{"_id":"60204a0e8ebc3e4c872255e1","slug":"old-sewage-treatment-plants-are-insufficient-lucknow-news-lko56372134","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर्याप्त नहीं, नए लग नहीं रहे, कैसे स्वच्छ हो गोमती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर्याप्त नहीं, नए लग नहीं रहे, कैसे स्वच्छ हो गोमती
विज्ञापन
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। गोमती को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए बनाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट दस साल में ही नाकाफी हो गए हैं। इसके चलते नए एसटीपी की जरूरत है, पर अभी इसके लिए बजट ही नहीं जारी हुआ है। इसके चलते गोमती को प्रदूषण से जल्द निजात मिलती नहीं दिख रही है।
शहर में अभी दो एसटीपी हैं। पहला दौलतगंज में 56 एलएलडी का और दूसरा भरवारा में 342 एमएलडी क्षमता का। करीब दस साल पहले इन एसटीपी से शहर के 26 बड़े नालों को जोड़ा गया था, पर अब तक करीब दर्जनभर छोटे-बड़े नाले और बढ़ गए। जिनका गंदा पानी सीधे गोमती में गिर रहा है। इसी तरह दौलतगंज एसटीपी में क्षमता से अधिक नालों का पानी आ रहा है। जो ओवरफ्लो कर गोमती में जा रहा है।
जमीन पर नहीं उतर पाईं योजनाएं
गोमती को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए करीब 1200 करोड़ लागत की योजनाएं बन चुकी हैं। बजट के लिए केंद्र की नमामि गंगे योजना में भी भेजा जा चुका है, पर तीन साल से बजट का इंतजार है। बजट मिले तो घैला और बिजनौर में एसटीपी का निर्माण हो। दौलतगंज में एसटीपी की क्षमता का विस्तार होना है और भरवारा एसटीपी में 100 एमएलडी क्षमता का नया प्लांट बनना है। पिपराघाट, नगरिया ठाकुरगंज में नए सीवेज पंपिंग स्टेशन का भी निर्माण किया जाना है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट कई बार जता चुका है नाराजगी
गोमती को स्वच्छ बनाने के लिए हाईकोर्ट कई बार आदेश कर चुका है और नदी में गंदगी जाने को लेकर नाराजगी भी जता चुका है। अब फिर न्यायालय ने गोमती की हालत सुधारने को लेकर सभी विभागों से जवाब-तलब किया है। जल निगम के गोमती प्रदूषण नियंत्रण इकाई के जीएम आरके अग्रवाल बताते हैं कि गोमती में गिर रहे नालों को रोकने के लिए कई प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए भेजे गए हैं। उनका पैसा जारी होते ही काम शुरू हो जाएगा। इसमें नए एसटीपी बनाए जाने के साथ पुराने की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है।
विज्ञापन
शहर में अभी दो एसटीपी हैं। पहला दौलतगंज में 56 एलएलडी का और दूसरा भरवारा में 342 एमएलडी क्षमता का। करीब दस साल पहले इन एसटीपी से शहर के 26 बड़े नालों को जोड़ा गया था, पर अब तक करीब दर्जनभर छोटे-बड़े नाले और बढ़ गए। जिनका गंदा पानी सीधे गोमती में गिर रहा है। इसी तरह दौलतगंज एसटीपी में क्षमता से अधिक नालों का पानी आ रहा है। जो ओवरफ्लो कर गोमती में जा रहा है।
विज्ञापन
जमीन पर नहीं उतर पाईं योजनाएं
गोमती को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए करीब 1200 करोड़ लागत की योजनाएं बन चुकी हैं। बजट के लिए केंद्र की नमामि गंगे योजना में भी भेजा जा चुका है, पर तीन साल से बजट का इंतजार है। बजट मिले तो घैला और बिजनौर में एसटीपी का निर्माण हो। दौलतगंज में एसटीपी की क्षमता का विस्तार होना है और भरवारा एसटीपी में 100 एमएलडी क्षमता का नया प्लांट बनना है। पिपराघाट, नगरिया ठाकुरगंज में नए सीवेज पंपिंग स्टेशन का भी निर्माण किया जाना है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट कई बार जता चुका है नाराजगी
गोमती को स्वच्छ बनाने के लिए हाईकोर्ट कई बार आदेश कर चुका है और नदी में गंदगी जाने को लेकर नाराजगी भी जता चुका है। अब फिर न्यायालय ने गोमती की हालत सुधारने को लेकर सभी विभागों से जवाब-तलब किया है। जल निगम के गोमती प्रदूषण नियंत्रण इकाई के जीएम आरके अग्रवाल बताते हैं कि गोमती में गिर रहे नालों को रोकने के लिए कई प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए भेजे गए हैं। उनका पैसा जारी होते ही काम शुरू हो जाएगा। इसमें नए एसटीपी बनाए जाने के साथ पुराने की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है।