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मुख्य सचिव के निर्देश के बावजूद नहीं सुन रहे अफसर
Fri, 12 Feb 2021 04:18 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 12 Feb 2021 04:18 PM IST
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मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
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मुख्य सचिव बार-बार अफसरों को लंबित मुकदमों में प्रतिशपथपत्र दाखिल करने के लिए लिखित आदेश दे रहे हैं। लेकिन शासन के अफसर हैं कि उनकी सुनते ही नहीं। एक बार फिर मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपने का हवाला देते हुए उन्होंने 15 दिन में लंबित मामलों में प्रतिशपथपत्र दाखिल कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने इससे पूर्व दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए एक बार फिर शासन के अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों व सचिवों को पत्र लिखा है। उन्होंने अफसरों को निर्देशित किया है कि वे लंबित वादों में समयबद्ध ढंग से अभियान चलाकर प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने की कार्यवाही कर 15 दिन में अवगत कराएं, जिससे मुख्यमंत्री को बताया जा सके। उन्होंने महाधिवक्ता कार्यालय की वेबसाइट पर जनवरी-2012 से 5 फरवरी-2021 तक हाईकोर्ट में प्रतिशपथ दाखिल किए जाने के लिए लंबित वादों की सूची भी भेजी है।
इन विभागों में प्रतिशपथ पत्र के लिए सबसे ज्यादा वाद
नगर विकास-7549, राजस्व-4893, वित्त-3377, गृह-2865, उच्च शिक्षा-2387, बेसिक शिक्षा-2147, चिकित्सा स्वास्थ्य-1992, औद्योगिक विकास-1407, संस्थागत वित्त-1337, आवास एवं शहरी नियोजन-1042, चिकित्सा शिक्षा-951, गन्ना उद्योग एवं चीनी विकास-813, ग्राम्य विकास-572, नियुक्ति-564, माध्यमिक शिक्षा-545, कृषि-507, समाज कल्याण-488, ऊर्जा-455, सहकारिता-385, श्रम-376, पंचायतीराज-349, प्राविधिक शिक्षा-318, भूतत्व एवं खनिकर्म-283, सिंचाई एवं जल संसाधन-270, राज्य कर-268, खाद्य एवं रसद-261, परिवहन-261 व महिला कल्याण-253
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उन्होंने इससे पूर्व दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए एक बार फिर शासन के अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों व सचिवों को पत्र लिखा है। उन्होंने अफसरों को निर्देशित किया है कि वे लंबित वादों में समयबद्ध ढंग से अभियान चलाकर प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने की कार्यवाही कर 15 दिन में अवगत कराएं, जिससे मुख्यमंत्री को बताया जा सके। उन्होंने महाधिवक्ता कार्यालय की वेबसाइट पर जनवरी-2012 से 5 फरवरी-2021 तक हाईकोर्ट में प्रतिशपथ दाखिल किए जाने के लिए लंबित वादों की सूची भी भेजी है।
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इन विभागों में प्रतिशपथ पत्र के लिए सबसे ज्यादा वाद
नगर विकास-7549, राजस्व-4893, वित्त-3377, गृह-2865, उच्च शिक्षा-2387, बेसिक शिक्षा-2147, चिकित्सा स्वास्थ्य-1992, औद्योगिक विकास-1407, संस्थागत वित्त-1337, आवास एवं शहरी नियोजन-1042, चिकित्सा शिक्षा-951, गन्ना उद्योग एवं चीनी विकास-813, ग्राम्य विकास-572, नियुक्ति-564, माध्यमिक शिक्षा-545, कृषि-507, समाज कल्याण-488, ऊर्जा-455, सहकारिता-385, श्रम-376, पंचायतीराज-349, प्राविधिक शिक्षा-318, भूतत्व एवं खनिकर्म-283, सिंचाई एवं जल संसाधन-270, राज्य कर-268, खाद्य एवं रसद-261, परिवहन-261 व महिला कल्याण-253
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