लखनऊ: अजीत सिंह हत्याकांड की विवेचना एसटीएफ को, आरोपी पूर्व सांसद के वीडियो ट्वीट होने के बाद आदेश
अजीत सिंह हत्याकांड में आरोपी पूर्व सांसद धनंजय सिंह के वीडियो ट्वीट होने के बाद डीजीपी ने जांच के आदेश दिए थे। अजीत सिंह की पिछले साल छह जनवरी को कठौता चौराहे पर गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी।
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मऊ के मोहम्मदाबाद गोहना के पूर्व उप ज्येष्ठ प्रमुख अजीत सिंह की पिछले साल छह जनवरी को देर शाम 8.30 बजे कठौता चौराहे पर गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड की विवेचना एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने शुक्रवार को एसटीएफ को स्थानांतरित कर दी है। हाल ही में पूर्व सांसद धनंजय सिंह को लेकर एक वीडियो ट्वीट किया गया था, जिसमें वह एक क्रिकेट मैच के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए।
डीजीपी मुकुल गोयल ने इसकी जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद विवेचना एसटीएफ को स्थानांतरित की गई। हालांकि, पिछले साल अगस्त में हत्याकांड की विवेचना विभूतिखंड थाने से गाजीपुर पुलिस को दी गई थी। पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख अजीत सिंह मऊ का हिस्ट्रीशीटर था। जिला बदर होने के बाद गोमतीनगर विस्तार इलाके के एक अपार्टमेंट में ठिकाना बनाया था।
पिछले साल छह जनवरी को कठौता चौराहे पर एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स से निकलते वक्त गोलियों से भूनकर उसकी हत्या कर दी गई थी। इस दौरान उसका करीबी मोहर सिंह भी घायल हुआ था। जवाबी फायरिंग में एक बदमाश को भी गोली लगी थी, जबकि राहगीर आकाश भी घायल हुआ था। मोहर ने तहरीर देकर आजमगढ़ जेल में बंद अखंड सिंह व ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू सिंह पर सुपारी देकर गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ डॉक्टर से हत्या कराने का आरोप लगाया था।
गिरधारी पर शूटरों का इंतजाम करने का आरोप था। पुलिस ने पहली गिरफ्तारी अंबेडकरनगर के संदीप सिंह बाबा की की थी। संदीप ने ही पूरे हत्याकांड से परदा हटाया था। इसके बाद पुलिस ने अंकुर सिंह, मुस्तफा, प्रिंस, बंधन, राजेश तोमर और रेहान को गिरफ्तार किया था।
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने दबोचा था मुख्य शूटर को
हत्याकांड के मुख्य शूटर गिरधारी को दिल्ली की क्राइम ब्रांच की टीम ने 11 जनवरी को दबोचा था। उसके पास अवैध पिस्तौल बरामद किया था। विभूतिखंड पुलिस उसे वारंट बी पर लखनऊ लाई और कस्टडी रिमांड ली। दूसरे दिन 14 फरवरी की रात को हत्या में इस्तेमाल असलहा बरामद कराने के दौरान गिरधारी ने पुलिस पर हमला कर भागने की कोशिश की। जवाबी फायरिंग में गिरधारी ढेर हो गया। पुलिस इस मामले में जेल में बंद आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
पूर्व सांसद पर साजिश रचने का आरोप, 25 हजार का ईनाम
सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में सामने आया कि हत्याकांड की साजिश जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने रची थी। इसके बाद पुलिस ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह के खिलाफ 20 फरवरी को सीजेएम कोर्ट से वारंट जारी किया गया। इसके बाद पूर्व सांसद ने छह मार्च को प्रयागराज के सिविल कोर्ट में चल रहे पुराने मामले की जमानत तुड़वाकर समर्पण कर दिया। कुछ दिन तक उसे नैनी जेल में रखा गया। इसके बाद फर्रुखाबाद भेज दिया गया था, जहां अप्रैल में जमानत मिल गई। इसके बाद से पूर्व सांसद फरार है। लखनऊ पुलिस की टीम लगातार तलाश में दबिश दे रही थी। पूर्व सांसद ने जिला पंचायत चुनाव में पत्नी श्रीकला सिंह को मैदान में उतारा और बाहुबल से जीत दिला दी। इसके पहले ही वारंट जारी होने के कुछ दिन बाद लखनऊ कमिश्नरेट ने धनंजय सिंह पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया था।
35 राउंड फायरिंग से दहल गई थी राजधानी
अजीत सिंह पर छह शूटरों ने ताबड़तोड़ 35 राउंड गोलियां बरसाई थीं। पोस्टमार्टम में अजीत को 22 गोलियां लगने की पुष्टि हुई थी। मोहर सिंह को दो गोलियां लगी थीं। वारदात कठौता चौकी के सामने चंद कदमों की दूरी पर हुई थी। शूटर कमता तिराहे के पास स्थित अवध बस स्टेशन पर अपनी बाइक छोड़कर कार से भाग निकले थे।