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Lucknow News: कबाड़ी से नकली नोट का व्यापारी बना ''नूरी बाबा''

Fri, 03 Jan 2025 01:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Fri, 03 Jan 2025 01:06 AM IST
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'Noori Baba' became a counterfeit currency trader from a junk dealer
श्रावस्ती। वीरगंज बाजार में एक वर्ष पूर्व तक कबाड़ का कारोबार करने वाला नूरी बाबा नकली नोट का व्यापारी बन चुका है। पिता की मौत के बाद न सिर्फ इसकी लगातार आमदनी बढ़ती गई बल्कि झाडफूंक से मिली पहचान के बाद वह गंगापुर के लक्ष्मनपुर में मदरसा प्रबंधक बन गया। इसके तार नेपाल से महाराष्ट्र तक जुड़े हुए हैं। फिलहाल पुलिस नूरी बाबा व उनके साथियों पर और नकेल कसने में जुट गई है।
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नेपाल सीमा से करीब 12 किलोमीटर दूरी पर स्थित मल्हीपुर थाना क्षेत्र का लक्ष्मनपुर गंगापुर गांव अचानक तब सुर्खियों में आ गया जब लक्ष्मनपुर स्थित फैजुर्रनबी मदरसे में नकली नोट छापने के आरोप में मदरसा संचालक मुबारक अली उर्फ नूरी बाबा गिरफ्तार हुआ। एक वर्ष पूर्व तक नूरी बाबा थाना क्षेत्र के वीरगंज बाजार स्थित अपने मकान में कबाड़ का कारोबार करता था। इसके बाद वह बहराइच के पयागपुर थाना क्षेत्र के ग्राम काशी जोत निवासी जलील अहमद के संपर्क में आया। इससे सीख लेकर नूरी बाबा भी नकली नोट छापने के कारोबार में जुट गया। इसके बाद न सिर्फ उसने अपनी कबाड़ की दुकान बंद कर दी बल्कि नेपाल से महाराष्ट्र तक अपने नेटवर्क के माध्यम से नकली नोट का कारोबार फैलाने लगा।
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झाड़फूंक ने मुबारक अली को बना दिया नूरी बाबा

नूरी बाबा के पिता असगर अली की मौत करीब 30 साल पहले हो गई थी। पांच भाइयों में नूरी बाबा तीसरे नंबर पर था। बड़ा भाई पुल्लू गांव में खेती किसानी का काम करता है। दूसरा भाई अकबर अली उर्फ बादशाह, चौथे नंबर का भाई रफीक व पांचवें नंबर का भाई मुनव्वर अली महाराष्ट्र के मुंबई में रहकर कबाड़ का कारोबार करते हैं। वहीं नूरी बाबा वीरगंज में कबाड़ का कारोबार करते करते झाड़फूंक भी करने लगा जिसने उसे मुबारक अली से नूरी बाबा के रूप में पहचान दिलाई। इसके बाद करीब आठ वर्ष पूर्व नूरी बाबा ने गांव के ही बाल मुकुंद पाठक के पुत्र पंकज, प्रेम, रामवचन, किशोर व सुशील के हिस्से का करीब ढाई बीघा भूमि खरीद कर उसमें मदरसा स्थापित किया।
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तेजी से बना धनाढ्य तो ऊंची हुई पहुंच

विगत दस वर्ष के बीच नूरी बाबा ने न सिर्फ तेजी से अपना नाम बढ़ाया बल्कि अपनी हैसियत भी बढ़ाई। वीरगंज बाजार सहित लक्ष्मनपुर गांव में उसके चार मकान हैं जिसमें एक पुराना व तीन नया मकान है। कुछ जानकारों की माने तो महाराष्ट्र के मुंबई में भी उसका मकान है।



नेपाल से महाराष्ट्र तक जुड़े हैं तार

नूरी बाबा की रिश्तेदारी नेपाल सीमा से सटे भरथा रोशनगढ़ सहित नेपाल में भी है। इसके तीन भाई व कई रिश्तेदार मुंबई में भी हैं। जहां इसका अक्सर आना जाना रहता है। जानकारों की माने तो यही पहचान इसके काले कारोबार को फलने फूलने में सहायक बनी। जिसके कारण इसकी पहुंच ऊपर तक हो गई।



गांव में रहती है पहली बीवी

नूरी बाबा का पहला निकाह शबीना से हुआ था जिससे चार बेटियां व दो बेटे हैं। इसके साथ वह गांव में ही रहता है जबकि दूसरी बीबी बहराइच के मदरसा जामिया नूरिया मस्जिद में शिक्षिका है। वहीं अन्य तीन बीवियां अलग-अलग स्थानों पर रहती है। इसकी जानकारी गांव वालों को भी नहीं है।




आरोपियों की खुलेगी हिस्ट्रीशीट

जाली नोट मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों में से तीन बहराइच के हैं जबकि दो आरोपी जिले के हैं। सभी आरोपियों की हिस्ट्रीशीट खोली जाएगी। इसके लिए बहराइच के एसपी को भी पत्र लिखा जाएगा।

घनश्याम चौरसिया, एसपी
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