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आईडी-नैट के बाद ही मरीजों को मिलेगा ब्लड
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लोहिया संस्थान में शुरू होगी सुविधा, रक्तदाता में भी हो सकेगी बीमारियों की पहचान
लोहिया संस्थान के ब्लड बैंक में अब इंडिविजुअल डोनर-न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग (आईडी-नैट) के बाद मरीजों को खून मिलेगा। इससे एक तरफ जहां रक्तदाता में किसी तरह की बीमारी होने पर तत्काल जानकारी मिल सकेगी वहीं मरीज को पहले से कहीं ज्यादा शुद्ध खून मिल सकेगा।
लोहिया संस्थान के निदेशक प्रो. एके सिंह ने बताया कि इस नई तकनीक का इस्तेमाल होने पर मरीजों पर किसी तरह का भार नहीं पड़ेगा। इसके लिए संस्थान को एनआरएचएम से 1.86 करोड़ रुपये मिले हैं। अभी तक यह सुविधा सिर्फ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के ब्लड बैंक में है। यह सुविधा देने वाला लोहिया संस्थान प्रदेश का दूसरा ब्लड बैंक है।
संस्थान की डीन नुजहत हुसैन ने बताया कि नई मशीन के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। मशीन आते ही यह सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
10 दिन के भीतर हुआ संक्रमण भी पकड़ा जाएगा
ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. वीके शर्मा ने बताया कि आईडी-नैट में डोनर की एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी की जांच होगी। अभी भी यह तीनों जांचें हो रही हैं, लेकिन अब 10 दिन के भीतर भी मरीज संक्रमित हुआ है तो भी बीमारी पकड़ी जा सकेगी। संस्थान में प्रत्येक डोनर के खून की अलग जांच होगी। खून की शुद्धता में किसी तरह कसर नहीं रहेगा।
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लोहिया संस्थान के ब्लड बैंक में अब इंडिविजुअल डोनर-न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग (आईडी-नैट) के बाद मरीजों को खून मिलेगा। इससे एक तरफ जहां रक्तदाता में किसी तरह की बीमारी होने पर तत्काल जानकारी मिल सकेगी वहीं मरीज को पहले से कहीं ज्यादा शुद्ध खून मिल सकेगा।
लोहिया संस्थान के निदेशक प्रो. एके सिंह ने बताया कि इस नई तकनीक का इस्तेमाल होने पर मरीजों पर किसी तरह का भार नहीं पड़ेगा। इसके लिए संस्थान को एनआरएचएम से 1.86 करोड़ रुपये मिले हैं। अभी तक यह सुविधा सिर्फ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के ब्लड बैंक में है। यह सुविधा देने वाला लोहिया संस्थान प्रदेश का दूसरा ब्लड बैंक है।
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संस्थान की डीन नुजहत हुसैन ने बताया कि नई मशीन के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। मशीन आते ही यह सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
10 दिन के भीतर हुआ संक्रमण भी पकड़ा जाएगा
ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. वीके शर्मा ने बताया कि आईडी-नैट में डोनर की एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी की जांच होगी। अभी भी यह तीनों जांचें हो रही हैं, लेकिन अब 10 दिन के भीतर भी मरीज संक्रमित हुआ है तो भी बीमारी पकड़ी जा सकेगी। संस्थान में प्रत्येक डोनर के खून की अलग जांच होगी। खून की शुद्धता में किसी तरह कसर नहीं रहेगा।
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