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मरणोपरांत पद्मश्री बने अनवर जलालपुरी, दो जनवरी को हुआ था इंतकाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 26 Jan 2018 01:05 AM IST
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अनवर जलालपुरी
- फोटो : SOCIAL MEDIA
मशहूर शायर अनवर जलालपुरी मरणोपरांत पद्मश्री बन गए। केंद्र सरकार ने उनके योगदान को देखते हुए गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान के लिए उनका चयन किया।
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अनवर जलालपुरी का वास्तविक नाम अनवार अहमद था। उनका जन्म छह जुलाई 1947 को अंबेडकरनगर के जलालपुर में हुआ था। उनका निधन इसी माह की दो तारीख को हो गया था। नौ फरवरी को 40वां है। अपनी शायरी और मुशायरों के संचालन के साथ ही उन्हें खासतौर पर श्रीमद्भगवद्गीता को उर्दू शायरी में ढालने के लिए भी जाना जाता रहा।
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उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर की गीतांजलि का भी पद्यानुवाद किया था। जलालपुरी को प्रदेश सरकार यश भारती से भी नवाज चुकी है।
पिता ने भाषाई एकता के लिए काम किया
अनवर जलालपुरी का चयन पद्मश्री के लिए किए जाने पर उनके बेटों ने सरकार का आभार जताया है। लखनऊ के हुसैनगंज लालकुआं में रह रहे बेटे शहरयार जलालपुरी ने कहा कि पिता ने हमेशा सांप्रदायिक और भाषाई एकता के लिए काम किया। इसी कारण उन्होंने गीता और गीतांजलि का उर्दू पद्यानुवाद किया। वहीं, जलालपुर में रह रहे बेटे शाहकार जलालपुरी ने कहा कि 40वां के पहले यह सम्मान पिता को मिल सका है।
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