ने 46 जनसभाओं के जरिए माहौल बनाने की कोशिश की। एग्जिट पोल के मुताबिक तो भाजपा के क्षत्रपों की मुहिम रंग लाती दिख रही है।
कांग्रेस को ग्लैमर का भी सहारा
जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो इस बार प्रदेश के क्षत्रप अपने ही क्षेत्रों में उलझे रहे। प्रदेश में कांग्रेस प्रचार अभियान बिखरा-बिखरा सा रहा। हालांकि आंकड़ों के हिसाब से तो ढाई महीने में कांग्रेस ने 490 जनसभाएं कीं।
कांग्रेस नेताओं ने 266 सभाएं विमान व हेलीकॉप्टर से कीं। इस सबके बावजूद एग्जिट पोल के नतीजे सूबे में कांग्रेस की फजीहत की तरफ इशारा कर रहे हैं।
प्रदेश में सबसे ज्यादा 39 जनसभाएं करने का रिकॉर्ड सांसद प्रमोद तिवारी के नाम दर्ज है लेकिन कांग्रेस से छिटककर भाजपा के पाले में जा खड़े हुए ब्राह्मणों को वापस अपनी तरफ लाने में वे कितने सफल रहे, नतीजे इसकी बानगी होंगे। फिजा बनाने के लिए कांग्रेस ग्लैमर का सहारा लेने में भी पीछे नहीं रही।
मेरठ से पार्टी उम्मीदवार व अभिनेत्री नगमा, गाजियाबाद से उम्मीदवार फिल्म अभिनेता राज बब्बर व अमिषा पटेल ने भी एक से दूसरे संसदीय क्षेत्र तक खूब उड़ान भरी। मुसलिम चेहरों में पार्टी ने गुलाम नबी आजाद, सलमान खुर्शीद, नसीब पठान व क्रिकेटर मो. कैफ को मोर्चे पर लगाया। एग्जिट पोल के नतीजे यह साबित कर रहे हैं कि ये क्षत्रप भी कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए।
अलिखेश, मुलायम रहे धुरी
समाजवादी पार्टी के प्रचार अभियान की धुरी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही रहे लेकिन ब्राह्मण, मुस्लिम व अति पिछड़ों को साधने के लिए पार्टी ने कुछ क्षत्रपों पर भी दांव लगाया।
जनेश्वर मिश्र और बृजभूषण तिवारी की मृत्यु के बाद सपा में ब्राह्मण नेतृत्व को लेकर पैदा हुई शून्यता को भरने के लिए पार्टी ने मनोज पांडेय को आगे किया।
चुनाव से ठीक पहले राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री बनाए गए मनोज पांडेय को ब्राह्मणों को पार्टी का पाले में खड़ा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
ब्राह्मणों को साधने के नाम पर पांडेय ने डेढ़ महीने में 60 से ज्यादा जनसभाएं की। पांडेय पार्टी के उन चुनिंदा नेताओं में रहे जिन्हें जनसभाओं के लिए बाकायदा हेलीकॉप्टर मुहैया कराया गया।
उल्टा पड़ा आजम का दांव
इसके अलावा गायत्री प्रसाद प्रजापति, राजपाल कश्यप व राम आसरे विश्वकर्मा को अति पिछड़ों और आजम खां को मुसलमानों के वोट के लिए लगाया गया।
विवादित बयान और बड़बोलेपन के चलते चुनाव आयोग ने चुनाव अभियान के दौरान ही आजम की बोलती बंद कर दी।
गायत्री ने हवाई दौरे तो खूब किए लेकिन अति पिछड़ों को लामबंद करके सपा के पीछे खड़ा करने में नाकाम रहे। अखिलेश सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने भी विमान और हेलीकॉप्टर से खूब चुनावी दौरे किए लेकिन इसका पार्टी को बहुत ज्यादा फायदा मिलता नहीं दिख रहा है।
कम से कम एग्जिट पोल के नतीजों से तो यही संकेत मिल रहे हैं। अंतिम नतीजों में कोई बड़ा उलटफेर होगा इसके आसार कम ही हैं।
बसपा ने सतीश पर जताया यकीन
बसपा के प्रचार अभियान में ‘वन मैन शो’ पार्टी सुप्रीमो मायावती का ही रहा। दिलचस्प बात यह भी है कि पूरे चुनाव में मायावती को छोड़कर किसी भी नेता ने प्रचार के लिए विमान या हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं किया।
राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने मायावती के साथ जरूर कुछ चुनावी दौरे किए। जहां तक बसपा उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करने का सवाल है तो सतीश चंद्र मिश्र, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, स्वामी प्रसाद मौर्य व राम अचल राजभर ने उन इलाकों में घूम-घूमकर सभाएं की जहां के प्रत्याशियों ने उनसे अनुरोध किया या वोटों के लिहाज से इन नेताओं के दौरे से कोई फायदा होने की उम्मीद थी।
एग्जिट पोल में बसपा के लिए कोई उत्साहजनक संकेत नहीं है। ऐसे में इन क्षत्रपों की भी अपने वोटरों पर पकड़ को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नसीमुद्दीन के लिए फतेहपुर से अपने बेटे अफजल और स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए मैनपुरी से अपनी बेटी संघमित्रा की चुनावी नैया पार लगाना ही सबसे बड़ी चुनौती है।