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अफसर मंच पर बैठे तो खफा हुए ‘मान्यवर’

Tue, 18 Nov 2014 01:29 PM IST
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 18 Nov 2014 01:29 PM IST
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officers not followed protocol, mp turn angry.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) के विशेष प्रशिक्षण में अफसरों के मंच पर ऊपर बैठने पर सांसद खफा हो गए।

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अफसरों से नाराज दो दर्जन सांसदों ने प्रशिक्षण का बायकॉट करते हुए हंगामा कर दिया। करीब 30 मिनट तक चले विवाद के बाद आयोजकों के माफी मांगे जाने पर विवाद शांत हुआ।
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सांसदों का कहना था कि अधिकारियों को सामान्य प्रोटोकॉल की जानकारी तक नहीं है। बख्शी का तालाब स्थित डीडीयू-एसआईआरडी के परिसर में यह विशेष प्रशिक्षण यूपी के सांसदों और जिलास्तरीय प्रशासनिक अधिकारियों के लिए आयोजित किया गया था।
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प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संयुक्त रूप से समग्र ग्राम्य विकास विभाग और दीन दयाल उपाध्याय स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डवलपमेंट (डीडीयू-एसआईआरडी) की थी।

आयोजन के तरीके पर जताया ऐतराज

officers not followed protocol, mp turn angry.

प्रशिक्षण की शुरुआत कराने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव अपराजिता सारंगी, ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. रजनीश दुबे और डीडीयू-एसआईआरडी के महानिदेशक एनएस रवि मंच पर बैठ गए।

जबकि 21 सांसदों और 19 सांसद प्रतिनिधियों को सभागार में मौजूद सीटों पर बिठाया गया। इस पर सांसद नाराज हो गए। घोसी के हरि नारायण राजभर और संत कबीरनगर के शरद त्रिपाठी समेत कई सांसद अपनी सीट छोड़कर ही बायकॉट के लिए बाहर निकल गए।

इसके बाद प्रशिक्षण देने आईं संयुक्त सचिव अपराजिता सारंगी ने खुद आयोजकों की तरफ से मांगी मांग कर सांसदों को बैठने के लिए अपील की।

अफसरों के रवैये पर चंदौली के सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा, मैं इस आयोजन के तरीके पर सख्त ऐतराज जताता हूं। संसद सदस्यों के प्रति यह आयोजन पक्ष का अनुचित व्यवहार है।

इस मर्यादित स्थान पर गलत शब्द का इस्तेमाल करना नहीं चाहता। मैं कड़े शब्दों में इसे अनुचित साबित करता हूं।

प्रोटोकॉल की जानकारी नहीं थी

officers not followed protocol, mp turn angry.

हाथरस संसदीय क्षेत्र के सांसद राजेश कुमार दिवाकर ने बताया कि उन्हें चार दिन पहले ई-मेल से प्रशिक्षण के बारे में जानकारी दी गई।

अनिवार्य रूप से मौजूद रहने की वजह से ट्रेन से जल्दबाजी में लखनऊ पहुंचा। आयोजकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने आने-जाने और रुकने की व्यवस्था कराने तक की जरूरत नहीं समझी। लखनऊ में अपने एक दोस्त से गाड़ी मांगकर प्रशिक्षण केलिए पहुंचा हूं। यह तो सरासर सांसदों का अपमान है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव अपराजिता सारंगी का कहना है, हमें संसद सत्र की वजह से प्रशिक्षण कार्यक्रम जल्दी करने के लिए बोला गया। बैठने के प्रोटोकॉल की मुझे जानकारी नहीं थी, इसलिए गलती हो गई। मैं माफी मांगती हूं।

मैं अध्यक्षता नहीं करने आई थी। मैं केवल अतिथि थी जिसे योजना के बारे में प्रशिक्षण देना था। सांसदों की सभी बात मैंने नोट की हैं, इनको आगे ध्यान रखा जाएगा।
 

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