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Lucknow News: ओपन किचन भी बन सकता है एलर्जी की वजह
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लखनऊ। नए जमाने में बनने वाले ओपन किचन भी एलर्जी की वजह बन सकते हैं। यह एलर्जी खान-पान से लेकर त्वचा की भी हो सकती है। शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के बाल रोग चिकित्सा पर आयोजित अधिवेशन में दिल्ली के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज गुप्ता ने यह जानकारी दी।
डॉ. नीरज ने बताया कि किचन ओपन दो तरह से एलर्जी या संक्रमण की वजह बनता है। घर में मौजूद धूल या संक्रमण पकाए जा रहे भोजन में मिलकर बीमार बनाते हैं। इसके अलावा जब भोजन पकाया जाता है तो उस समय किचन का वायु गुणवत्ता सूचकांक एक हजार से ऊपर पहुंच जाता है। सामान्य अवस्था में पांच सौ का गुणवत्ता सूचकांक भी गंभीर की श्रेणी में आता है।
ओपन किचन होने पर यह धुंआ घर और आसपास खेल रहे बच्चों को नुकसान पहुंचाता है। इससे वे बीमार होते हैं। उन्होंने अगरबत्ती और धूपबत्ती के धुएं से भी बच्चों को बचाने की सलाह दी। उनके अनुसार एक अगरबत्ती 75 और धूप 125 सिगरेट के बराबर धुआं पैदा करती है।
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कहा कि बच्चों में किसी भी प्रकार की एलर्जी होने पर उसे गंभीरता से लेना चाहिए। बचपन में एलर्जी का पता लगने पर ज्यादातर का इलाज संभव होता है। कार्यक्रम में केजीएमयू की डॉ. सारिका गुप्ता, डॉ. संजय निरंजन, डॉ. अनुराग कटियार, डॉ. टीआर यादव और डॉ. सलमान मौजूद रहे।
खाने-पीने के कुपोषण के शिकार हैं बच्चे
डॉ. अभिषेक बंसल ने बताया कि अब भी बच्चे डायरिया और निमोनिया से काफी पीड़ित हो रहे हैं। साधन संपन्न परिवारों के बच्चे भी ज्यादा जंक फूड खाने से कुपोषण के शिकार हैं। उन्होंने छोटे बच्चों को पानी मिलाकर दूध न पिलाने की हिदायदी दी। प्रयागराज की डॉ. मनीषा मौर्या ने बताया कि बच्चों में इंडोक्राइन ग्रंथि में विकार होने पर समस्याएं होती हैं। चेहरे का असामान्य होना, सुस्ती, पीलिया जैसे लक्षण होते हैं।
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डॉ. नीरज ने बताया कि किचन ओपन दो तरह से एलर्जी या संक्रमण की वजह बनता है। घर में मौजूद धूल या संक्रमण पकाए जा रहे भोजन में मिलकर बीमार बनाते हैं। इसके अलावा जब भोजन पकाया जाता है तो उस समय किचन का वायु गुणवत्ता सूचकांक एक हजार से ऊपर पहुंच जाता है। सामान्य अवस्था में पांच सौ का गुणवत्ता सूचकांक भी गंभीर की श्रेणी में आता है।
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ओपन किचन होने पर यह धुंआ घर और आसपास खेल रहे बच्चों को नुकसान पहुंचाता है। इससे वे बीमार होते हैं। उन्होंने अगरबत्ती और धूपबत्ती के धुएं से भी बच्चों को बचाने की सलाह दी। उनके अनुसार एक अगरबत्ती 75 और धूप 125 सिगरेट के बराबर धुआं पैदा करती है।
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कहा कि बच्चों में किसी भी प्रकार की एलर्जी होने पर उसे गंभीरता से लेना चाहिए। बचपन में एलर्जी का पता लगने पर ज्यादातर का इलाज संभव होता है। कार्यक्रम में केजीएमयू की डॉ. सारिका गुप्ता, डॉ. संजय निरंजन, डॉ. अनुराग कटियार, डॉ. टीआर यादव और डॉ. सलमान मौजूद रहे।
खाने-पीने के कुपोषण के शिकार हैं बच्चे
डॉ. अभिषेक बंसल ने बताया कि अब भी बच्चे डायरिया और निमोनिया से काफी पीड़ित हो रहे हैं। साधन संपन्न परिवारों के बच्चे भी ज्यादा जंक फूड खाने से कुपोषण के शिकार हैं। उन्होंने छोटे बच्चों को पानी मिलाकर दूध न पिलाने की हिदायदी दी। प्रयागराज की डॉ. मनीषा मौर्या ने बताया कि बच्चों में इंडोक्राइन ग्रंथि में विकार होने पर समस्याएं होती हैं। चेहरे का असामान्य होना, सुस्ती, पीलिया जैसे लक्षण होते हैं।