आखिरकार मंत्री बने ओपी राजभर: सपा के साथ मिलकर लड़े थे चुनाव, हारते ही बीजेपी नेतृत्व के आए करीब
ओमप्रकाश राजभर योगी सरकार में मंत्री बन गए हैं। राजभर योगी के पहले कार्यकाल में भी मंत्री थे। 2022 चुनावों के ठीक पहले उन्होंने एनडीए छोड़कर सपा के साथ जुगलबंदी कर ली थी।
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राजभर योगी सरकार के पहले कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री पद पर थे लेकिन यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा के गठबंधन में शामिल हो गए। विधानसभा में सपा सरकार नहीं बना पाई। इसके बाद उनके अखिलेश यादव के बीच दूरियां बननी शुरू हो गईं। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव सिर्फ अपने परिवार के लिए काम करते हैं। उनके राज में पिछड़ों को कोई लाभ नहीं मिला। अपने बयानों से उन्होंने सपा नेतृत्व से दूरियां बढ़ाने का संकेत दिया और फिर दिल्ल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद एनडीए में शामिल हो गए।
लोकसभा चुनावों में लाभ
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व यूपी की 80 सीटों में खासतौर पर फोकस कर रहा है। ओपी राजभर का प्रभाव प्रदेश की कुछ सीटों में हैं। वह खुद तो चुनाव जीतने या हारने की क्षमता नहीं रखते लेकिन उनके साथ या खिलाफ होने से राजनीतिक समीकरणों में फर्क पड़ता है। यही वजह है कि विधानसभा चुनावों के पहले अखिलेश ने और लोकसभा चुनावों के पहले भाजपा ने राजभर को अपने पाले में करने की कोशिश की।
होली के पहले मिल गया राजपाठ
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को आखिरकार होली से पहले राजपाठ मिल ही गया है। बकौल राजभर 2019 में होली पर उन्होंने मंदी पद छोड़ा था। तब से उन्होंने अभी तक होली नहीं मनाई है। अब होली से पहले फिर राजपाठ मिलने पर चार साल बाद इस बार होली मनाएंगे।
ओमप्रकाश राजभर प्रदेश में राजभर सहित अन्य अति पिछड़ी जातियों को साथ लेकर 2002 में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की स्थापना की। 2017 में सुभासपा ने भाजपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा। सुभासपा ने तीन सीटें जीती थीं। ओमप्रकाश राजभर को पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री बनाया गया था। लेकिन, योगी सरकार से मनमुटाव के चलते ओमप्रकाश राजभर मार्च 2019 में सरकार से अलग गए थे। लोकसभा चुनाव 2019 में सुभासपा ने अपने दम पर चुनाव लड़ा।
विधानसभा चुनाव 2022 से पहले सुभापसा ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया। सुभापसा और सपा के गठबंधन के कारण भाजपा को पूर्वांचल में करीब 10-15 सीटों पर नुकसान हुआ। वहीं सुभासपा को छह सीटें मिली। लेकिन सपा के साथ भी उनका गठबंधन ज्यादा दिन नहीं चला। जुलाई 2023 में ओमप्रकाश राजभर सपा से गठबंधन तोड़कर फिर एनडीए में शामिल हो गए। तब से ओमप्रकाश को मंत्री बनने का इंतजार था। गत दिनों उन्होंने एक बयान दिया था कि यदि राजपाठ नहीं मिला तो इस बार भी होली नहीं मनाऊंगा। लेकिन अब होली से पहले उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया है।