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Lucknow News: योग के वैज्ञानिक पक्ष को भी जानना चाहिए

Sun, 29 Sep 2024 06:46 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 29 Sep 2024 06:46 PM IST
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One should also know the scientific side of yoga
लखनऊ। पटेल चेस्ट संस्थान नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि योग भारत की हजारों साल पुरानी परंपरा है जो ऋषि मुनियों ने अपने अनुभव से लोक कल्याण के लिए इस संसार को दी है। आज इसके वैज्ञानिक पक्ष को जानने की भी जरूरत है। वे रविवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ योग एंड अल्टरनेटिव मेडिसिन के योग विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे।
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कोऑर्डिनेटर डॉ. अमरजीत यादव ने कहा कि योग व्यक्तित्व, चरित्र व राष्ट्र निर्माण के साथ ही शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाता है। उन्होंने आगे कहा कि उच्च रक्तचाप के प्रबंधन के लिए शशांकसन, भद्रासन, मोटापे के प्रबंधन के लिए धनुरासन, पश्चिमोतासन, अनिद्रा के लिए शवासन, बालासन का अभ्यास करना चाहिए।
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विशिष्ट अतिथि द्वितीय कैंपस के निदेशक प्रो. आरके सिंह ने योग के महत्व पर प्रकाश डाला। फैकल्टी के अधिष्ठाता प्रो. अशोक सोनकर ने बताया कि अगर हम अपनी खोई हुई योग परंपरा को जीवन में अपनाते है तो उसके सकारात्मक लाभ प्राप्त होते है।
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