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कुछ कहती हैं ये खामोश कोठियां (पार्ट-2)
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 27 Jul 2013 04:54 PM IST
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बिबियापुर कोठी- यहां बनी देश की पहली घुमावदार सीढ़ी
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शहर के दक्षिण-पूर्व में गोमती नदी के किनारे बनी इस कोठी को नवाब असाफ-उद-दौला ने ईसवी 1775-97 में बनवाया था। इसकी रूपरेखा तैयार करने में जनरल क्लाउड मार्टिन का बहुमूल्य योगदान रहा।
असल में मार्टिन एक फ्रांसीसी अधिकारी थे, जो बाद में ब्रिटिश सेना में शामिल हो गए। यही वजह है कि इस कोठी में फ्रांसीसी भवन निर्माण शैली की झलक भी देखने को मिलती है।
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आप कह सकते हैं इस दो मंजिली इमारत का ढांचा तो बहुत ही साधारण है, लेकिन इसकी डिजाइनिंग कमाल की है। कई बड़े और खुलेदार हॉल्स में लकड़ी के कई बीम्स लगे हुए हैं, जो इसे खास बनाते हैं।
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इस कोठी की खास बात यह है कि यहां घुमावदार सीढ़ियां हैं। ऐसा माना जाता है कि भारत में सबसे पहले लकड़ी की घुमावदार सीढ़ियां यहीं देखने को मिलीं।
बेशक आज इस कोठी का पुरसाहाल लेने वाला कोई नहीं है, लेकिन अपने समय में इस कोठी के सबसे बड़े हॉल में सफेद और नीले यूरोपियन टाइल्स लगे हुए थे।
ये बेहद खूबसूरत दिखते थे। बिबियापुर कोठी की रौनक उस वक्त बढ़ जाती थी, जब किसी नवाब से मिलने उनके यूरोपियन मेहमान आते थे।
दरअसल, नवाब इस कोठी का इस्तेमाल अपने यूरोपियन मेहमानों के साथ मनोरंजन करने के लिए करते थे। वैसे इसका इस्तेमाल शाही परिवार शिकार करने के लिए भी करता था।
बिबियापुर कोठी इसलिए भी खास है, क्योंकि यहीं सर जॉन शोर ने 21 मई 1798 को नवाब सआदत अली खान को अवध की रियासत सौंपी थी।