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Lucknow News: एक मशीन... डेढ़ करोड़ में आई थी गड्ढे भरने... खाने लगी धूल

Thu, 11 Sep 2025 02:28 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Sep 2025 02:28 AM IST
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One machine... bought for Rs. 1.5 crore to fill potholes... started gathering dust
बिजनाैर रोड पर नगर​ निगम जोन आठ कार्यालय के सामने खड़ी गड्ढे भरने वाली मशीन। - फोटो : संवाद
लखनऊ। सड़कों के गड्ढों को भरने की आड़ में नगर निगम में मनमाना खेल चल रहा है। करीब डेढ़ साल पहले डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से गड्ढों को भरने वाली मशीन नगर निगम ने खरीदी थी, लेकिन इस मशीन से गड्ढे भरने का काम करीब एक साल से बंद है। ये मशीन बिजनौर रोड पर फ्लाईओवर के नीचे खड़ी धूल खा रही है। दूसरी ओर गड्ढों को भरने का काम ठेके पर हो रहा है।
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बीते वर्ष जब मशीन खरीदी गई थी तो बड़े-बड़े दावे किए गए थे। कहा गया कि मशीन आने पर सड़क के गड्ढों को भरने में आसानी होगी। पूरे वर्ष गड्ढे भरने का काम चलता रहेगा। उस समय दिखावे के लिए कुछ गड्ढे भरे भी गए। बाद में मशीन को शहर से दूर ले जाकर बिजनौर रोड पर नगर निगम जोन आठ कार्यालय के बाहर खड़ा कर दिया गया।
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खास ये है कि नगर निगम की केंद्रीय कार्यशाला गोमती नगर में एल्डिको ग्रीन काॅलोनी के पास है। कार्यशाला परिसर में ही निगम की सारी गाड़ियां और मशीनें खड़ी की जाती हैं। जानकारों ने बताया इस मशीन को इसलिए दूर खड़ा किया गया ताकि लोग इसे भूल जाएं और ठेके पर गड्ढे भरवाने का खेल चलता रहे।
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मशीन को लेकर ये भी चर्चा : जानकारों का कहना है कि गड्ढों को भरना तो एक बहाना था। असल में एक प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़े ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए ही डेढ़ करोड़ रुपये की मशीन खरीदी गई। मशीन बेचने वाले ठेकेदार ने गड्ढे भरने के जो काम किए, उस पर नगर निगम का करीब दो गुना पैसा खर्च हुआ।

मशीन वाले ठेकेदार को जितना भुगतान हुआ, उसके करीब आधे बजट में निगम ने टेंडर के जरिये गड्ढे भरवाए थे। अंदरखाने में जब सवाल उठाने लगे तो मशीन वाला ठेकेदार चला गया। सूत्र बताते हैं कि मशीन संचालन के लिए नगर निगम को अलग से टेंडर करना था, जो नहीं किया गया।

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ई-टेंडर के बजाय मैनुअल ठेके

शासन की व्यवस्था है कि पार्षद कोटे को छोड़कर जो भी काम नगर निगम निधि या शासन की निधि से होंगे उनके लिए ई टेंडर से ही कार्यदायी संस्था का चयन होगा। पहले ऐसा हो भी रहा था। इधर अंदरखाने कुछ ऐसा हुआ कि करीब 10 करोड़ रुपये की लागत वाले पैचवर्क के ठेके मैनुअल किए जा रहे हैं। इसके लिए एक टेंडर की अधिकतम लागत 10 लाख रुपये से थोड़ी कम ही रखी गई है। ऐसा खेल पार्षद कोटे के काम को ई टेंडर से बाहर रखने के लिए पहले से चलता आ रहा है ताकि मनचाहे ठेकेदार को टेंडर दिया जा सके।


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बारिश के बाद मशीन से भी गड्ढों को भरने का काम शुरू कराया जाएगा। नगर निगम कार्यकारिणी ने इसके लिए ई-टेंडर के बजाय मैनुअल टेंडर कराने का निर्णय लिया है।

- गौरव कुमार, नगर आयुक्त
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