फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   om birla says the presiding officers will be limited on the defection law

दलबदल कानून पर सीमित होंगे पीठासीन अधिकारियों के अधिकार: ओम बिरला

Sat, 18 Jan 2020 04:00 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 18 Jan 2020 04:00 AM IST
विज्ञापन
om birla says the presiding officers will be limited on the defection law
ओम बिरला - फोटो : ट्विटर
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि दलबदल कानून पर पीठासीन अधिकारियों के असीमित अधिकार सीमित किए जाएंगे। इसके लिए कई राज्यों के पीठासीन अधिकारियों की चिंता के बाद एक कमेटी का गठन कर दिया गया है। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पंजाब और केरल राज्य के पारित प्रस्ताव पर कहा कि केंद्र के दायरे के कानून को प्रत्येक राज्य को लागू करना होगा। इसमें कहीं कोई संशय नहीं होना चाहिए।
विज्ञापन


ओम बिरला ने शुक्रवार को राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन के समापन के बाद राजधानी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि सम्मेलन से पूर्व देहरादून में हुई बैठक में कई पीठासीन अधिकारियों ने ही उनके असीमित अधिकारों पर चिंता जताई थी। इन्हें सीमित करने पर भी सहमति बनी। पीठासीन अधिकारियों के अधिकार नियम-प्रक्रियाओं के माध्यम से सीमित करके अगर सदन चलाया जाए तो बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
विज्ञापन


यह पूछे जाने पर कि इन अधिकारों को सीमित करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? ओम बिरला ने कहा कि दल-बदल कानून पर पीठासीन अधिकारियों के असीमित अधिकारों को लेकर समय-समय पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणियां की हैं। इसलिए पीठासीन अधिकारियों का यह मत बना है कि इसकी निश्चित नियम व प्रक्रियाएं होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लागू करने पर राज्यों की आपत्तियों पर उन्होंने कहा कि तीन तरह के कानून होते हैं। एक केंद्र सरकार का विषय होते हैं, दूसरा राज्य का और तीसरा समवेत सूची के विषय होते हैं। अप्रत्यक्ष रूप से आप (संवाददाता) सीएए की बात कर रहे हैं।

यह संसद में पूरी चर्चा के बाद बहुमत के आधार पर पास हुआ। जिन मामलों में कानून बनाने का अधिकार केंद्र के पास है, उनका पालन राज्यों को करना ही होगा। पार्टी के अपने सदस्य की सदस्यता खत्म करने की याचिका के बाद भी उस पर निर्णय न होने संबंधी सवाल पर बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों के इन्हीं सब अधिकारों नियम-प्रक्रियाओं के तहत लाने पर विचार किया जा रहा है।

35 डेलीगेट्स ने लिया हिस्सा

ओम बिरला ने कहा कि राष्टमंडल संसदीय संघ के सातवें अधिवेशन में विभिन्न राज्यों के 35 डेलीगेट्स ने हिस्सा लिया। उद्घाटन व समापन समारोह में यूपी के विधायक व सांसदों को मिलाकर कुल 270 सदस्यों ने हिस्सा लिया।

इससे पहले दिल्ली में पीठासीन अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इन मुद्दों पर फॉलोअप के लिए देहरादून में बैठक की गई।

जनप्रतिनिधियों को किया जाएगा प्रशिक्षित

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लखनऊ अधिवेशन में दो विषयों पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। बजट प्रस्तावों पर समझ और जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाना, ताकि विधायी कार्यों में विधायकों की भूमिका बढ़ाकर लोकतंत्र को मजबूत बनाया जा सके।

हमारे पास क्षमता निर्माण के लिए एक संस्था प्राइड है। तय हुआ है कि यह संस्था विधायकों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देगी। इससे सदन के भीतर होने वाले वाद-विवाद का स्तर ऊंचा उठ सकेगा।

राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनाई गई है, जो सभी विधानसभाओं से चर्चा करके रिपोर्ट सौंपेंगे। सदन चलने में व्यवधान को रोकने के लिए नियम-पक्रिया तय करने के लिए यूपी के विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। ये नियम-प्रक्रिया नेता प्रतिपक्ष और सभी दलीय नेताओं से बातचीत करके तैयार किए जाएंगगे।

डिजिटल की जाएंगी डिबेट

बिरला ने कहा कि संसद की रिसर्च विंग व लाइब्रेरी और राज्य विधानमंडल की लाइब्रेरी को एक तंत्र से जोड़ते हुए एक प्लेटफार्म पर लाने की योजना बनाई गई है। संसद और विधानसभा की सभी कार्यवाहियां और डिबेट एक ही प्लेटफार्म पर लाने की योजना पर काम हो रहा है।

संसद में हुई काफी डिबेट डिजिटल हो चुकी हैं, शेष डिबेट इस साल के अंत तक डिजिटल कर दी जाएंगी। राज्य विधानमंडल के अंदर भी सभी कार्यवाहियों को डिजिटल करने में मदद देंगे।

बजटीय प्रावधानों पर जवाबदेही तय करने की कवायद

बिरला ने कहा कि संसद की पब्लिक एकाउंट कमेटी के 100 वर्ष पूरे होने पर सम्मेलन किया जाएगा। इसमें सभी राज्यों की पब्लिक एकाउंट कमेटी के चेयरमैन और सदस्यों को भी आपस में चर्चा करने के लिए बुलाया जाएगा।

उद्देश्य बजटीय प्रावधानों पर कार्यपालिका पर नियंत्रण व पारदर्शिता के लिहाज से सरकार की जवाबदेही तय करना है। इसके लिए बनाई गई समितियों को और प्रभावी बनाया जाएगा। विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारियों, संसदीय कार्य मंत्रियों और सदन में सभी दलीय नेताओं का सम्मेलन भी किया जाएगा।

श्रेष्ठ विधायक होंगे सम्मानित

उन्होंने कहा कि सभी विधानमंडलों में सदस्यों के बेल में आकर व्यवधान उत्पन्न करने की स्थिति अक्सर देखी जाती है। इसके लिए यह भी सहमति बनी है कि संसद और राज्यों के सदन चलाने के लिए एक जैसी नियम-प्रक्रियाएं लागू की जाएं।

सभी विधानमंडल अपने श्रेष्ठ विधायकों को सम्मानित भी करेंगे। प्रस्तावित विधेयकों का उद्देश्य और मुख्य बिंदु बताने के लिए पहले ही सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। नगर निकाय और ग्राम व जिला पंचायतों में भी बजटीय व अन्य विषयों पर संवाद करके सदस्यों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

इतना ही नहीं कई देशों के मध्य भी जन प्रतिनिधियों और कार्मिकों को प्रशिक्षित करने पर सहमति बनी है। मालदीव के साथ यह कार्यक्रम प्रारंभ भी हो चुका है।

कानून के तहत ही रोका जा सकता है चुनाव लड़ने से

एक सवाल के जवाब में ओम बिरला ने कहा कि अगर कानून में किसी के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं है तो उसे नहीं रोका जा सकता, भले ही वह अपराधी ही क्यों न हो। उन्होंने सदनों के माध्यम से कार्यपालिका की जवाबदेही और सरकार पर निगरानी रखने पर जोर दिया।

कहा कि सदन में बिना सूचना हिस्सा न लेने वाले सदस्यों के मामले एक समिति को संदर्भित किए जाते हैं। हिस्सा न लेने वाले सदस्यों को भत्ते नहीं मिलते हैं। उन्होंने माना कि राज्य विधानमंडल सदन ज्यादा दिन चलने चाहिए। बिजनेस देना केंद्र सरकार का काम होता है, जबकि सदन चलाने का काम सभापति का होता है।

विपक्ष को आवाज उठाने का ज्यादा अधिकार

ओम बिरला ने कहा कि जनप्रतिनिधि सजग प्रहरी होता है। सदन के भीतर विपक्ष को आवाज उठाने का अधिकार अधिक होता है, लेकिन ये नियम-कानून के तहत ही होना चाहिए। सदन में रखने के लिए गलत आंकड़े देने वाले अफसरों पर कार्रवाई के लिए एक समिति बनी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed