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लौटेगा गोमती का पुराना वजूद, नए सिरे से चिह्नित होंगे प्रवाह क्षेत्र के 500 मीटर इलाके

Sat, 08 Jun 2019 12:39 AM IST
सौरभ दिक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: सौरभ दिक्षित Updated Sat, 08 Jun 2019 12:39 AM IST
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Old existence of gomti will be return, work will be started from july
गोमती रिवर फ्रंट - फोटो : amar ujala
शहर की लाइफ लाइन गोमती नदी के पानी को स्वच्छ, निर्मल व प्रवाह युक्त बनाने के लिए इसके प्रवाह क्षेत्र की सीमा से 500 मीटर तक की जमीन का नए सिरे से चिह्नांकन होगा। इसका उद्देश्य शहर की सीमा में प्रवेश करते ही नदी के पानी के थमने वाले प्रवाह को दोबारा तेज व स्वच्छ करना है।
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इस दौरान नदी के प्रवाह क्षेत्र में चिह्नित होने वाली निजी खातेदारों के नाम दर्ज भूमि को अन्य सुरक्षित जगह शिफ्ट कराकर प्रवाह क्षेत्र का कब्जा हटाया जाएगा। शासन ने इसकी पहल करते हुए जिलाधिकारी को पत्र भेजकर गोमती के प्रवाह क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
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उप सचिव शासन गिरीश चंद्र ने जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा को भेजे गए पत्र में कहा है कि नदी के प्रवाह क्षेत्र की सीमा से 500 मीटर तक का क्षेत्र नदी की आजादी का क्षेत्र माना जाता है। इसे उच्च बाढ़ क्षेत्र के तौर पर पहचानते हैं।
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मूलत: नदी भूमि प्रवाह क्षेत्र, बाढ़ क्षेत्र और अंत में उच्च बाढ़ क्षेत्र के तहत तीन श्रेणियों में चिह्नित होती है। प्रवाह क्षेत्र स्वयं नदी बरकरार रखती है, लेकिन इससे जुड़े बाढ़ क्षेत्र व उच्च बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण के कारण नदी का प्रवाह क्षेत्र भी सीधे तौर पर प्रभावित होता है।

प्रवाह थम जाने से नदी का पानी एक ही जगह स्थिर हो कर कीचड़ युक्त बन बदबूदार होने लगता है। इसलिए शासन ने नदी के प्रवाह क्षेत्र के पांच सौ मीटर दायरे की जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त बना नदी का प्रवाह बढ़ाने का फैसला लिया है। यह काम बरसात तक शुरू करने का निर्णय हुआ है। इसके लिए जिला प्रशासन से 15 जून तक सूचना उपलब्ध कराने को कहा है।

रिपोर्ट में शासन को देनी होगी ये जानकारी
शासन को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में इस बात का विवरण देना होगा कि लखनऊ में प्रवाहित हो रही गोमती नदी के नाम पर कितनी जमीन दर्ज है। नदी किन राजस्व ग्राम व स्थान से होकर बहाव क्षेत्र बना रही है। बहाव क्षेत्र से जुड़ी कितनी जमीन निजी खातेदारों के नाम दर्ज है। क्या गोमती नदी के नाम से दर्ज जमीन किसी व्यक्ति विशेष के कब्जे में तो नहीं है। इसके साथ ही रिपोर्ट में गोमती नदी के सजरे की प्रमाणित प्रति के साथ नदी के प्रवाह क्षेत्र के 500 मीटर दायरे की अवैध कब्जे में चिह्नित जमीन को लाल रंग से और निजी खातेदारों की जमीन को हरे रंग के साथ चिह्नित कर प्रस्तुत करना होगा।


अवैध कब्जों से शहर में प्रवेश संग थम जाता प्रवाह
बीकेटी व माल के ग्रामीण इलाकों से होकर आईआईएम पुल के समीप से गोमती नदी जब शहरी इलाके में प्रवेश करती है तो इसका प्रवाह काफी हद तक सामान्य दिखता है। लेकिन शहरी इलाके में प्रवेश के बाद फैजुल्लागंज से गऊघाट तक पहुंचते-पहुंचते इसके प्रवाह क्षेत्र में अनियोजित विकास व आबादी क्षेत्र विकसित हो जाने से पानी का प्रवाह थम जाता है। इसके कारण ही आगे डालीगंज पुल से हनुमान सेतु तक पानी का बहाव स्थिर हो जाने से जलकुंभी के साथ पानी भी बदबूदार होने लगता है। नदी के पानी का प्रवाह स्थिर हो जाने से ही इसमें गिरने वाले सीवर युक्त नालों से वर्तमान में नदी का पुराना वजूद ही खतरे में पड़ने लगा है।
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