पीएम मोदी की टक्कर में डिंपल लाईं मिशन 300!
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मोदी दिन-ब-दिन विरोधी सियासी दलों से कहीं आगे निकलते जा रहे हैं। विकास के आंकड़े और यशोदाबेन की बात न करें, तो मोदी को घेरने का एक भी मौका सपा, बसपा या कांग्रेस के पास नहीं है।
लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद सपा यूपी में 2017 को लेकर बुरी तरह आशंकित है। माहौल भाजपामय हो रहा है और अपना किला ढहने से बचाने की पुरजोर कोशिश हो रही है।
एक तरफ अखिलेश पुरानी योजनाओं को पूरा करने में जुटे हुए हैं, तो मुलायम मंत्रियों व अधिकारियों के पेंच करकर जनता के पास जाने की फिराक में हैं।
इस दौरान, अखिलेश की पत्नी और कन्नौज से लोकसभा सांसद डिंपल यादव ने मोदी की योजनाओं को टक्कर देने के लिए मिशन 300 पेश किया है। जल्दबाजी का आलम यह है कि यूपी में इस मिशन पर काम भी शुरू हो गया है।
यूपी के 300 गांवों को बनाएंगी 'आदर्श'
मोदी की सांसद आदर्श ग्राम योजना से सियासत आसमान से वापस जमीन पर पहुंच गई है। सियासी लाभ मिले न मिले, गांव के गरीब किसानों के दिन बहुरने लगे हैं।
यूपी के सांसद एक के बाद एक गावों को आदर्श बना रहे हैं। इस बीच, डिंपल यादव ने भी यूपी में मोदी जैसी एक योजना शुरू कर दी है। मोदी की योजना से यूपी में 80 गांवों को लाभ होगा, तो डिंपल की योजना 300 गांवों की किस्मत बदलेगी।
डिंपल के मिशन-300 के तहत हर जिले में चार आदर्श गांव बनाए जाएंगे। इसका सबसे अहम मकसद कुपोषण खत्म करना होगा। यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों व मुख्य विकास अधिकारियों को दो-दो गांव गोद लेकर उन्हें कुपोषण मुक्त बनाने को कहा है। बाद में, इन्हीं गांवों का मॉडल जिले के सभी अन्य गांवों पर लागू किया जाएगा।
डिंपल को हाल ही में प्रदेश के पोषण मिशन का चेहरा बनाया गया है। जिम्मेदारी मिलते ही डिंपल ने करीब से इस मिशन पर काम करना भी शुरू कर दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, डिंपल इस मिशन की जबरदस्त मॉनीटरिंग कर रही हैं।
यूपी के लिए नासूर बना है कुपोषण
सियासत के इतर, यूपी के बच्चों में कुपोषण के मामले चौंकाने वाले हैं। तमाम स्तरों पर कुपोषण से निजात पाने की कोशिश यूपी सरकार कर रही है। ऐसे में डिंपल यादव की योजना का मकसद गांव तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का भी हो सकता है।
2005-06 के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-3 के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में तीन साल से कम उम्र के 42 फीसदी बच्चों का वजन जरूरत से कम, 52 फीसदी बच्चे कुपोषित और 19.5 फीसदी बच्चों का वजन बुरी तरह कम था।
1998 से 2006 के बीच भले ही अंडरवेट और कुपोषित बच्चों की तादाद में कमी आई थी, लेकिन एक्यूटली अंडरवेट बच्चों की तादाद तीन फीसदी बढ़ गई थी। अगर इन्हें अंकों में देखा जाए तो 75 लाख बच्चे अंडरवेट, 93 लाख बच्चे कुपोषित और 35 लाख बच्चे एक्यूटली अंडरवेट थे।
रिपोर्ट आने के करीब आठ साल बाद आज की तारीख में यूपी की हालत में खासा सुधार नहीं हुआ है। यूपी में आज भी 12.6 लाख बच्चे एक्यूट कुपोषण्ा के शिकार हैं।
...और नासूर मिटा रही हैं डिंपल
कन्नौज से लोकसभा सांसद बनने के बाद से जब भी डिंपल को बोलने का मौका मिला, उन्होंने यूपी के माथे से कुपोषण का कलंक मिटाने की बात जरूर की। डिंपल के कामों की लिस्ट में सबसे पहला नंबर महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य का है।
सीएम अखिलेश यादव के सचिव आमोद कुमार कहते हैं, 'डिंपलजी ने खास तौर पर प्रदेश के न्यूट्रिशन मिशन को बढ़ावा दिया है, ताकि यहां मौजूद कुपोषण के हालात को बेहतर बनाया जा सके।' डिँपल के करीबी सूत्रों ने यह भी बताया कि वह किसी भी दिन इस मिशन की पड़ताल करने के लिए दौरे पर निकल सकती हैं, हालांकि उनकी तारीख अभी तय नहीं है।
डिंपल के मिशन-300 के तहत, हर गांव में कुपोषित बच्चों की एक लिस्ट तैयार की जाएगी। गर्भवती महिलाओं की जांच होगी और हर छह महीने पर शिशुओं के वजन और पोषण का अध्ययन किया जाएगा। यह सिलसिला तब तक जारी रहेगा, जब तक बच्चा पांच साल का न हो जाए।
मिशन डायरेक्टर कामरान रिजवी ने बताया कि गांवों को चिह्नित कर लिया गया है और कुपोषण के कलंक को मिटाने के लिए काम भी शुरू हो चुका है।