फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Officers to live in villages ordered chief secretary.

अखिलेश ने छीना अफसरों का 'आराम', गावों में भेजा!

Wed, 28 Jan 2015 08:53 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 28 Jan 2015 08:53 PM IST
विज्ञापन
Officers to live in villages ordered chief secretary.

कमिश्नर, कलेक्टर व अन्य अफसरों द्वारा गांवों में रात्रि निवास के फरमान की अनदेखी को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्य सचिव ने न सिर्फ अफसरों को रात्रि निवास अनिवार्य रूप से करने की हिदायत दी है बल्कि इस दौरान उनके कामकाज पर सख्त निगरानी के भी संदेश दिए हैं।

विज्ञापन


ये अधिकारी अब गांवों में रात को तो ठहरेंगे ही, ठाठ भी नहीं बघारेंगे। उन्हें गांवों में उपलब्ध संसाधनों का ही इस्तेमाल करना होगा। शायद तब वे गांव के लोगों की मुश्किलें ज्यादा अच्छी तरह से समझ पाएंगे।
विज्ञापन


दरअसल, पिछले दिनों राजस्व परिषद के चेयरमैन जावेद उस्मानी ने जिलों के कामकाज की समीक्षा की तो पता चला कि कमिश्नर व कलेक्टर तय समय पर न तो गांवों के भ्रमण पर जा रहे हैं और न ही रात में वहां रुक रहे हैं। यदि कहीं गए भी तो ठीक से प्रचार-प्रसार नहीं हो रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां तक कि निरीक्षण में पाई जाने वाली कमियों व समस्याओं के निराकरण की कोई कार्रवाई ही नहीं की जा रही। दिलचस्प ये रहा कि कई बार वरिष्ठ अधिकारी गांवों में भ्रमण पर गए तो वहां मातहत कर्मचारी ही गायब थे। यदि कर्मचारी मिले तो जरूरी दस्तावेज नहीं लाए थे।

इससे गांव वालों को अफसर के दौरे का फायदा नहीं मिल पाता। राजस्व परिषद के चेयरमैन का यह फीडबैक शासन में पहुंचा तो मशीनरी सक्रिय हो गई।

मुख्य सचिव ने दिया आदेश

Officers to live in villages ordered chief secretary.

मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सभी मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों को उनके नकारेपन की विस्तार से जानकारी देते हुए एक सख्त शासनादेश जारी किया है।

इसमें अफसरों को बताया गया है कि वे न सिर्फ गांवों में बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार करवाकर रात्रि निवास के लिए जाएंगे बल्कि सांसदों, विधायकों व पंचायत प्रतिनिधियों को पहले से इसकी सूचना देंगे।

अफसरों को गांवों में जाकर किन-किन योजनाओं की जमीनी हकीकत समझनी है, सरकार की प्राथमिकता वाले किन कामों का सत्यापन करना है और किन-किन योजनाओं का फीडबैक शासन को देना है, यह विस्तार से बताया गया है।

गांवों में मिली शिकायतों व समस्याओं का 31 मार्च तक  हर हाल में निराकरण करना होगा।

सीएम के ‘क्लीन यूपी-ग्रीन यूपी’ का देंगे संदेश

Officers to live in villages ordered chief secretary.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान की धूम के बीच प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ‘क्लीन यूपी-ग्रीन यूपी’ मिशन का संदेश जमीनी स्तर पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।

मुख्य सचिव ने सभी कमिश्नरों और कलेक्टरों को खास तौर से हिदायत दी है कि वे गांवों में ठहरने के दौरान ‘क्लीन यूपी-ग्रीन यूपी’ के अंतर्गत ग्रामीणों को स्वच्छता का संदेश देंगे। उन्हें शौचालय के निर्माण व उसके इस्तेमाल के बारे में प्रेरित करेंगे।

बताते चलें कि प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री को जब स्वच्छता दूत नामित किया था तो सीएम ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि यूपी सरकार तो पहले से ही ‘क्लीन यूपी-ग्रीन यूपी’ पर काम कर रही है।

माना जा रहा है कि मोदी के स्वच्छता अभियान के जवाब में सरकार ने मुख्यमंत्री के मिशन को फोकस देने के लिए अपने सबसे प्रभावशाली अफसरों का सहारा लेने का फैसला किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed