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कागजों तक ही सीमित है दंगा पीड़ितों का दर्द

Wed, 25 Dec 2013 11:01 AM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 25 Dec 2013 11:01 AM IST
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only paperwork for riots victims

राज्य सरकार कानून-व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण महानगरों के साथ ही सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील जिलों में भी पुलिस आयुक्त प्रणाली शुरू करना चाहती है। हालांकि यह कवायद फिलहाल दस्तावेजी मशक्कत तक ही सीमित है।

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सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में मुख्यालय से लेकर जिलों तक के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की नाकामी सामने आने के साथ ही आयुक्त प्रणाली लागू करने की कवायद शुरू हो गई थी।
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इसके तहत डीजीपी देवराज नागर ने प्रस्ताव तैयार करने के लिए डीजी रेलवे रिजवान अहमद की अध्यक्षता में समिति का गठन किया था। इसमें एडीजी सुबेश कुमार सिंह, आईजी डीएस चौहान व डीआईजी डीके ठाकुर शामिल किए गए।
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समिति को प्रस्ताव तैयार करने के लिए मात्र दो दिन का समय दिया गया था। समिति ने जो मूल प्रस्ताव तैयार किया, उसमें सूबे के 14 स्थानों पर पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने की सिफारिश की गई।

हालांकि प्रथम चरण में इनमें से सिर्फ पांच स्थानों पर यह व्यवस्था शुरू करने की बात कही गई। इनमें पश्चिमी यूपी के मेरठ, मुजफ्फरनगर व शामली, गाजियाबाद-नोएडा व ग्रेटर नोएडा के अलावा लखनऊ और कानपुर शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक कानून-व्यवस्था के नजरिए से महत्वपूर्ण लखनऊ और कानपुर को सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों के साथ प्रथम चरण में शामिल किए जाने के पीछे ऊपर का इशारा था।

अध्यादेश लाने की थी तैयारी
समिति को प्रथम चरण के प्रस्ताव को अध्यादेश की तरह तैयार करने को कहा गया था। सरकार इसका अध्यादेश लाना चाहती थी और जिस समय यह प्रस्ताव तैयार हुआ, उस समय विधान मंडल का सत्र भी चल रहा था, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे सदन में नहीं रखा जा सका।


सूत्र बताते हैं कि इस पर अंतिम निर्णय किए जाने से पहले सरकार मूल प्रस्ताव में कुछ संशोधन चाहती है।

इसी वजह से आनन-फानन में तैयार कराया गया प्रस्ताव पिछले दो महीने से शासन में विचाराधीन पड़ा है। इस पर कब तक फैसला होगा, कोई भी अधिकारी इस बारे में बताने को तैयार नहीं है।

यहां पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू कराने का है प्रस्ताव
गाजियाबाद-नोएडा व ग्रेटर नोएडा, मुजफ्फरनगर व शामली, मेरठ, लखनऊ, कानपुर, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़, आगरा, वाराणसी, इलाहाबाद, फैजाबाद, झांसी और गोरखपुर।

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