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लखनऊ हाईकोर्ट ने दिया आदेश, अब नए सिरे से जारी होंगे पीसीएस (प्री) 2018 के परिणाम
Tue, 01 Oct 2019 10:22 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Tue, 01 Oct 2019 10:22 AM IST
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Lucknow High Court
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सम्मिलित राज्य/ प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा (पीसीएस-प्री 2018) का परिणाम संशोधित कर नए सिरे से जारी करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने प्रदेश की महिलाओं को दिए क्षैतिज आरक्षण को संविधान के अनुच्छेद 16 के विपरीत बताया और इसे खारिज कर दिया।
अदालत ने यह आदेश दिल्ली की अभ्यर्थी खुशबू बंसल की याचिका पर दिया। याचिका में राज्य सरकार के नौ जनवरी, 2017 के उस आदेश को चुनौती दी गई जिसके तहत परीक्षा में यूपी की महिलाओं के लिए क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। इसमें राज्य की महिलाओं को 20 फीसदी आरक्षण मिलता है, जबकि अन्य राज्यों की महिला अभ्यर्थियों को सामान्य अभ्यर्थी की श्रेणी में शामिल किया जाता है। इस परीक्षा के परिणाम 30 मार्च, 2019 को घोषित किए गए थे।
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अदालत ने यह आदेश दिल्ली की अभ्यर्थी खुशबू बंसल की याचिका पर दिया। याचिका में राज्य सरकार के नौ जनवरी, 2017 के उस आदेश को चुनौती दी गई जिसके तहत परीक्षा में यूपी की महिलाओं के लिए क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। इसमें राज्य की महिलाओं को 20 फीसदी आरक्षण मिलता है, जबकि अन्य राज्यों की महिला अभ्यर्थियों को सामान्य अभ्यर्थी की श्रेणी में शामिल किया जाता है। इस परीक्षा के परिणाम 30 मार्च, 2019 को घोषित किए गए थे।
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याची के वकील बीआर सिंह ने दलील दी कि क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था दिया जाना संविधान की मंशा के विपरीत है। उन्होंने सरकार के आदेश को खारिज कर परिणाम फिर से घोषित करने का आग्रह किया। जबकि सरकारी अधिवक्ता अशोक शुक्ला ने कोर्ट को बताया कि 30 जून, 2019 के आदेश से 9 जनवरी, 2017 की व्यवस्था खत्म की जा चुकी है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि सरकार ने व्यवस्था समाप्त करने के आदेश 30 जून को दिए जबकि परिणाम 30 मार्च को घोषित किए जा चुके हैं। सरकारी वकील ने बताया कि अदालत ने प्रदेश की महिलाओं के लिए की गई क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था को समाप्त कर संशोधित परिणाम जारी करे जाने के आदेश दिए हैं।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि सरकार ने व्यवस्था समाप्त करने के आदेश 30 जून को दिए जबकि परिणाम 30 मार्च को घोषित किए जा चुके हैं। सरकारी वकील ने बताया कि अदालत ने प्रदेश की महिलाओं के लिए की गई क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था को समाप्त कर संशोधित परिणाम जारी करे जाने के आदेश दिए हैं।