अनाज के लिए भटकते-भटकते वृद्धा ने तोड़ा दम, मौत के बाद कोटेदार ने पहुंचाया राशन
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डलमऊ क्षेत्र के पूरे भवानी मजरे कुरौली दमा में राशन के लिए कोटे की दुकान के चक्कर लगा रही वृद्धा ने दम तोड़ दिया। पीओएस मशीन से राशन वितरण न हो पाने पर वृद्धा को बार-बार लौटाया गया। उसकी मौत के बाद कोटेदार ने उसके घर राशन पहुंचा दिया। कुछ लोग उसकी मौत को भूख से होना बता रहे हैं, लेकिन एसडीएम ने इससे इंकार किया। कहा कि उसकी मौत भूख से नहीं हुई है।
डलमऊ क्षेत्र के पूरे भवानी मजरे कुरौली दमा गांव की सरयू देवी (75) पत्नी रघुवर का अंत्योदय कार्ड बना था। वह अपनी विधवा बहू माया के साथ रहती थी। बहू किसी तरह मजदूरी करके सास व परिवार का पालन पोषण करती है।
अंत्योदय कार्ड बनने के कारण हर महीने उसे 35 किलोग्राम राशन भी मिल जाता है। दिसंबर महीने से पीओएस मशीन से राशन वितरण शुरू होने के कारण वृद्धा को बीती पांच दिसंबर से राशन के लिए भटकना पड़ रहा था। मशीन से उसकी पहचान न होने के कारण राशन नहीं दिया गया।
आरोप है कि बीती 27 दिसंबर को वृद्धा कोटे की दुकान पर राशन लेने के लिए गई थी, वहीं बेहोश होकर गिर गई थी। उसे अस्पताल में इलाज के बाद घर लाया गया। शनिवार को उसकी घर में मौत हो गई। मौत की खबर मिलने के बाद हड़कंप मच गया। मौत के बाद कोटेदार ने वृद्धा के घर राशन पहुंचा दिया।
मृत वृद्धा की बहू माया का आरोप है कि पांच तारीख से लगातार उसकी सास राशन के लिए चक्कर लगा रही थी। 27 दिसंबर को कोटे की दुकान पर ही उनकी हालत खराब हो गई थी। मौत के बाद राशन दिया गया है।
प्रधान रेनू शुक्ला का कहना है कि सरयू की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। किसी तरह उसका काम चलता था। मशीन से पहचान न होने के कारण उसे राशन के लिए कई बार कोटे की दुकान पर जाना पड़ा।
वृद्धा की मौत भूख से नहीं : एसडीएम
एसडीएम डलमऊ जीतलाल सैनी ने बताया कि वृद्धा की मौत की खबर मिलते ही मामले की जांच कराई गई है। वृद्धा की मौत भूख से नहीं हुई है। पीओएस मशीन में तकनीकी खामी के कारण उसकी पहचान न होने के कारण राशन नहीं मिल सका। 25 दिसंबर के बाद मैनुअल राशन वितरण शुरू होने के बाद उसे राशन दिया गया है। मामले में यदि कोई शिकायत मिलती है तो जांच