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Lucknow News: चीनी की तरह ही तेज रफ्तार से भागी प्याज की कीमत
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नरही में प्याज बेचता दुकानदार।
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लखनऊ। चीनी की तरह प्याज की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं। पखवाड़ा भर पहले 40 रुपये किलो वाला प्याज अब 60 रुपये किलो तक पहुंच गया है।
निशातगंज सब्जी मंडी के व्यापारी आसिफ ने बताया कि बारिश के कारण प्याज सड़ रहा है। नमी से उसमें फफूंदी लग जा रही है, जिससे स्टॉक संभालना मुश्किल हो गया है। इस परेशानी के कारण स्टॉक कम रखा था, ऐसे में अब कीमत बढ़ानी पड़ रही है।
वहीं, नरही के सब्जी व्यापारी अमितेश ने बताया कि 15-20 दिन पहले प्याज 30-40 रुपये में बिक रहा था। मंडी में प्याज महंगा होने से उन्हें दाम बढ़ाने पड़े हैं। हालांकि, कई व्यापारी दो-तीन किलो प्याज लेने पर 50 रुपये का भाव भी लगा रहे हैं।
प्रदेश में नहीं हुई फसल, इसलिए नासिक पर निर्भर
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सत्येंद्र सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद, कन्नौज, मेरठ, एटा और कानपुर में प्याज की अच्छी खेती होती है। पिछले साल रबी की फसल के लिए नर्सरी समय पर न पड़ने से उत्पादन प्रभावित हुआ था। इस बार खरीफ सीजन की प्रजातियां भी कम हैं और बारिश से प्याज जल्दी गल रही है। हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, बाराबंकी, सुल्तानपुर और लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में खरीफ सीजन की प्याज की बोआई नहीं हो पाई है। इस कारण प्रदेश को नासिक की प्याज पर निर्भर रहना पड़ रहा है। नासिक में भी उत्पादन प्रभावित है और बारिश के कारण महंगाई बढ़ी है।
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फसल और आपूर्ति में कमी
प्याज की दो फसलें होती हैं। एक बारिश वाली और दूसरी जाड़े वाली। इस बार बारिश वाली प्याज का रकबा कम रहा, जिससे उसकी आपूर्ति नहीं हो पाई। वर्तमान में जो प्याज बाजार में आ रही है, वह अप्रैल वाली फसल की है। इसी वजह से बाजार में प्याज की कमी बनी हुई है।
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निशातगंज सब्जी मंडी के व्यापारी आसिफ ने बताया कि बारिश के कारण प्याज सड़ रहा है। नमी से उसमें फफूंदी लग जा रही है, जिससे स्टॉक संभालना मुश्किल हो गया है। इस परेशानी के कारण स्टॉक कम रखा था, ऐसे में अब कीमत बढ़ानी पड़ रही है।
वहीं, नरही के सब्जी व्यापारी अमितेश ने बताया कि 15-20 दिन पहले प्याज 30-40 रुपये में बिक रहा था। मंडी में प्याज महंगा होने से उन्हें दाम बढ़ाने पड़े हैं। हालांकि, कई व्यापारी दो-तीन किलो प्याज लेने पर 50 रुपये का भाव भी लगा रहे हैं।
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प्रदेश में नहीं हुई फसल, इसलिए नासिक पर निर्भर
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सत्येंद्र सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद, कन्नौज, मेरठ, एटा और कानपुर में प्याज की अच्छी खेती होती है। पिछले साल रबी की फसल के लिए नर्सरी समय पर न पड़ने से उत्पादन प्रभावित हुआ था। इस बार खरीफ सीजन की प्रजातियां भी कम हैं और बारिश से प्याज जल्दी गल रही है। हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, बाराबंकी, सुल्तानपुर और लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में खरीफ सीजन की प्याज की बोआई नहीं हो पाई है। इस कारण प्रदेश को नासिक की प्याज पर निर्भर रहना पड़ रहा है। नासिक में भी उत्पादन प्रभावित है और बारिश के कारण महंगाई बढ़ी है।
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फसल और आपूर्ति में कमी
प्याज की दो फसलें होती हैं। एक बारिश वाली और दूसरी जाड़े वाली। इस बार बारिश वाली प्याज का रकबा कम रहा, जिससे उसकी आपूर्ति नहीं हो पाई। वर्तमान में जो प्याज बाजार में आ रही है, वह अप्रैल वाली फसल की है। इसी वजह से बाजार में प्याज की कमी बनी हुई है।