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Lucknow News: अब ब्रा में लगा पैच बता देगा स्तन कैंसर का खतरा
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लखनऊ। स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए महिलाओं को अब अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर नहीं जाना पड़ेगा। इसके लिए उन्हें विशेष प्रकार की डिवाइस लगी ब्रा पहननी होगी। मोबाइल एप के माध्यम से यह डिवाइस शुरुआती अवस्था में ही स्तन कैंसर का पता लगा लेगी। इस डिवाइस के लिए केजीएमयू और आईआईटी कानपुर को पेटेंट मिला है।
केजीएमयू और कानपुर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान का संयुक्त बायोडिजाइन कार्यक्रम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल बायोडिजाइन-सिनर्जाइजिंग हेल्थकेयर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (एसआईबी शाइन) कार्यक्रम चल रहा है। इसके कार्यकारी निदेशक डॉ. ऋषि सेठी ने बताया कि ए वियरेबल सेंसर पैच फॉर ब्रेस्ट एब्नॉर्मलटी मॉनीटरिंग शीर्षक के साथ 20 वर्ष के लिए यह पेटेंट श्रेया एम नायर, डॉ.तुषार संधान और डॉ. पूजा रमाकांत को मिला है।
...इसलिए जरूरी है स्तन कैंसर का जल्द पता लगना
प्रो. ऋषि ने बताया कि स्तन कैंसर का खतरा उन महिलाओं में ज्यादा रहता है, जिनके परिवार में किसी को यह बीमारी हो चुकी हो। स्तन कैंसर का पता शुरुआती चरण में लगने पर इलाज में आसानी हो जाती है।
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इस तरह काम करेगी डिवाइस
महिलाएं को अपने अंत:वस्त्र में डिवाइस वाला पैच लगाना होगा। यह डिवाइस मोबाइल एप से जुड़ी होगी। इसकी वजह से कुछ ही समय में गांठ या स्तन कैंसर से जुड़ी पूरी रिपोर्ट एप पर आ जाएगी।
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केजीएमयू और कानपुर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान का संयुक्त बायोडिजाइन कार्यक्रम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल बायोडिजाइन-सिनर्जाइजिंग हेल्थकेयर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (एसआईबी शाइन) कार्यक्रम चल रहा है। इसके कार्यकारी निदेशक डॉ. ऋषि सेठी ने बताया कि ए वियरेबल सेंसर पैच फॉर ब्रेस्ट एब्नॉर्मलटी मॉनीटरिंग शीर्षक के साथ 20 वर्ष के लिए यह पेटेंट श्रेया एम नायर, डॉ.तुषार संधान और डॉ. पूजा रमाकांत को मिला है।
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...इसलिए जरूरी है स्तन कैंसर का जल्द पता लगना
प्रो. ऋषि ने बताया कि स्तन कैंसर का खतरा उन महिलाओं में ज्यादा रहता है, जिनके परिवार में किसी को यह बीमारी हो चुकी हो। स्तन कैंसर का पता शुरुआती चरण में लगने पर इलाज में आसानी हो जाती है।
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इस तरह काम करेगी डिवाइस
महिलाएं को अपने अंत:वस्त्र में डिवाइस वाला पैच लगाना होगा। यह डिवाइस मोबाइल एप से जुड़ी होगी। इसकी वजह से कुछ ही समय में गांठ या स्तन कैंसर से जुड़ी पूरी रिपोर्ट एप पर आ जाएगी।