नर्सिंग कोर्स की छात्रवृत्ति व शुल्क भरपाई सुविधा खत्म, बैठक में लिए गए ये फैसले
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छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए जितने बजट की जरूरत होगी, उसका 60 फीसदी हिस्सा अब केंद्र सरकार देगी। शेष राशि की व्यवस्था राज्य सरकार को करनी होगी। अब तक केंद्र सरकार सिर्फ 15 फीसदी भार ही वहन करती थी।
केंद्र व राज्य के उच्चाधिकारियों के बीच हुई बैठक में यह भी तय हुआ कि नर्सिंग कोर्सेज के लिए यह सुविधा बंद की जाएगी। साथ ही बीएड के विद्यार्थियों के लिए अच्छे अंक की अनिवार्यता भी लागू की जाएगी।
उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश सरकार की ओर से प्रमुख सचिव मनोज सिंह व निदेशक समाज कल्याण बाल कृष्ण त्रिपाठी और केंद्र की ओर से संयुक्त सचिव कल्पानी सरकार शामिल हुईं।
राज्य सरकार के अधिकारियों ने कहा कि जब मैनुअल भुगतान होता था, तब केंद्र सरकार 50 फीसदी भार वहन करती थी। अब शत-प्रतिशत भुगतान ऑनलाइन खातों में भेजा जाता है, तब हिस्सेदारी घटाने की बात की जा रही है। जबकि डीबीटी लागू होने के गड़बड़ की गुंजाइश ही खत्म हो गई है।
वर्ष 2019-20 में ही होगा लागू
इस पर यह सहमति बनी कि अब केंद्र सरकार 60 फीसदी और राज्य सरकार 40 फीसदी हिस्सा देगी। वर्ष 2019-20 से ही इसे लागू कर दिया जाएगा। इस नियम के लागू होने से एक फायदा यह होगा कि इस साल राज्य का दिया बजट बचेगा, जिसका उपयोग पिछले सत्र के बैकलॉग का भुगतान में किया जा सकेगा। पिछले साल एससी वर्ग के करीब दो लाख छात्रों को बजट की कमी से भुगतान नहीं हो सका था।
बैठक में तय हुआ कि योजना में पूर्व दशम कक्षाओं, इंटरमीडिएट, बीए, बीकॉम और बीएससी जैसी कक्षाओं के विद्यार्थियों को तरजीह दी जाए। इस दौरान छात्रवृत्ति वितरण की यूपी की ऑनलाइन व्यवस्था पर प्रस्तुतीकरण भी दिया गया।