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डीजल चोरी की रकम में अधिकारी भी हिस्सेदार, यूनियन नेता भी शामिल, बाकायदा मेंटेन होता था रजिस्टर

Tue, 10 Aug 2021 01:54 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 01:54 AM IST
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officers also share in the amount of diesel theft
डीजल शेड में टैंकर पार करने वाले शातिर सीएलआई बीएस मीणा को भले ही गिरफ्तार कर लिया गया हो, मगर क्राइम ब्रांच केहाथ ऐसे दस्तावेज लगे हैं, जिससे डीजल चोरी की रकम की बंदरबांट का खुलासा हुआ है। शेड से लेकर डीआरएम दफ्तर तक के अधिकारियों व यूनियन नेताओं तक को हिस्सा दिया जाता था। इसके एवज में उसे संरक्षण मिलता था। इतना ही नहीं हर लेनदेन का बाकायदा रजिस्टर भी मेंटेन किया जाता था।
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बीती 28 जुलाई को उत्तर रेलवे के आलमबाग स्थित डीजल शेड में इंडियन ऑयल डिपो अमौसी से आने वाले दो डीजल टैंकरों में से एक को चीफ लोको इंस्पेक्टर बीएस मीणा ने पार कर दिया था। उसने कागजों में दो टैंकरों की आमद दर्ज की, जबकि आरपीएफ ने सिर्फ एक टैंकर का ही गेटपास बनाया। आरपीएफ ने मामला दर्ज कर इस मामले में खलासी दिलनवाज, ड्राइवर नीरज सिंह, क्लीनर अभिमान सिंह, ट्रक संचालक और कमलेश गुप्ता को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। जबकि सीएलआई बीएस मीणा और सीएलआई चंद्रप्रकाश की गिरफ्तारी आठ अगस्त को हुई थी। इनसे पूछताछ में क्राइम ब्रांच के हाथ कई अहम सबूत लगे हैं।
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20 प्रतिशत कट था फिक्स
सीएलआई बीएस मीणा व चंद्रप्रकाश का डीजल चोरी में बीस प्रतिशत का कट फिक्स था। इसके अतिरिक्त कारखाने के आला अधिकारियों व डीआरएम दफ्तर के अफसर भी अपना हिस्सा लेते थे, जिसके एवज में वह उसकी करतूतों पर पर्दा डालते थे। सूत्र बताते हैं कि तेल चोरी में रेलवे यूनियन के पदाधिकारियों की भी हिस्सेदारी थी। इस बाबत यूनियन नेताओं व रेलवे अधिकारियों से भी क्राइम ब्रांच पूछताछ करेगी।
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जीएम के सामने उठेगा मुद्दा
उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल बुधवार को राजधानी आ रहे हैं। वह लखनऊ मंडल में हो रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा डीजल चोरी के मामले की रिपोर्ट भी देखेंगे। उनके सामने भी यह मुद्दा उठेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि चोरी में लिप्त सीएलआई नौकरी से बर्खास्त किए जा सकते हैं। हालांकि, बीएस मीणा व चंद्रप्रकाश की बर्खास्तगी की मांग रेलकर्मी भी उठा रहे हैं। आरोप है कि बीएस मीणा डीजल शेड में कर्मचारियों से आए दिन मारपीट तक कर लेता था। पर, उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती थी।
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