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एनसीईआरटी की पहल : किताबें पढ़ने के साथ ही क्यूआर कोड स्कैन कर लेक्चर भी सुन सकेंगे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 07 Oct 2018 09:08 AM IST
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योजना की जानकारी देते एनसीईआरटी के डिपार्टमेंट ऑफ एलीमेंट्री एजुकेशन के हेड और प्रोफेसर अनूप कुमार राजपूत।
- फोटो : amar ujala
विद्यार्थी अब किताबें पढ़ने के साथ ही क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन कर इससे संबंधित लेक्चर भी सुन सकेंगे। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) डिजिटल एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए यह कवायद कर रही है।
इसके तहत 2019 में आने वाली किताबों में हर चैप्टर के अंत में एक क्यूआर कोड दिया जाएगा। इसे मोबाइल से स्कैन करने पर विद्यार्थियों को इससे संबंधित विस्तृत व डिजिटल पाठ्यक्रम उनके मोबाइल या आई पैड पर उपलब्ध हो जाएगा।
विज्ञान महोत्सव में हिस्सा लेने आए एनसीईआरटी के डिपार्टमेंट ऑफ एलीमेंट्री एजुकेशन के हेड और प्रोफेसर अनूप कुमार राजपूत ने शनिवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के लिए विद्यार्थियों को एक एप डाउनलोड करना होगा। किताबों में इसके बारे में जानकारी होगी।
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वे जब मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करेंगे तो अगर इससे संबंधित वीडियो-लेक्चर यू-ट्यूब पर होगा, वह आ जाएगा। अगर कंटेंट होगा तो उससे संबंधित वेबसाइट का लिंक आ जाएगा। विद्यार्थी इसके माध्यम से संबंधित विषय के बारे में और विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। यह सुविधा कक्षा 1 से 12वीं तक के लिए उपलब्ध होगी।
प्रो. राजपूत ने बताया कि काउंसिल ने ‘ई-पाठशाला’ के तहत सभी किताबें अपलोड कर दी हैं। एनआरओईआर के तहत सभी वीडियो-ऑडियो स्टडी मैटेरियल उपलब्ध हैं। काउंसिल कंटेंट तैयार करने के लिए रिसर्च करती है। विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ शिक्षकों को बुलाकर उनके माध्यम से किताबें तैयार कराते हैं। इसलिए ये किताबें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी काफी उपयोगी साबित होती हैं।
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इसके तहत 2019 में आने वाली किताबों में हर चैप्टर के अंत में एक क्यूआर कोड दिया जाएगा। इसे मोबाइल से स्कैन करने पर विद्यार्थियों को इससे संबंधित विस्तृत व डिजिटल पाठ्यक्रम उनके मोबाइल या आई पैड पर उपलब्ध हो जाएगा।
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विज्ञान महोत्सव में हिस्सा लेने आए एनसीईआरटी के डिपार्टमेंट ऑफ एलीमेंट्री एजुकेशन के हेड और प्रोफेसर अनूप कुमार राजपूत ने शनिवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के लिए विद्यार्थियों को एक एप डाउनलोड करना होगा। किताबों में इसके बारे में जानकारी होगी।
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वे जब मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करेंगे तो अगर इससे संबंधित वीडियो-लेक्चर यू-ट्यूब पर होगा, वह आ जाएगा। अगर कंटेंट होगा तो उससे संबंधित वेबसाइट का लिंक आ जाएगा। विद्यार्थी इसके माध्यम से संबंधित विषय के बारे में और विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। यह सुविधा कक्षा 1 से 12वीं तक के लिए उपलब्ध होगी।
प्रो. राजपूत ने बताया कि काउंसिल ने ‘ई-पाठशाला’ के तहत सभी किताबें अपलोड कर दी हैं। एनआरओईआर के तहत सभी वीडियो-ऑडियो स्टडी मैटेरियल उपलब्ध हैं। काउंसिल कंटेंट तैयार करने के लिए रिसर्च करती है। विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ शिक्षकों को बुलाकर उनके माध्यम से किताबें तैयार कराते हैं। इसलिए ये किताबें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी काफी उपयोगी साबित होती हैं।
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पाठ्यक्रम का बोझ कम करने की तैयारी
डेमो पिक
प्रो. राजपूत ने कहा कि एलीमेंट्री एजुकेशन के तहत विद्यार्थियों पर पाठ्यक्रम का बोझ कम करना चाहिए। एनसीईआरटी इसके लिए काम कर रही है। हमने इसके लिए 25 हजार शिक्षकों, विद्यार्थियों और आम लोगों से सुझाव लिए थे। इन सुझावों के आधार पर पाठ्यक्रम का बोझ कम किया जाएगा। हम अपने विद्यार्थियों को विश्व स्तर की स्किल देंगे। पढ़ाई उनके लिए बोझ नहीं बनेगी।
प्री-प्राइमरी के लिए बना रहे मॉडल पाठ्यक्रम
प्रो. राजपूत ने कहा कि एनसीईआरटी प्री-प्राइमरी के लिए भी मॉडल पाठ्यक्रम बना रही है। इसका ड्राफ्ट तैयार हो गया है, गाइडलाइन बनाई जा रही है। अभी कक्षा एक से पहले प्री-प्राइमरी में क्या करना या पढ़ाना है, यही तय नहीं है, जबकि यह बच्चों का सीखने, समझने, भावनात्मक विकास, व्यवहार करने का महत्वपूर्ण समय होता है। पाठ्यक्रम तैयार होने के बाद इसे राज्यों को भेजकर लागू कराया जाएगा। इसे सरकारी के साथ प्राइवेट स्कूलों में भी लागू किया जाएगा। हम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी इसे लागू करेंगे।
प्री-प्राइमरी के लिए बना रहे मॉडल पाठ्यक्रम
प्रो. राजपूत ने कहा कि एनसीईआरटी प्री-प्राइमरी के लिए भी मॉडल पाठ्यक्रम बना रही है। इसका ड्राफ्ट तैयार हो गया है, गाइडलाइन बनाई जा रही है। अभी कक्षा एक से पहले प्री-प्राइमरी में क्या करना या पढ़ाना है, यही तय नहीं है, जबकि यह बच्चों का सीखने, समझने, भावनात्मक विकास, व्यवहार करने का महत्वपूर्ण समय होता है। पाठ्यक्रम तैयार होने के बाद इसे राज्यों को भेजकर लागू कराया जाएगा। इसे सरकारी के साथ प्राइवेट स्कूलों में भी लागू किया जाएगा। हम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी इसे लागू करेंगे।