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50 हजार तक की अपील, 25 लाख तक के रिवीजन जिला न्यायालय में ही होंगे
Wed, 26 Jun 2019 02:11 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Wed, 26 Jun 2019 02:11 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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योगी सरकार ने मुकदमों के तेज निस्तारण व सुलह-समझौते से वाद समाधान की व्यवस्था को गति देने के लिए सिविल विधि (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक-2019 के मसौदे को मंजूरी दे दी। अब 50 हजार तक की मालियत की अपील और 25 लाख रुपये से कम की मालियत वाले मामलों में रिवीजन जिला न्यायाधीश कोर्ट में ही हो सकेगी।
इसके अलावा मध्यस्थता से जुड़े मामलों की सुनवाई जिला जज के साथ अपर जिला न्यायाधीश भी करेंगे। इससे बड़ी संख्या में हाईकोर्ट में लंबित वादों की सुनवाई अब जिला न्यायालय में हो सकेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सिविल विधि (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक-2019 के माध्यम से सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 102 व 115 में तथा माध्यस्थम और सुलह अधिनियम-1996 की धारा-2(ङ) में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
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सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा-102 के अंतर्गत वर्तमान में 25 हजार रुपये तक की मालियत वाले मामलों में द्वितीय अपील (उच्च न्यायालय में) नहीं की जा सकती है। अब 50 हजार रुपये तक की अपील उच्च न्यायालय में नहीं की जा सकेगी।
प्रथम अपील जिला जज के न्यायालय में होती है। अब 50 हजार रुपये तक की अपील जिला जज ही सुन सकेंगे। इसी तरह संहिता की धारा-115 के अनुसार उच्च न्यायालय वर्तमान में पांच लाख रुपये या इससे अधिक मालियत वाले मामलों के रिवीजन की सुनवाई कर सकता है। अब यह सीमा बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी जाएगी। यानी 25 लाख रुपये से कम सीमा वाले मामलों के रिवीजन की सुनवाई जिला जज ही कर लेंगे।
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इसके अलावा मध्यस्थता से जुड़े मामलों की सुनवाई जिला जज के साथ अपर जिला न्यायाधीश भी करेंगे। इससे बड़ी संख्या में हाईकोर्ट में लंबित वादों की सुनवाई अब जिला न्यायालय में हो सकेगी।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सिविल विधि (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक-2019 के माध्यम से सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 102 व 115 में तथा माध्यस्थम और सुलह अधिनियम-1996 की धारा-2(ङ) में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
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सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा-102 के अंतर्गत वर्तमान में 25 हजार रुपये तक की मालियत वाले मामलों में द्वितीय अपील (उच्च न्यायालय में) नहीं की जा सकती है। अब 50 हजार रुपये तक की अपील उच्च न्यायालय में नहीं की जा सकेगी।
प्रथम अपील जिला जज के न्यायालय में होती है। अब 50 हजार रुपये तक की अपील जिला जज ही सुन सकेंगे। इसी तरह संहिता की धारा-115 के अनुसार उच्च न्यायालय वर्तमान में पांच लाख रुपये या इससे अधिक मालियत वाले मामलों के रिवीजन की सुनवाई कर सकता है। अब यह सीमा बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी जाएगी। यानी 25 लाख रुपये से कम सीमा वाले मामलों के रिवीजन की सुनवाई जिला जज ही कर लेंगे।
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