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निजी मेडिकल कॉलेज की मनमानी होगी बंद, अब अपनी वेबसाइट पर देना होगा फीस का पूरा ब्योरा
Fri, 05 Jul 2019 01:25 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Fri, 05 Jul 2019 01:25 PM IST
सार
- ज्यादा फीस लेने पर उन्नाव के कॉलेज को काउंसलिंग से बाहर करने की चेतावनी
- मुजफ्फरनगर के कॉलेज के खिलाफ ज्यादा फीस मांगने की जांच करेगी कमेटी
- सभी निजी कॉलेजों को वेबसाइट पर शुल्क का ब्योरा देने के निर्देश
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विस्तार
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने निजी मेडिकल कॉलेजों की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाया है। मुजफ्फरनगर के मेडिकल कॉलेज के खिलाफ अधिक फीस लेने के मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई गई है तो उन्नाव के एक निजी मेडिकल कॉलेज को अभ्यर्थियों से ज्यादा शुल्क लेने पर नीट यूजी काउंसलिंग से बाहर करने की चेतावनी दी है।
शुल्क की जानकारी न देने वाले अन्य मेडिकल कॉलेजों को 100 रुपये के स्टांप पेपर पर शासन से निर्धारित शुल्क लेने का शपथ पत्र देने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा ने गुरुवार को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
दरअसल, मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्र ने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा कार्यालय को बीते 4 जून को पत्र लिखकर ज्यादा फीस वसूलने की शिकायत की थी। उसने आरोप लगाया था कि निर्धारित छह लाख रुपये फीस के अतिरिक्त मांगा जा रहा है। जब शुल्क नहीं जमा किया तो निलंबित करके हॉस्टल से भी निकाल दिया गया।
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इस पर महानिदेशक ने संबंधित कॉलेज के प्रधानाचार्य से जवाब मांगा है और डीएम मुजफ्फर नगर, प्रधानाचार्य मेरठ मेडिकल कॉलेज और सहारनपुर मेडिकल कॉलेज की तीन सदस्यीय टीम को पूरे मामले की जांच करके तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
सरस्वती मेडिकल कॉलेज उन्नाव के खिलाफ भी एक छात्र ने एमबीबीएस में प्रवेश के लिए 26 लाख रुपये फीस मांगने की शिकायत की है। इस पर महानिदेशालय ने संबंधित प्रधानाचार्य व प्रबंधक से जवाब तलब किया है और अभ्यर्थियों से शासन से निर्धारित शुल्क लेने की हिदायत दी है। साथ ही मेडिकल कॉलेज को अपनी वेबसाइट पर निर्धारित शुल्क प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा न करने पर उसे नीट यूजी काउंसलिंग से बाहर करने की चेतावनी दी है।
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शुल्क की जानकारी न देने वाले अन्य मेडिकल कॉलेजों को 100 रुपये के स्टांप पेपर पर शासन से निर्धारित शुल्क लेने का शपथ पत्र देने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा ने गुरुवार को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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दरअसल, मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्र ने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा कार्यालय को बीते 4 जून को पत्र लिखकर ज्यादा फीस वसूलने की शिकायत की थी। उसने आरोप लगाया था कि निर्धारित छह लाख रुपये फीस के अतिरिक्त मांगा जा रहा है। जब शुल्क नहीं जमा किया तो निलंबित करके हॉस्टल से भी निकाल दिया गया।
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इस पर महानिदेशक ने संबंधित कॉलेज के प्रधानाचार्य से जवाब मांगा है और डीएम मुजफ्फर नगर, प्रधानाचार्य मेरठ मेडिकल कॉलेज और सहारनपुर मेडिकल कॉलेज की तीन सदस्यीय टीम को पूरे मामले की जांच करके तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
सरस्वती मेडिकल कॉलेज उन्नाव के खिलाफ भी एक छात्र ने एमबीबीएस में प्रवेश के लिए 26 लाख रुपये फीस मांगने की शिकायत की है। इस पर महानिदेशालय ने संबंधित प्रधानाचार्य व प्रबंधक से जवाब तलब किया है और अभ्यर्थियों से शासन से निर्धारित शुल्क लेने की हिदायत दी है। साथ ही मेडिकल कॉलेज को अपनी वेबसाइट पर निर्धारित शुल्क प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा न करने पर उसे नीट यूजी काउंसलिंग से बाहर करने की चेतावनी दी है।
22 निजी कॉलेजों से मांगे शपथ पत्र
महानिदेशालय ने प्रदेश के 22 निजी मेडिकल कॉलेजों को पत्र लिखकर शासन के निर्देशानुसार अपनी वेबसाइट पर शुल्क की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। निजी कॉलेज प्रबंधन से कहा गया है कि वे शिक्षण, सिक्योरिटी व हॉस्टल का शुल्क ही प्रदर्शित करें। अन्य मद में शुल्क प्रदर्शित करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मेडिकल कॉलेजों की वेबसाइट की जांच में एमबीबीएस के शुल्क में विरोधाभास मिला है। ऐसे सभी कॉलेजों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई है। उन निजी मेडिकल कॉलेजों को भी चेतावनी दी गई है जिन्होंने शुल्क के बारे में जानकारी ही नहीं दी है। मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज और सरस्वती मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से अधिक शुल्क लेने को लेकर जवाब-तलब किया गया है।
- प्रो. केके गुप्ता, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा
मेडिकल कॉलेजों की वेबसाइट की जांच में एमबीबीएस के शुल्क में विरोधाभास मिला है। ऐसे सभी कॉलेजों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई है। उन निजी मेडिकल कॉलेजों को भी चेतावनी दी गई है जिन्होंने शुल्क के बारे में जानकारी ही नहीं दी है। मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज और सरस्वती मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से अधिक शुल्क लेने को लेकर जवाब-तलब किया गया है।
- प्रो. केके गुप्ता, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा