फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   only two colleges among 20 has full time principals

राजधानी के 20 में से सिर्फ दो कॉलेजों में हैं नियमित प्राचार्य

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2020 01:41 AM IST
विज्ञापन
only two colleges among 20 has full time principals
राजधानी के 20 में से सिर्फ दो कॉलेजों में हैं नियमित प्राचार्य - कैसे हो नैक ग्रेडिंग, नियमित प्राचार्य के लिए भी निर्धारित होते हैं अंक - 15 वर्षों से भी अधिक समय से नहीं हुई है प्राचार्यों की नियुक्ति लखनऊ। यूजीसी और उत्तर प्रदेश शासन ने सभी महाविद्यालयों के लिए नैक की ग्रेडिंग अनिवार्य कर दी है। नैक ग्रेडिंग में शिक्षकों के साथ ही प्राचार्य के लिए भी नंबर निर्धारित होते हैं। राजधानी के अनुदानित महाविद्यालयों की बात करें तो 20 में से सिर्फ दो महाविद्यालयों में ही नियमित प्राचार्य हैं। बाकी कॉलेज कार्यवाहक प्राचार्य के भरोसे हैं। प्राचार्य का चार्ज लेने वाले शिक्षक प्रशासनिक कामों में फंसे हुए हैं, ऐसे में उनकी खुद की क्लास प्रभावित हो रही है। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। जय नारायण मिश्र महाविद्यालय और शिया पीजी कॉलेज के प्राचार्य इसी 30 जून को सेवानिवृत हो गए। इसके बाद विद्यांत हिंदू कॉलेज और आईटी गर्ल्स कॉलेज में ही नियमित प्राचार्य रह गए हैं। इसके अलावा अन्य सभी महाविद्यालयों में प्राचार्य का कामकाज वरिष्ठ शिक्षकों के हवाले है। अल्पसंख्यक कॉलेजों में नियुक्ति प्रबंधन के स्तर पर होती है। इसलिए इनकी स्थिति सही रहती थी, लेकिन इस समय इनमें भी प्राचार्यों के पद खाली पड़े हैं। लखनऊ में 15 वर्षों से प्राचार्यों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। अगली नियुक्ति के लिए विज्ञापन भी जारी किया गया, लेकिन अभी तक इसकी प्रवेश परीक्षा का अता-पता नहीं है। इसी बीच प्रदेश में उच्चतर सेवा आयोग के स्थान पर शिक्षा के लिए एक संयुक्त महाआयोग गठित किया गया है। अब सवाल यह भी है कि पुराने विज्ञापन से नियुक्ति होगी या फिर दोबारा विज्ञापन निकाला जाएगा। --------- अल्पसंख्यक कॉलेजों की स्थिति भी खराब राजधानी के अल्पसंख्यक कॉलेजों में प्राचार्य और शिक्षक दोनों की नियुक्ति के मामले में स्थिति अभी तक बेहतर थी। शिया पीजी कॉलेज, आईटी, लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेजों में नियमित प्राचार्य नियुक्त थे। लेकिन इस साल लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज के प्राचार्य का आकस्मिक निधन तथा शिया पीजी कॉलेज के प्राचार्य के सेवानिवृत्त होने की वजह से स्थिति खराब हो गई है। --------- शिक्षकों के 25 फीसदी पद खाली लविवि से सहयुक्त अनुदानित महाविद्यालयों में इस समय कुल 817 पद स्वीकृत हैं। इनमें 200 से ज्यादा पद खाली पड़े हुए हैं। कई विभागों में तो महज एक-एक शिक्षक ही हैं। हाल ही में समाजशास्त्र और हिंदी विषय में नियुक्ति होने से स्थिति थोड़ी सुधरी है पर अभी भी हालत बेहद खराब है। हालांकि राजकीय कॉलेजों की स्थिति थोड़ी बेहतर है। राजधानी के चार राजकीय महाविद्यालयों में 50 में से केवल सात पद ही खाली हैं। --------- कोरोना की वजह से नहीं हो सकी प्रवेश परीक्षा अनुदानित महाविद्यालयों में प्राचार्य और शिक्षक दोनों की भर्ती उच्चतर शिक्षा आयोग से की जाती है। प्राचार्य पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन कोरोना की वजह से प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी। प्रयास किए जा रहे हैं कि जल्द से जल्द सभी महाविद्यालयों में नियमित प्राचार्य की नियुक्ति कर दी जाए। - आलोक श्रीवास्तव, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी --------- जल्द हो नियुक्ति महाआयोग को जल्द से जल्द विज्ञापन और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। नियमित प्राचार्य की अनुपस्थिति में नैक समेत काफी कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। अगर ऐसा संभव न हो तो लंबे समय से प्राचार्य पद का कामकाज देख रहे शिक्षक को ही विनियमित कर दिया जाए। - डॉ. मौलिंदु मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष, लुआक्टा
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed